• देश विदेश में नव वर्षोत्सव
    सुरेन्द्र माहेश्वरी March 23
    सम्पूर्ण विश्व में नव वर्ष धूम धाम से मनाया जाता है। लोग एक दूसरे को बधाईयाँ देते है तथा भावी जीवन के प्रति मंगलकामनाएं प्रकट करते है।यह पर्व समस्त देशों में प्राय: अंग्रेजी कलैण्डर के अनुसार एक जनवरी को मनाया जाता है। सबसे पहले एक सौ तरेपन ईस्वी पूर्व यह वारव एक जनवरी को मनाया […]
  • परम वैभव की संकल्पना
    डॉ. बजरंगलाल गुप्ता January 18
    प्रसिद्ध अर्थचिंतक एवं समाजशास्त्री
  • स्वेदशी आंदोलन के प्रेणता बिपिन चंद्र पाल
    डॉ अंजनी कुमार झा November 26
    स्वेदशी आंदोलन के प्रेणता सुविख्यात त्रिमूर्ति लाल-बाल-पाल के बिपिनचन्द्र पाल ;1858-1932द्ध ने अपने जीवन काल में अपने देशवादियों को सम्मोहित कर दिया था और निःसंदेह बंगाल-विभाजन के स्वदेशी आन्दोलन के वे जननायक थे। उनके समकालीन विद्वानों ने देशभक्ति की इस अभूतपूर्व लहर में महान योगदान के असंख्य प्रमाण दिये। स्वदेशी आन्दोलन के एक सक्रिय नेता […]
  • मंगल का प्रतीक स्वास्तिक
    डा.राधेश्याम द्विवेदी November 15
    स्वास्तिक का अस्तित्व सिन्धु घाटी सभ्यता के भी पहले का माना जाता है. इसका प्रयोग अन्य धर्मों में भी किया जाता है. सिन्धु घाटी सभ्यता की खुदाई में ऐसे चिन्ह व अवशेष प्राप्त हुए हैं, जिनसे यह प्रमाणित हो जाता है कि लगभग 2-3 हज़ार वर्ष पूर्व में भी मानव सम्भ्यता अपने भवनों में इस […]

प्रभाष कुमार झा July 28
प्रेरक, मार्गदर्शक, दार्शनिक, दोस्त, शिक्षक, वैज्ञानिक, प्रशासक… पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के व्यक्तित्व के न जाने और कितने पहलू थे। साधारण और गरीब परिवार में जन्म लेने के बाद भी किस तरह से मजबूत इरादे और मेहनत के सहारे देश के सर्वोच्च स्थान तक पहुंचा जा सकता है, इसकी मिसाल थे डॉ. अब्दुल कलाम। […]
विजय कुमार सप्पत्ती October 20
मैंने धीरे से आँखें खोलीं, एम्बुलेंस शहर के एक बड़े हार्ट हॉस्पिटल की ओर जा रही थी। मेरी बगल में भारद्वाज जी, गौतम और सूरज बैठे थे। मुझे देखकर सूरज ने मेरा हाथ थपथपाया और कहा, “ईश्वर अंकल, आप चिंता न करे, मैंने हॉस्पिटल में डॉक्टर्स से बात कर ली है, मेरा ही एक दोस्त वहाँ पर हार्ट सर्जन […]
March 21
  काल खंड को मापने के लिए जिस यन्त्र का उपयोग किया जाता है उसे काल निर्णय, काल निर्देशिका या कलेंडर कहते हैं। दुनिया का सबसे पुराना कलेंडर भारतीय है।  इसे स्रष्टि संवत कहते हैं, इसी दिन को स्रष्टि का प्रथम दिवस माना जाता है। यह संवत १९७२९४९११६ यानी एक अरब, सत्तानवे करोड़, उनतीस लाख, […]
डॉ. सतीश कुमार August 19
भारतीय विदेश नीति में कई बुनियादी परिवर्तन हो रहे है । कई खेमों में वर्षों की जंग को साफ किया जा रहा है, प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिव के साथ देश के भीतर और बाहर कई भ्रम फैलाए गए थे। उन अफवाहों को भी तोड़ा जा रहा है । मोदी की दो दिवसीय खाड़ी देशों की […]
डॉ. सतीश कुमार July 27
  मोदी की मध्य एशिया यात्रा कई मायनों में नए युग की शुरूआत मानी जा सकती है। केवल इसलिए नहीं कि नेहरू जी के बाद प्रधानमंत्री मोदी पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने एक साथ पाँचों मध्य एशियाई देशों की यात्रा की हो, बल्कि इसलिए भी कि पिछले कई वर्षों से मध्य एशियाई देशों के लिए […]
संदीप कौशिक June 11
“आत्मनों मोक्षार्थ, जगत हिताय” अर्थात् जगत के हित में ही मोक्ष की प्राप्ति है | सभी व्यक्ति देश के भूभाग पर रहते है उनमें से कितने प्रतिशत है जो सही मायने में देश और समाज के लिए चिंतित है एवं सोचते है | शायद मुट्ठी भर लोग ही है | किन्तु अपने लिए तो सभी […]
राकेश उपाध्याय August 25
जल रही है चिता, सांसों में है धुआं फिर भी आस है मन में जगी भोर होगी क्या कभी यहां पूछती यही हैं ये बेड़ियां, देख तो कौन हे ये…। बाहुबली फिल्म जिसने नहीं देखी तो वह कल्पना भी नहीं कर सकता कि इस फिल्म की बनावट, बुनावट, कथानक की कसावट और कलाकारों की भाषा-भूषा, […]
प्रभाष कुमार झा June 15
भले ही हम एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति के सहारे किसी सामान्य बीमारी से तुरंत राहत पा लेते हैं, लेकिन इसके प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए भारत समेत दुनियाभर में इससे इतर वैकल्पिक पद्धति से उपचार कराने का चलन बढ़ रहा है। प्राचीन संस्कृति आधारित चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियां सदियों से स्वास्थ्य व जीवन रक्षा में सहायक […]
हिमकर श्याम October 18
राष्ट्रभाषा होने के बावजूद हिंदी षढ़यंत्रों का शिकार रही है। स्वाधीनता के बाद से हमारे देश में, हिंदी के खिलाफ षड्यंत्र रचे जाते रहे हैं। उन्ही का परिणाम है कि हिंदी आजतक अपना अनिवार्य स्थान नहीं पा सकी है। हम अपनी मानसिक गुलामी की वजह से यह मान बैठे हैं कि अंग्रेजी के बिना हमारा काम […]