विचार

‘जरूरी’ और ‘मजबूरी’ के बीच झूलती हमारी भाषायी संवेदना

संपादक राष्ट्र किंकर

चित्तोड़ की रानी पद्मावती के आत्म बलिदान की अमर गाथा

मशहूर फिल्म निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली की ‘रानी पद्मावती’ की अमर गाथा पर बनाई फिल्म रिलीज होने को तैयार है लेकिन उसका जम कर विरोध हो रहा है । फिल्म निर्माण की शुरुआत से ही विवादों के घेरे में है यदि झूठी प्रसिद्धि और दर्शकों को सिनेमा हाल में खींचने के लिए के फिल्मकार […]

मुद्रा

थे गर्भ में गुलाम की मुद्रा लिए हुए। पैदा हुए प्रणाम की मुद्रा लिए हुए। आदर्श की जब बात चली तो खड़े हुए, मंचो पर श्रीराम की मुद्रा लिए हुए। हर बार किया प्रश्न शराबी निगाह ने, क्यों जी रहे हो जाम की मुद्रा लिए हुए। था फ़िल्मी गीत कंठ में हिलते रहे मगर, ये […]

क्या न्यायिक समीक्षा पाप या अपराध है?

संपादक : राष्ट्र किंकर

भारत को भारत ही रहने दो-तालिबान ना बनाओ

बौद्ध बहुल म्यांमार में करीब 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं. इनको मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी माना जाता है. इनकी हिसक तथा घिनौनी कृत्यों को देखकर अहिंसक बौद्ध म्यांमार सरकार ने कई पीढ़ियों से रह रहे इस समुदाय के लोगों की नागरिकता छीन ली है. लगभग सभी रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन (अराकान) राज्य में […]

धारा 370 एवं 35A ने अलगाव वाद को बढ़ावा दिया है

कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। भारतवासी अपने इस भूभाग के लिए बहुत सम्वेदनशील शील है। कश्मीर का बहुत बड़ा बजट है। कश्मीर की रक्षा और पाक समर्थित आतंकवादियों से बचाने के लिए के लिये लगातार बलिदान दिये हैं। अक्सर सुरक्षा बल के शहीद जवानों के शव तिरंगे से लिपट कर आते हैं। 14 मई […]

राजनीति की प्रयोगशाला बनते शिक्षा परिसर

संपादक: राष्ट्र किंकर

धारा 370 एवं 35A ने अलगाव वाद को बढ़ावा दिया है।-पार्ट -1

कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है भारतवासी अपने इस भूभाग के लिए बहुत सम्वेदनशील शील है। कश्मीर का बहुत बड़ा बजट है। कश्मीर की रक्षा और पाक समर्थित आतंकवादियों से बचाने के लिए के लिये लगातार बलिदान दिये हैं। अक्सर सुरक्षा बल के शहीद जवानों के शव तिरंगे से लिपट कर आते हैं। 14 मई […]

मानवता, धार्मिकता और राष्ट्रीयता

संपादक राष्ट्र किंकर

माँ की पाती संपादक के नाम

हर पत्रिका की तरह हमारे पास भी ढेरों पत्र आते हैं। उन में से कुछ पत्र का उत्तर तो ज्योतिषाचार्य जी, तो कुछ का स्वास्थ्य- विशेषज्ञ देते हैं। कभी- कभी पारिवारिक अथवा सामाजिक समस्याएं भी आती हैं। तो कानूनी सलाह मांगने वालों की भी कमी नहीं होती। प्रयास रहता है कि उस विषय के ज्ञाता […]