सुश्री संगीता सचदेवा July 21
जल ही जीवन है !!जल की अधिकता व कमी दोनों ही हानिकारक हैं ! ऋतुओं के देश भारत में वर्षा ऋतु में यदि जल का संचयन भलि भाँति कर लिया जाये तो देश में जल आपदा जैसी समस्या से काफ़ी हद तक छुटकारा प्राप्त हो सकता है ! जल संचयन एवं संरक्षण के लिए पिछले […]
कौलुम्बा कलिधर June 13
एक शहर में एक अमीर व्‍यापारी रहता था। पूरे दिन बहुत मेहनत से काम करता था। एक दिन उसने अपने घर के सामने एक भिखारी को देखा तो थोड़ा चिंतित हो गया। व्‍यापारी मन ही मन में सोचने लगा कि अगर इस भिखारी के पास बहुत सारा धन होता, तो यह भीख नही मांगता। फिर […]
डॉ विनोद बब्बर October 2
संपादक: राष्ट्र किंकर
डॉ शोभा भारद्वाज September 23
कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है भारतवासी अपने इस भूभाग के लिए बहुत सम्वेदनशील शील है। कश्मीर का बहुत बड़ा बजट है। कश्मीर की रक्षा और पाक समर्थित आतंकवादियों से बचाने के लिए के लिये लगातार बलिदान दिये हैं। अक्सर सुरक्षा बल के शहीद जवानों के शव तिरंगे से लिपट कर आते हैं। 14 मई […]
श्री गोविंद पुरोहित September 28
उस पांच सितारा ऑडिटोरियम के बाहर प्रोफेसर साहब की आलीशान कार आकर रुकी , प्रोफेसर बैठने को हुए ही थे कि एक सभ्य सा युगल याचक दृष्टि से उन्हें देखता हुआ पास आया और बोला ,” साहब , यहां से मुख्य सड़क तक कोई साधन उपलब्ध नही है , मेहरबानी करके वहां तक लिफ्ट दे […]
डॉ शोभा भारद्वाज September 23
कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है भारतवासी अपने इस भूभाग के लिए बहुत सम्वेदनशील शील है। कश्मीर का बहुत बड़ा बजट है। कश्मीर की रक्षा और पाक समर्थित आतंकवादियों से बचाने के लिए के लिये लगातार बलिदान दिये हैं। अक्सर सुरक्षा बल के शहीद जवानों के शव तिरंगे से लिपट कर आते हैं। 14 मई […]
डॉ शोभा भारद्वाज July 8
इजरायल पश्चिमी एशिया का छोटा सा राज्य है इसका क्षेत्र फल लगभग बंबई जितना हैं यहाँ के अधिकांश बाशिंदे यहूदी, मुस्लिम अल्प मत में हैं |राज्य भूमध्यसागर के किनारे स्थित है इसके उत्तर में लेबनान उत्तर पूर्व में सीरिया (सीरिया खंडहर बन कर नष्ट हो रहा है) एक तरफ मिश्र है |पश्चिमी तट और गाजा […]
उमाकान्त मिश्रा June 23
एक बार युद्ध में राजा दशरथ का मुकाबला बाली से हो गया. राजा दशरथ की तीनों रानियों में से कैकयी अस्त्र-शस्त्र और रथ चालन में पारंगत थीं. इसलिए कई बार युद्ध में वह दशरथ जी के साथ होती थीं. जब बाली और राजा दशरथ की भिडंत हुई उस समय भी संयोग वश कैकई साथ ही […]
डाॅ. रवीन्द्र अग्रवाल April 24
आज यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि देश किस प्रकार धनबल और बाहुबल की राजनीति से त्रस्त है। राजनेता से लेकर चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय चुनावों को गुंडों और बाहुबलियों से मुक्त कर स्वच्छ राजनीति करने की जरूरत बता चुके हैं। चुनाव सुधारों का मामला केंद्र के समक्ष वर्षों से लम्बित है।