विचार

इजराइल से सीखने का अभियान कब से?

भारत के प्रधानमंत्री की इजराइल यात्रा की गूंज अलग-अलग कारणों से पूरी दुनिया में है, वहीं दोनो देशों को एक दूसरे को और निकट से जानने अवसर भी है। रूम सागर के पूर्वी तट पर स्थित इजराइल के बारे में प्रायः सभी जानते हैं कि 14 मई 1948 को स्वतंत्र हुआ दक्षिण पश्चिम एशिया के […]

स्वाभाविक कर-नीति (GST) और कर-ढाँचे से इतना डर क्यों?

कार्यकारी निदेशक, गांधी विद्या संस्थान, राजघाट, वाराणसी

राष्ट्रपाल क्यों न कहा जाये राष्ट्रपति को?

चुनाव आयोग द्वारा गणतंत्र भारत के 14वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होते ही राजनैतिक सरगर्मियों तेज हो गई है। इस चुनाव में लोक सभा, राज्यसभा और विधानसभा के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं। 26 जनवरी, 1950 को भारत के गणतंत्र घोषित होने के बाद से अबतक 13 राष्ट्रपति (3 कार्यवाहक राष्ट्रपति भी) […]

गाय की रक्षा मानवता की रक्षा

गौमाता चराचर जगत की माता हैं। इनकी रक्षा करना हमारा नैतिक कर्तव्य है। अथर्ववेद में आता है कि गौहत्यारे को काँच की गोली से उड़ा दो। अतः हे भारतवासियो ! जागो और गोवंश की हत्या रोकने के लिए आगे आओ। गौमाता धरती का गौरव है। भारत की 40 करोड़ एकड़ भूमि पर पैदावार तथा छोटे-बड़े […]

सेनाध्यक्ष को ‘डॉयर’ कहना-नक्सली सोच

स्वतंत्र भारत में अक्सर इतिहास को गलत ढ़ंग से प्रस्तुत करने के आरोप सामने आते रहते हैं। देश की बहुसंख्यक जनता की आस्था से खिलवाड़ करने से देश के बहादुर लोगों को लुटेरा कहने, महाराणा प्रताप का सम्मान कम करने जैसे शर्मनाक भ्रामक तथ्य तक इतिहास कहलाये तो इतिहास लेखकों की नियत पर शक होता […]

दत्तोपंत ठेंगड़ी

भारतीय चिन्तनधारा के अतुलनीय मनीषी दत्तोपंत ठेंगडी; भारतीय अर्थचिंतन, समाज व्यवस्था एवं संपूर्ण राष्ट्र के लिये एक ऐसे संत के रूप में अवतरित हुए थे, जिनसे पूरा राष्ट्र-समाज प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता है। वे एक ऐसी सरणि के संत तुल्य विचारक थे, जिन्होंने अपने प्रचार का लोभ कभी नहीं रखा । वे मात्र […]

वाणी का व्यवहार

एक राजा थे। बन-विहार को निकले। रास्ते में प्यास लगी। नजर दौड़ाई एक अन्धे की झोपड़ी दिखी। उसमें जल भरा घड़ा दूर से ही दीख रहा था।राजा ने सिपाही को भेजा और एक लोटा जल माँग लाने के लिए कहा।सिपाही वहाँ पहुँचा और बोला- ऐ अन्धे एक लोटा पानी दे दे। अन्धा अकड़ू था।उसने तुरन्त […]

केरल कांडः हिन्दू आस्था से खिलवाड़, कांग्रेस मौन क्यों?

बेशक यह भी कहा जा सकता है कि सबको अपने ढंग से खानपान की स्वतंत्रता है। सबको अपने विवेकानुसार अपनी आस्था तय करने का अधिकार है लेकिन क्या किसी को दूसरों की भावनाओं को आहत करने का अधिकार है?

हर चैनल क्यों चरित्रहीन को दिखलाता है?

अब जिसका कोइ काम नहीं है पत्रकार है
बस,करतूतों की कलम हाथ में कलाकार है
ये सब धीरे – धीरे सम्पादक भी हो जाते हैं
कलम,बलम के शेर शाम को ही खातें हैं

एक आवाज शोर के खिलाफ

यूँ ध्वनि प्रदूषण के विरूद्ध अनेक नियम-अधिनियम हैं, जिन पर हमारी अदालतें बार-बार कड़ी चेतावनी देती है। तेज आवाज़ वाले वाहनों, जेनरेटर, मशीनें और डैक आदि जब्त करने का प्रावधान भी है।