विचार

स्वेदशी आंदोलन के प्रेणता बिपिन चंद्र पाल

स्वेदशी आंदोलन के प्रेणता सुविख्यात त्रिमूर्ति लाल-बाल-पाल के बिपिनचन्द्र पाल ;1858-1932द्ध ने अपने जीवन काल में अपने देशवादियों को सम्मोहित कर दिया था और निःसंदेह बंगाल-विभाजन के स्वदेशी आन्दोलन के वे जननायक थे। उनके समकालीन विद्वानों ने देशभक्ति की इस अभूतपूर्व लहर में महान योगदान के असंख्य प्रमाण दिये। स्वदेशी आन्दोलन के एक सक्रिय नेता […]

मंगल का प्रतीक स्वास्तिक

स्वास्तिक का अस्तित्व सिन्धु घाटी सभ्यता के भी पहले का माना जाता है. इसका प्रयोग अन्य धर्मों में भी किया जाता है. सिन्धु घाटी सभ्यता की खुदाई में ऐसे चिन्ह व अवशेष प्राप्त हुए हैं, जिनसे यह प्रमाणित हो जाता है कि लगभग 2-3 हज़ार वर्ष पूर्व में भी मानव सम्भ्यता अपने भवनों में इस […]

‘हिन्दू’ शब्द की उत्पत्ति

साभार: साहित्य अमृत, जून 2006

केवल राजनीति की शिक्षा नहीं, देशप्रेम भी चाहिए

संपादक- राष्ट्र किंकर

असहिष्णुता का हौवा

पिछले कुछ समय से असहिष्णुता को लेकर मचाया गया प्रलाप अंतत: संसद तक पहुंच गया। सदन में संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और संविधान पर चली दो दिनी चर्चा में विपक्षी दलों की बहस सुनकर तो लगता है कि देश में कथित असहिष्णुता का जो माहौल बना है, उसे बनाने में कहीं न कहीं […]

पुरस्कारों का अनादर

लेखक वरिष्ठ विचारक एवं प्रखर पत्रकार है।

हिंग्लिश प्रयोग से भाषा का अवमूल्यन

हिन्दी पत्रकारिता में अंग्रेजी शब्दों के अधिकाधिक प्रयोग से भाषागत विकृति और लालित्य में कमी से एक बड़ा सांस्कृतिक संकट खड़ा हो गया है। चार-पाँच शब्दों क शीर्षक में तीन शब्द आंग्ल के होते हैं। इंट्रो में भी धड़ल्ले से विदेशी भाषाओं का प्रयोग हो रहा है। अनुवाद में त्रुटियों के अतिरिक्त, वाक्य-विन्यास, शब्द-चयन में […]

औरंगजेब रोड का नाम बदलना ऐतिहासिक निर्णय

आखिरकार नई दिल्ली नगर पालिका के अंतर्गत आने वाली सड़क, जिसका नाम औरंगजेब रोड था, अब वह भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम रोड के नाम से जानी जाएगी। इस सड़क के नाम परिवर्तन का मुद्दा कई वर्षों से चल रहा था, जो अब आकर फलीभूत हुआ। पूर्वी दिल्ली के सांसद […]

खाड़ी देशों में मोदी की चमत्कारी यात्रा

भारतीय विदेश नीति में कई बुनियादी परिवर्तन हो रहे है । कई खेमों में वर्षों की जंग को साफ किया जा रहा है, प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिव के साथ देश के भीतर और बाहर कई भ्रम फैलाए गए थे। उन अफवाहों को भी तोड़ा जा रहा है । मोदी की दो दिवसीय खाड़ी देशों की […]

युग-युगीन परम्परा में प्रश्न और उनकी उपादेयता

किसी भी परंपरा में प्रश्नों का पर्याप्त महत्व होना चाहिए, हो भी क्यों नहीं, क्योंकि प्रश्न ही तो जीवन की जटिल और सरल समस्याओं को समाधान तक पहुँचाने का माध्यम होते हैं। अतः जिन समाजों में प्रश्नों का सदैव ही सम्मान किया जाता है वे ही समाज अनन्त तक की यात्रा करने के लिए उन्मुख […]