• धारा 370 एवं 35A ने अलगाव वाद को बढ़ावा दिया है।-पार्ट -1
    डॉ शोभा भारद्वाज September 23
    कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है भारतवासी अपने इस भूभाग के लिए बहुत सम्वेदनशील शील है। कश्मीर का बहुत बड़ा बजट है। कश्मीर की रक्षा और पाक समर्थित आतंकवादियों से बचाने के लिए के लिये लगातार बलिदान दिये हैं। अक्सर सुरक्षा बल के शहीद जवानों के शव तिरंगे से लिपट कर आते हैं। 14 मई […]
  • मानवता, धार्मिकता और राष्ट्रीयता
    डॉ. विनोद बब्बर September 22
    संपादक राष्ट्र किंकर
  • माँ की पाती संपादक के नाम
    डॉ. विनोद बब्बर August 3
    हर पत्रिका की तरह हमारे पास भी ढेरों पत्र आते हैं। उन में से कुछ पत्र का उत्तर तो ज्योतिषाचार्य जी, तो कुछ का स्वास्थ्य- विशेषज्ञ देते हैं। कभी- कभी पारिवारिक अथवा सामाजिक समस्याएं भी आती हैं। तो कानूनी सलाह मांगने वालों की भी कमी नहीं होती। प्रयास रहता है कि उस विषय के ज्ञाता […]
  • जंगल की जड़ें शहरों में पनपती हें पार्ट -1 ( नक्सल वाद )
    डॉ. शोभा भारद्वाज August 2
    सत्तर के दशक में कालेज की दीवारों पर अनेक नारे छात्रों के लिए गढ़ कर लिखे गये थे। जैसे ‘सत्ता का जन्म बंदूक गोली से होता है’ किशोरावस्था से जवानी में पदार्पण करते आयु के जवान बहुत संवेदन शील तथा उनमें कुछ कर गुजरने की भावना होती है। छात्रों के बीच बहस होने लगी चीन […]

कौलुम्बा कलिधर June 13
एक शहर में एक अमीर व्‍यापारी रहता था। पूरे दिन बहुत मेहनत से काम करता था। एक दिन उसने अपने घर के सामने एक भिखारी को देखा तो थोड़ा चिंतित हो गया। व्‍यापारी मन ही मन में सोचने लगा कि अगर इस भिखारी के पास बहुत सारा धन होता, तो यह भीख नही मांगता। फिर […]
हरिहर निवास शर्मा May 18
6 जुलाई 1956 को उज्जैन के बडनगर में जन्मे स्व. अनिल माधव दवे वाल्यकाल से ही संघ के स्वयंसेवक थे। इंदौर के गुजराती कोलेज से उन्होंने ग्रामीण विकास और प्रबंधन में विशेषज्ञता के साथ, कामर्स में मास्टर उपाधि प्राप्त की। यही वह समय था जब वे जय प्रकाश जी के समग्र क्रान्ति आन्दोलन से भी […]
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा May 16
अब जिसका कोइ काम नहीं है पत्रकार है बस,करतूतों की कलम हाथ में कलाकार है ये सब धीरे - धीरे सम्पादक भी हो जाते हैं कलम,बलम के शेर शाम को ही खातें हैं
डा. विनोद बब्बर May 10
यूँ ध्वनि प्रदूषण के विरूद्ध अनेक नियम-अधिनियम हैं, जिन पर हमारी अदालतें बार-बार कड़ी चेतावनी देती है। तेज आवाज़ वाले वाहनों, जेनरेटर, मशीनें और डैक आदि जब्त करने का प्रावधान भी है।
श्री विनोद बब्बर May 18
कुछ वर्ष पूर्व दिल्ली में भूमिगत मैट्रो के निर्माण के दौरान सूख चुके अनेक बावड़ी और तालाब मिले। लेकिन आज भी दिल्ली में झील, तालाब, कुएं व बावड़ी समेत एक हजार से अधिक ऐसे जलस्रोत हैं जो अवैध निर्माण और रखरखाव के अभाव के कारण बहुत खराब हालत में है।
श्री विनोद बब्बर May 11
भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार एक बहुचर्चित और बहुविवादित शब्द है। दूसरा शायद ही कोई ऐसा शब्द हो जिसकी इतनी मनमानी परिभाषाएं हों। लेकिन न जाने इस शब्द में ऐसा क्या जादू है कि दूसरों का छोटे से छोटे भ्रष्टाचार तो दिखता है लेकिन अपना बड़े से बड़ा भ्रष्टाचार भी ‘जनसेवा’ प्रतीत होता है।
डाॅ. रवीन्द्र अग्रवाल April 24
आज यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि देश किस प्रकार धनबल और बाहुबल की राजनीति से त्रस्त है। राजनेता से लेकर चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय चुनावों को गुंडों और बाहुबलियों से मुक्त कर स्वच्छ राजनीति करने की जरूरत बता चुके हैं। चुनाव सुधारों का मामला केंद्र के समक्ष वर्षों से लम्बित है।
डॉ. अंजनी झा January 22
वित्त वर्ष २०१४-१५ और २०१५-१६ (पहली छमाही) में कुल मिलाकर राजस्थान को १३००७ करोड़ की कमाई हुई, जबकि दिल्ली को ४३३६ करोड़ की। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत में ७० प्रतिशत की कमी आई है, किन्तु देश में पिछले एक साल में देश में पेट्रोल 20% ही सस्ता हुआ।
डॉ. सतीश कुमार August 31
अफगानिस्ता के मुद्दे पर चीन नई भूमिका कई बुनियादी प्रश्नों को जन्म देता है। पिछले दो तीन वर्षों से चीन अफगानिस्तान में शांति बहाली की प्रक्रिया में लगा हुआ है। महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि चीन-पाकिस्तान की जोड़ अफगानिस्तान में चल पाएगी। चीन के आधिकारिक पत्र ने इस्लाम को अत्यंत क्रूर विध्वंशक कहा है।