विचार

जेहाद की आड़ में आतंक

 सिडनी के मार्टिन प्लेस में लिंट चोकलेट कैफ़े के भीतर गत दिवस आंकवादियों ने जिस तरह लोगों को बधंक बनाया, वह बताता है कि ग्लोबल आतंकवाद का खेल जेहाद की आड़ में खेला जा जा रहा है | बेंगलुरु में मेहदी मसरूर विस्वास की हल में गिरफ्तारी से यह स्वयंसिद्ध हो गया है कि जेहाद […]

समर्पण

जो सब समर्पण करता है वह सब पा लेता है। जो कतार में सबसे पीछे खड़ा हो जाता है अपने अहं और दोषों को त्‍याग कर  वह कतार में सबसे आगे जगह पा लेता है क्‍योंकि वह अहं के भारी बोझ से दबा नहीं होता। ऐसा व्‍यक्‍ति अपनी बारी आने का इंतजार सब्र के साथ करता है। […]

ग्लोबल वार्मिंग एंव जल संकट

वातानुकूलित कमरे में बैठने वाले, गाडियों में चलने वाले तथा नदियों में रसायनयुक्त जल व  नगर की नालियों का पानी मिलाने वाले प्रकृति के सबसे बडे दुश्मन हैं, मगर विकास की परिभाषा “भौतिक सुख” मानने वाले विकसित देश अपनी आर्थिक समृद्धि को बनाए रखने के लिए विकासशील देशों के मन-मस्तिष्क में यह बात बैठाने में […]

देश के समक्ष जल संकट और चुनौतियां

“रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून” रहीमदास जी की इस पंक्ति से यह स्पष्ट है कि पानी न केवल प्राणी मात्र के लिए आवश्यक है अपितु सभी जीव जन्तुओं एवं वनस्पतियों का जीवनयापन भी पानी के बिना असम्भव है। प्रकृति ने शायद इसीलिये भूतल पर पानी की अथाह उपलब्धता रखी है। भूतल पर पानी […]

तिब्बत भारत की मौलिक सुरक्षा का प्रश्न

पिछले कुछ वर्षों से तिब्बत का मसला दलाई लामा के प्रति हमदर्दी, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार और अनावश्यक आदर्श की धुंध फंसकर भारत की मौलिक सुरक्षा को भूला दिया गया है। इस प्रयास को सफल बनाने का काम चीन ने अपनी सूझ-बूझ त्रिकोणीय कूटनीति के द्वारा किया है। भारत के प्रबुद्ध सामरिक विश्लेषकों के बीच चीन ने […]

एफ.डी.आई का फंदा – न बचे किसानी, न गरीब का धंधा

रिटेल में एफडीआई की घोषणा के बाद बेहद मार्मिक भाषण में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि “पैसे पेड़ पर नहीं लगते बचपन में किसी बात की जिद पर माता-पिता भी यहीं कहते थे कि पैसे पेड़ पर नहीं लगते | लेकिन उन माता-पिता का संघर्ष आज बड़े हो चुके बच्चों को समझ आता हैं […]

चरित्र विकास – एक साधना भाग – 2

* चरित्र निर्माण – आचरण का महत्त्व स्वर्गीय माननीय श्री एकनाथ जी का कथन था | “A good worker is not known as what he eats and what wears, he is known as to how he behaves.” बहु पदार्थ भोजन करने तथा अनेक बढ़िया सुन्दर कपड़े पहनने से कोई अच्छा कार्यकर्त्ता नहीं बनता वह बनता हैं  अपने […]

रोबॉट न बनाएं बच्चों को: सेहत के बिना बेकार है जिन्दगी

वर्तमान पीढ़ी के शारीरिक सौष्ठव को देख कर कहीं नहीं लगता कि हम स्वस्थ और मस्त हैं। अति दुर्बल यश अति स्थूल होती जा रही इस पीढ़ी के भरोसे नौकरी-धंधों को तो पाया जा सकता है कि लेकिन दुनिया की कोई भी जंग जीतने की कल्पना दिवास्वप्न ही है। यहाँ तक कि आजकल के बच्चे […]

चरित्र विकास– एक साधना

विश्व में कुछ भी बुरा नहीं हैं, विचार ही अच्छाई तथा बुराई का सृजन करते हैं। शरीर, विचार नहीं बनाते अपितु विचारों से शरीर बनता हैं, हमारे विचार ही शब्दों में परिवर्तित होते हैं, हमारे शब्द ही कर्मों में परिणत होते हैं। हमारे कर्म ही हमारी आदतें बनते हैं, हमारी आदतों से हमारा चरित्र बनता […]

बांग्लादेश में कट्टरवाद लोकतंत्र के लिए खतरा

बांग्लादेश में नए वर्ष के प्रारम्भ में सम्पन्न संसदीय चुनाव में भारी हिंसा के बीच सत्तारूढ़ आवामी लीग की सरकार में पुन: वापसी तो हो गई, किन्तु कट्टरपंथी ताकतों को विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बी.एन.पी) ने समर्थन किया। नतीजन, पूरे देश में अराजक स्थिति उत्पन्न हो गई और लोकतंत्र का मखौल पूरी दुनिया में […]