• जीतने को आतंकवाद से जंग, अब तो बदलो रंग-ढ़ंग
    डॉ. विनोद बब्बर July 24
    ‘अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला। अनेक जाने गई, अनेक घायल।’ इसने-उसने-सबने इस घटना की कड़ी निंदा की। सरकार ने कड़ी कार्यवाही की चेतावनी दी। अनेक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन। विरोधियों ने सरकार को कोसा। उपरोक्त में कुछ भी नया नहीं है। नई है तो तारीख। दरअसल पिछले अनेक दशकों से यही दृश्य, यही समाचार बार-बार […]
  • जल ही जीवन है
    सुश्री संगीता सचदेवा July 21
    जल ही जीवन है !!जल की अधिकता व कमी दोनों ही हानिकारक हैं ! ऋतुओं के देश भारत में वर्षा ऋतु में यदि जल का संचयन भलि भाँति कर लिया जाये तो देश में जल आपदा जैसी समस्या से काफ़ी हद तक छुटकारा प्राप्त हो सकता है ! जल संचयन एवं संरक्षण के लिए पिछले […]
  • आधुनिक भारतीय समाज में स्त्री का अस्तित्व
    सुश्री वसुंधरा राय July 20
    भारत एक ऐसा देश है जहां आज भी महिला की सामाजिक,पारवारिक, राजनैतिक, मनोवैज्ञानिक व मानसिक शैक्षणिक एवं सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक स्थिति अन्य देशो से तुलनात्मक बहुत कमज़ोर है । भारतीय समाज में आज भी संस्कारों का हवाला देते हुए महिलाओं को रात में घर से निकलने की इज़ाज़त नही मिलती । इसी कारण अधिकांश भारतीय […]
  • इजराइल से सीखने का अभियान कब से?
    डा. विनोद बब्बर July 20
    भारत के प्रधानमंत्री की इजराइल यात्रा की गूंज अलग-अलग कारणों से पूरी दुनिया में है, वहीं दोनो देशों को एक दूसरे को और निकट से जानने अवसर भी है। रूम सागर के पूर्वी तट पर स्थित इजराइल के बारे में प्रायः सभी जानते हैं कि 14 मई 1948 को स्वतंत्र हुआ दक्षिण पश्चिम एशिया के […]

कौलुम्बा कलिधर June 13
एक शहर में एक अमीर व्‍यापारी रहता था। पूरे दिन बहुत मेहनत से काम करता था। एक दिन उसने अपने घर के सामने एक भिखारी को देखा तो थोड़ा चिंतित हो गया। व्‍यापारी मन ही मन में सोचने लगा कि अगर इस भिखारी के पास बहुत सारा धन होता, तो यह भीख नही मांगता। फिर […]
हरिहर निवास शर्मा May 18
6 जुलाई 1956 को उज्जैन के बडनगर में जन्मे स्व. अनिल माधव दवे वाल्यकाल से ही संघ के स्वयंसेवक थे। इंदौर के गुजराती कोलेज से उन्होंने ग्रामीण विकास और प्रबंधन में विशेषज्ञता के साथ, कामर्स में मास्टर उपाधि प्राप्त की। यही वह समय था जब वे जय प्रकाश जी के समग्र क्रान्ति आन्दोलन से भी […]
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा May 16
अब जिसका कोइ काम नहीं है पत्रकार है बस,करतूतों की कलम हाथ में कलाकार है ये सब धीरे - धीरे सम्पादक भी हो जाते हैं कलम,बलम के शेर शाम को ही खातें हैं
डा. विनोद बब्बर May 10
यूँ ध्वनि प्रदूषण के विरूद्ध अनेक नियम-अधिनियम हैं, जिन पर हमारी अदालतें बार-बार कड़ी चेतावनी देती है। तेज आवाज़ वाले वाहनों, जेनरेटर, मशीनें और डैक आदि जब्त करने का प्रावधान भी है।
श्री विनोद बब्बर May 18
कुछ वर्ष पूर्व दिल्ली में भूमिगत मैट्रो के निर्माण के दौरान सूख चुके अनेक बावड़ी और तालाब मिले। लेकिन आज भी दिल्ली में झील, तालाब, कुएं व बावड़ी समेत एक हजार से अधिक ऐसे जलस्रोत हैं जो अवैध निर्माण और रखरखाव के अभाव के कारण बहुत खराब हालत में है।
श्री विनोद बब्बर May 11
भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार एक बहुचर्चित और बहुविवादित शब्द है। दूसरा शायद ही कोई ऐसा शब्द हो जिसकी इतनी मनमानी परिभाषाएं हों। लेकिन न जाने इस शब्द में ऐसा क्या जादू है कि दूसरों का छोटे से छोटे भ्रष्टाचार तो दिखता है लेकिन अपना बड़े से बड़ा भ्रष्टाचार भी ‘जनसेवा’ प्रतीत होता है।
डाॅ. रवीन्द्र अग्रवाल April 24
आज यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि देश किस प्रकार धनबल और बाहुबल की राजनीति से त्रस्त है। राजनेता से लेकर चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय चुनावों को गुंडों और बाहुबलियों से मुक्त कर स्वच्छ राजनीति करने की जरूरत बता चुके हैं। चुनाव सुधारों का मामला केंद्र के समक्ष वर्षों से लम्बित है।
डॉ. अंजनी झा January 22
वित्त वर्ष २०१४-१५ और २०१५-१६ (पहली छमाही) में कुल मिलाकर राजस्थान को १३००७ करोड़ की कमाई हुई, जबकि दिल्ली को ४३३६ करोड़ की। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत में ७० प्रतिशत की कमी आई है, किन्तु देश में पिछले एक साल में देश में पेट्रोल 20% ही सस्ता हुआ।
डॉ. सतीश कुमार August 31
अफगानिस्ता के मुद्दे पर चीन नई भूमिका कई बुनियादी प्रश्नों को जन्म देता है। पिछले दो तीन वर्षों से चीन अफगानिस्तान में शांति बहाली की प्रक्रिया में लगा हुआ है। महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि चीन-पाकिस्तान की जोड़ अफगानिस्तान में चल पाएगी। चीन के आधिकारिक पत्र ने इस्लाम को अत्यंत क्रूर विध्वंशक कहा है।