• लोकसभा चुनाव-2019 मोदी का एजेंडा: राजनीतिक शुचिता
    डाॅ. रवीन्द्र अग्रवाल April 24
    पूर्व एसोसियेट एडिटर दैनिक जागरण
  • जी हाँ, मृत्यु उत्सव ही है
    डॉ विनोद बब्बर April 21
    कल हमारे पड़ोस में रहने वाले सरदार उजागर सिंह जी इस नश्वर संसार की अपनी यात्रा सम्पूर्ण करते हुए अनन्त में विलीन हो गए। पुत्र, पौत्रों सहित भरा पूरा परिवार है। इसलिए उनकी अंतिम यात्रा बहुत धूमधाम से निकाली गई। बैंड बाजे तो थे ही अनेक सजी सफेद घोड़ियां भी थी जिन पर उनके पौत्र […]
  • सेक्युलर( धर्म-निरपेक्षता )का सही स्वरुप
    डा. राधेश्याम द्विवेदी April 18
    भ्रामक और कुपरिभाषित शब्द :- सेकुलरिज्म एक भ्रामक और कुपरिभाषित शब्द है. अधिकाँश लोग इस शब्द का सही अर्थ भी नहीं जानते। इस शब्द की न तो कोई सटीक परिभाषा है, और न ही कोई व्याख्या है। आजकल गलतफहमी में सेकुलर मतलब केवल “हिन्दू-मुस्लिम भाई-भाई” समझ लिया जाता है और, ऐसा करके कुछ लोग गर्व […]
  • यमुना नदी को कैसे निर्मल बनायें
    डा.राधेश्याम द्विवेदी April 15
    अभी हाल में ही एन.जी.टी. ने आर्ट ऑफ़ लिविंग पर यमुना को भारी नुकसान पहुँचाने के लिए करोड़ों का जुर्माना ठोका है। दिल्ली के जल मंत्री श्री कपिल मिश्रा ने इसका तार्किक विरोध प्रकट कर आर्ट ऑफ़ लिविंग को प्रत्येक वर्ष इसी प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन के लिए आमंत्रित किया है। और एन.जी.टी. पर कटाक्ष […]

प्रभाष कुमार झा July 28
प्रेरक, मार्गदर्शक, दार्शनिक, दोस्त, शिक्षक, वैज्ञानिक, प्रशासक… पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के व्यक्तित्व के न जाने और कितने पहलू थे। साधारण और गरीब परिवार में जन्म लेने के बाद भी किस तरह से मजबूत इरादे और मेहनत के सहारे देश के सर्वोच्च स्थान तक पहुंचा जा सकता है, इसकी मिसाल थे डॉ. अब्दुल कलाम। […]
विजय कुमार सप्पत्ती October 20
मैंने धीरे से आँखें खोलीं, एम्बुलेंस शहर के एक बड़े हार्ट हॉस्पिटल की ओर जा रही थी। मेरी बगल में भारद्वाज जी, गौतम और सूरज बैठे थे। मुझे देखकर सूरज ने मेरा हाथ थपथपाया और कहा, “ईश्वर अंकल, आप चिंता न करे, मैंने हॉस्पिटल में डॉक्टर्स से बात कर ली है, मेरा ही एक दोस्त वहाँ पर हार्ट सर्जन […]
March 21
  काल खंड को मापने के लिए जिस यन्त्र का उपयोग किया जाता है उसे काल निर्णय, काल निर्देशिका या कलेंडर कहते हैं। दुनिया का सबसे पुराना कलेंडर भारतीय है।  इसे स्रष्टि संवत कहते हैं, इसी दिन को स्रष्टि का प्रथम दिवस माना जाता है। यह संवत १९७२९४९११६ यानी एक अरब, सत्तानवे करोड़, उनतीस लाख, […]
डॉ. सतीश कुमार August 19
भारतीय विदेश नीति में कई बुनियादी परिवर्तन हो रहे है । कई खेमों में वर्षों की जंग को साफ किया जा रहा है, प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिव के साथ देश के भीतर और बाहर कई भ्रम फैलाए गए थे। उन अफवाहों को भी तोड़ा जा रहा है । मोदी की दो दिवसीय खाड़ी देशों की […]
डॉ. सतीश कुमार July 27
  मोदी की मध्य एशिया यात्रा कई मायनों में नए युग की शुरूआत मानी जा सकती है। केवल इसलिए नहीं कि नेहरू जी के बाद प्रधानमंत्री मोदी पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने एक साथ पाँचों मध्य एशियाई देशों की यात्रा की हो, बल्कि इसलिए भी कि पिछले कई वर्षों से मध्य एशियाई देशों के लिए […]
संदीप कौशिक June 11
“आत्मनों मोक्षार्थ, जगत हिताय” अर्थात् जगत के हित में ही मोक्ष की प्राप्ति है | सभी व्यक्ति देश के भूभाग पर रहते है उनमें से कितने प्रतिशत है जो सही मायने में देश और समाज के लिए चिंतित है एवं सोचते है | शायद मुट्ठी भर लोग ही है | किन्तु अपने लिए तो सभी […]
राकेश उपाध्याय August 25
जल रही है चिता, सांसों में है धुआं फिर भी आस है मन में जगी भोर होगी क्या कभी यहां पूछती यही हैं ये बेड़ियां, देख तो कौन हे ये…। बाहुबली फिल्म जिसने नहीं देखी तो वह कल्पना भी नहीं कर सकता कि इस फिल्म की बनावट, बुनावट, कथानक की कसावट और कलाकारों की भाषा-भूषा, […]
प्रभाष कुमार झा June 15
भले ही हम एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति के सहारे किसी सामान्य बीमारी से तुरंत राहत पा लेते हैं, लेकिन इसके प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए भारत समेत दुनियाभर में इससे इतर वैकल्पिक पद्धति से उपचार कराने का चलन बढ़ रहा है। प्राचीन संस्कृति आधारित चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियां सदियों से स्वास्थ्य व जीवन रक्षा में सहायक […]
हिमकर श्याम October 18
राष्ट्रभाषा होने के बावजूद हिंदी षढ़यंत्रों का शिकार रही है। स्वाधीनता के बाद से हमारे देश में, हिंदी के खिलाफ षड्यंत्र रचे जाते रहे हैं। उन्ही का परिणाम है कि हिंदी आजतक अपना अनिवार्य स्थान नहीं पा सकी है। हम अपनी मानसिक गुलामी की वजह से यह मान बैठे हैं कि अंग्रेजी के बिना हमारा काम […]