विचार

संवाद की यात्रा में सहभागी बनें

भारत की चिन्तन परम्परा में ‘वादे वादे जायते तत्वबोधाः’ के सिद्धान्त का बड़ा महत्व रहा है। ज्ञान-यात्रा और विचार-यात्रा के सातत्य के लिए तो यह आवश्यक ही है कि भिन्न-भिन्न विचारों और वादों को मानने और जानने वाले लोगों के बीच संवाद-परिसंवाद हो, चर्चा-परिचर्चा चले, वैचारिक घर्षण-संघर्षण हो। घोरतम मतभेद होने पर भी संवाद रुके […]

… क्योंकि मीडिया व्यापार नहीं है

पिछले सप्ताह भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने एक सभा में सार्वजनिक रूप से कहा कि मीडिया तो व्यापार (ट्रेड) है और उसके हितों का ध्यान रखना हमारा कर्तव्य है। संदर्भ था भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण का वह फैसला, जिसमें कहा गया था कि एक सितम्बर से टेलीविजन चैनलों को एक घंटे में 12 […]

पेट को भगवान मत बनाइए

अपने बाल्यकाल में मुझे रामकृष्ण मिशन से जो लाभ मिला है, उसे मैं आजीवन भूल नहीं सकूंगा। मुझे वहां जो प्रेरणा प्राप्त हुई है, उसका थोड़ा अंश भी यदि मैं इस सम्मलेन में आए नवयुवकों में संचरित कर सकूं तो मेरा यहां आना सार्थक होगा। ऐसा हमें प्रायः ही सुनने को मिलता है कि ‘वैज्ञानिक […]

भारतीय भाषाओं को प्रतिष्ठित करना होगा

आज देश में भाषा व्यापक चर्चा का विषय है। एक तरफ देश में मातृभाषा का महत्व कम होता दिखाई दे रहा है, दूसरी तरफ आज दुनिया के लगभग 170 देशों में किसी न किसी रूप में हिन्दी पढ़ाई जाती है। विश्व के 32 देशों के विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ाई जा रही है। इंग्लैंड के सेंट […]