विचार

देश के समक्ष जल संकट और चुनौतियां

“रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून” रहीमदास जी की इस पंक्ति से यह स्पष्ट है कि पानी न केवल प्राणी मात्र के लिए आवश्यक है अपितु सभी जीव जन्तुओं एवं वनस्पतियों का जीवनयापन भी पानी के बिना असम्भव है। प्रकृति ने शायद इसीलिये भूतल पर पानी की अथाह उपलब्धता रखी है। भूतल पर पानी […]

तिब्बत भारत की मौलिक सुरक्षा का प्रश्न

पिछले कुछ वर्षों से तिब्बत का मसला दलाई लामा के प्रति हमदर्दी, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार और अनावश्यक आदर्श की धुंध फंसकर भारत की मौलिक सुरक्षा को भूला दिया गया है। इस प्रयास को सफल बनाने का काम चीन ने अपनी सूझ-बूझ त्रिकोणीय कूटनीति के द्वारा किया है। भारत के प्रबुद्ध सामरिक विश्लेषकों के बीच चीन ने […]

एफ.डी.आई का फंदा – न बचे किसानी, न गरीब का धंधा

रिटेल में एफडीआई की घोषणा के बाद बेहद मार्मिक भाषण में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा Golden Goose Superstar Sneakers Sale कि “पैसे पेड़ पर नहीं लगते बचपन में किसी बात की जिद पर माता-पिता भी यहीं कहते थे कि पैसे पेड़ पर नहीं लगते | लेकिन उन माता-पिता का संघर्ष आज बड़े हो चुके […]

चरित्र विकास – एक साधना भाग – 2

* चरित्र निर्माण – आचरण का महत्त्व स्वर्गीय माननीय श्री एकनाथ जी का कथन था | “A good worker is not known as what he eats and what wears, he is known as to how he behaves.” बहु पदार्थ भोजन करने तथा अनेक बढ़िया सुन्दर कपड़े पहनने से कोई अच्छा कार्यकर्त्ता नहीं बनता वह बनता हैं  अपने […]

रोबॉट न बनाएं बच्चों को: सेहत के बिना बेकार है जिन्दगी

वर्तमान पीढ़ी के शारीरिक सौष्ठव को देख कर कहीं नहीं लगता कि हम स्वस्थ और मस्त हैं। अति दुर्बल यश अति स्थूल होती जा रही इस पीढ़ी के भरोसे नौकरी-धंधों को तो पाया जा सकता है कि लेकिन दुनिया की कोई भी जंग जीतने की कल्पना दिवास्वप्न ही है। यहाँ तक कि आजकल के बच्चे […]

चरित्र विकास– एक साधना

विश्व में कुछ भी बुरा नहीं हैं, विचार ही अच्छाई तथा बुराई का सृजन करते हैं। शरीर, विचार नहीं बनाते अपितु विचारों से शरीर बनता हैं, हमारे विचार ही शब्दों में परिवर्तित होते हैं, हमारे शब्द ही कर्मों में परिणत होते हैं। हमारे कर्म ही हमारी आदतें बनते हैं, हमारी आदतों से हमारा चरित्र बनता […]

बांग्लादेश में कट्टरवाद लोकतंत्र के लिए खतरा

बांग्लादेश में नए वर्ष के प्रारम्भ में सम्पन्न संसदीय चुनाव में भारी हिंसा के बीच सत्तारूढ़ आवामी लीग की सरकार में पुन: वापसी तो हो गई, किन्तु कट्टरपंथी ताकतों को विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बी.एन.पी) ने समर्थन किया। नतीजन, पूरे देश में अराजक स्थिति उत्पन्न हो गई और लोकतंत्र का मखौल पूरी दुनिया में […]

हिन्दू चेतना में बहुलवाद के तत्व नहीं हैं

औरंगजेब के गोलकुण्डा को मुगल साम्राज्य में शामिल करने से पहले सन् 1683 में गोलकुण्डा के अंतिम शासक अबू हसन के एक ब्राह्मण प्रधानमंत्री अक्कना ने डच ईस्ट इण्डिया कम्पनी के एक कर्मचारी माइकल जैस्जुन को कहा था, “तुम स्वयं कल्पना कर सकते हो कि कौन-सी सर Alexander Mcqueen Pas Cher का र राजा की […]

कैसा हो नववर्ष हमारा?

अभी हाल ही में एक खबर आई कि क्रिसमस और नए साल के जश्न में सराबोर कुछ युवक गाजियाबाद की सडकों पर हुडदंग करते हुए पकडे गए। बताया गया कि पकड़े गए सभी युवक अच्छे घरों से संबंध रखते हैं। 12वीं कक्षा से लेकर एमबीए डिग्रीधारी 22 से 25 वर्ष के ये छात्र शराब के […]

औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त शिक्षा प्रणाली

शिक्षा प्रणाली का अर्थ है शिक्षा देने की पद्धति।समकालीन शिक्षा प्रणाली अर्थात शिक्षा का वह ढंग जो आज कल हमारे स्कूलों और कॉलेजों में प्रचलित है।कहने की आवश्यकता नहीं कि आज जिस रीति से हमारे कॉलेजों में शिक्षा दी जा रही है वह भारतीय रीति नहीं है, अंग्रेजों के शासनकाल में इस प्रणाली का आरंभ हुआ […]