• कैकई : एक चेहरा ये भी
    उमाकान्त मिश्रा June 23
    एक बार युद्ध में राजा दशरथ का मुकाबला बाली से हो गया. राजा दशरथ की तीनों रानियों में से कैकयी अस्त्र-शस्त्र और रथ चालन में पारंगत थीं. इसलिए कई बार युद्ध में वह दशरथ जी के साथ होती थीं. जब बाली और राजा दशरथ की भिडंत हुई उस समय भी संयोग वश कैकई साथ ही […]
  • गाय प्रोटीन ?
    उमाकांत मिश्रा June 22
    हिन्दुस्तान में बहुत से लोग गाय मांस को प्रोटीन कह रहे हैं , उनके लिये ये जवाब है ।एक बहुत ही ताकतवर सम्राट थे, उनकी बेटी इतनी सुंदर थी, कि देवता भी सोचते थे कि यदि इससे विवाह हो जाये तो उनका जीवन धन्य हो जाये । इस कन्या की सुंदरता की चर्चा सारी त्रिलोकी […]
  • राष्ट्रपाल क्यों न कहा जाये राष्ट्रपति को?
    डॉ. विनोद बब्बर June 21
    चुनाव आयोग द्वारा गणतंत्र भारत के 14वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होते ही राजनैतिक सरगर्मियों तेज हो गई है। इस चुनाव में लोक सभा, राज्यसभा और विधानसभा के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं। 26 जनवरी, 1950 को भारत के गणतंत्र घोषित होने के बाद से अबतक 13 राष्ट्रपति (3 कार्यवाहक राष्ट्रपति भी) […]
  • सुशासन या शासन के 3 वर्ष
    श्री पुष्यमित्र भार्गव June 15
    वरिष्ठ अधिवक्ता

कौलुम्बा कलिधर June 13
एक शहर में एक अमीर व्‍यापारी रहता था। पूरे दिन बहुत मेहनत से काम करता था। एक दिन उसने अपने घर के सामने एक भिखारी को देखा तो थोड़ा चिंतित हो गया। व्‍यापारी मन ही मन में सोचने लगा कि अगर इस भिखारी के पास बहुत सारा धन होता, तो यह भीख नही मांगता। फिर […]
हरिहर निवास शर्मा May 18
6 जुलाई 1956 को उज्जैन के बडनगर में जन्मे स्व. अनिल माधव दवे वाल्यकाल से ही संघ के स्वयंसेवक थे। इंदौर के गुजराती कोलेज से उन्होंने ग्रामीण विकास और प्रबंधन में विशेषज्ञता के साथ, कामर्स में मास्टर उपाधि प्राप्त की। यही वह समय था जब वे जय प्रकाश जी के समग्र क्रान्ति आन्दोलन से भी […]
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा May 16
अब जिसका कोइ काम नहीं है पत्रकार है बस,करतूतों की कलम हाथ में कलाकार है ये सब धीरे - धीरे सम्पादक भी हो जाते हैं कलम,बलम के शेर शाम को ही खातें हैं
डा. विनोद बब्बर May 10
यूँ ध्वनि प्रदूषण के विरूद्ध अनेक नियम-अधिनियम हैं, जिन पर हमारी अदालतें बार-बार कड़ी चेतावनी देती है। तेज आवाज़ वाले वाहनों, जेनरेटर, मशीनें और डैक आदि जब्त करने का प्रावधान भी है।
श्री विनोद बब्बर May 18
कुछ वर्ष पूर्व दिल्ली में भूमिगत मैट्रो के निर्माण के दौरान सूख चुके अनेक बावड़ी और तालाब मिले। लेकिन आज भी दिल्ली में झील, तालाब, कुएं व बावड़ी समेत एक हजार से अधिक ऐसे जलस्रोत हैं जो अवैध निर्माण और रखरखाव के अभाव के कारण बहुत खराब हालत में है।
श्री विनोद बब्बर May 11
भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार एक बहुचर्चित और बहुविवादित शब्द है। दूसरा शायद ही कोई ऐसा शब्द हो जिसकी इतनी मनमानी परिभाषाएं हों। लेकिन न जाने इस शब्द में ऐसा क्या जादू है कि दूसरों का छोटे से छोटे भ्रष्टाचार तो दिखता है लेकिन अपना बड़े से बड़ा भ्रष्टाचार भी ‘जनसेवा’ प्रतीत होता है।
डाॅ. रवीन्द्र अग्रवाल April 24
आज यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि देश किस प्रकार धनबल और बाहुबल की राजनीति से त्रस्त है। राजनेता से लेकर चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय चुनावों को गुंडों और बाहुबलियों से मुक्त कर स्वच्छ राजनीति करने की जरूरत बता चुके हैं। चुनाव सुधारों का मामला केंद्र के समक्ष वर्षों से लम्बित है।
डॉ. अंजनी झा January 22
वित्त वर्ष २०१४-१५ और २०१५-१६ (पहली छमाही) में कुल मिलाकर राजस्थान को १३००७ करोड़ की कमाई हुई, जबकि दिल्ली को ४३३६ करोड़ की। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत में ७० प्रतिशत की कमी आई है, किन्तु देश में पिछले एक साल में देश में पेट्रोल 20% ही सस्ता हुआ।
डॉ. सतीश कुमार August 31
अफगानिस्ता के मुद्दे पर चीन नई भूमिका कई बुनियादी प्रश्नों को जन्म देता है। पिछले दो तीन वर्षों से चीन अफगानिस्तान में शांति बहाली की प्रक्रिया में लगा हुआ है। महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि चीन-पाकिस्तान की जोड़ अफगानिस्तान में चल पाएगी। चीन के आधिकारिक पत्र ने इस्लाम को अत्यंत क्रूर विध्वंशक कहा है।