विचार

असहिष्णुता का हौवा

पिछले कुछ समय से असहिष्णुता को लेकर मचाया गया प्रलाप अंतत: संसद तक पहुंच गया। सदन में संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और संविधान पर चली दो दिनी चर्चा में विपक्षी दलों की बहस सुनकर तो लगता है कि देश में कथित असहिष्णुता का जो माहौल बना है, उसे बनाने में कहीं न कहीं […]

पुरस्कारों का अनादर

लेखक वरिष्ठ विचारक एवं प्रखर पत्रकार है।

हिंग्लिश प्रयोग से भाषा का अवमूल्यन

हिन्दी पत्रकारिता में अंग्रेजी शब्दों के अधिकाधिक प्रयोग से भाषागत विकृति और लालित्य में कमी से एक बड़ा सांस्कृतिक संकट खड़ा हो गया है। चार-पाँच शब्दों क शीर्षक में तीन शब्द आंग्ल के होते हैं। इंट्रो में भी धड़ल्ले से विदेशी भाषाओं का प्रयोग हो रहा है। अनुवाद में त्रुटियों के अतिरिक्त, वाक्य-विन्यास, शब्द-चयन में […]

औरंगजेब रोड का नाम बदलना ऐतिहासिक निर्णय

आखिरकार नई दिल्ली नगर पालिका के अंतर्गत आने वाली सड़क, जिसका नाम औरंगजेब रोड था, अब वह भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम रोड के नाम से जानी जाएगी। इस सड़क के नाम परिवर्तन का मुद्दा कई वर्षों से चल रहा था, जो अब आकर फलीभूत हुआ। पूर्वी दिल्ली के सांसद […]

खाड़ी देशों में मोदी की चमत्कारी यात्रा

भारतीय विदेश नीति में कई बुनियादी परिवर्तन हो रहे है । कई खेमों में वर्षों की जंग को साफ किया जा रहा है, प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिव के साथ देश के भीतर और बाहर कई भ्रम फैलाए गए थे। उन अफवाहों को भी तोड़ा जा रहा है । मोदी की दो दिवसीय खाड़ी देशों की […]

युग-युगीन परम्परा में प्रश्न और उनकी उपादेयता

किसी भी परंपरा में प्रश्नों का पर्याप्त महत्व होना चाहिए, हो भी क्यों नहीं, क्योंकि प्रश्न ही तो जीवन की जटिल और सरल समस्याओं को समाधान तक पहुँचाने का माध्यम होते हैं। अतः जिन समाजों में प्रश्नों का सदैव ही सम्मान किया जाता है वे ही समाज अनन्त तक की यात्रा करने के लिए उन्मुख […]

नैतिक शिक्षा से मानवता संभव

मूल्यपरक शिक्षा के बिना ‘शिक्षा’ अशिक्षा है। शिक्षा से आशय केवल डिग्री नहीं है, बल्कि ऐसा ज्ञान जो समाज के उन्नयन में दीपक की भांति कभी न बुझने वाली दिव्य ज्योति हो। देश और समाज में शिक्षित व्यक्ति की कद्र उसी सनातन परंपरा के तहत आज भी भारत में होती है। ग्रामीण भारत में यह […]

मह्त्वाकांक्षा एवं आकांक्षा में भेद

महत्वाकांक्षा  और आकांक्षा दो ऐसे विषय है जो परस्पर कभी अभाषी कभी विरोधाभाषी है. सामान्यतः महत्वाकांक्षा शब्द व्यक्ति के स्वयं की अभिलाषा को व्यक्त करता है और आकांक्षा में परोपकार का भाव होता है. महत्वाकांक्षा के माध्यम से व्यक्ति स्वयं के कल्याण के साथ साथ दूसरों का कल्याण भी कर सकता है जिसे सकारात्मक महत्वाकांक्षा की संज्ञा दी जा सकती है. और नकारात्मक महत्वाकांक्षा में दूसरों […]

जेहाद की आड़ में आतंक

 सिडनी के मार्टिन प्लेस में लिंट चोकलेट कैफ़े के भीतर गत दिवस आंकवादियों ने जिस तरह लोगों को बधंक बनाया, वह बताता है कि ग्लोबल आतंकवाद का खेल जेहाद की आड़ में खेला जा जा रहा है | बेंगलुरु में मेहदी मसरूर विस्वास की हल में गिरफ्तारी से यह स्वयंसिद्ध हो गया है कि जेहाद […]

समर्पण

जो सब समर्पण करता है वह सब पा लेता है। जो कतार में सबसे पीछे खड़ा हो जाता है अपने अहं और दोषों को त्‍याग कर  वह कतार में सबसे आगे जगह पा लेता है क्‍योंकि वह अहं के भारी बोझ से दबा नहीं होता। ऐसा व्‍यक्‍ति अपनी बारी आने का इंतजार सब्र के साथ करता है। […]