समीक्षा

‘सॉफ्ट पावर’ बन रहा है कोतवाल अमेरिका

प्रथम विश्व युद्ध के उपरान्त अमेरिका अपने यूरोप के मित्रों के साथ मिलकर पूरे विश्व के कोतवाल की भूमिका में ढाल रहा है। दूसरे विश्व युद्ध के पश्चात तो उसने जापान पर दो एटम बम गिराकर अपनी शक्ति और नीयत का स्पष्ट संकेत दे दिया। उसके बाद वियतनाम और फिर अफगानिस्तान और ईरान पर भी […]

अन्तर्विरोधों से घिरी उच्च शिक्षा

वर्तमान परिस्थितियों में आर्थिक, वैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए उच्च शिक्षा की महती Parajumper Svart भूमिका है। उच्च शिक्षा युवाओं को अपनी दक्षता और क्षमता बढ़ाने का सुअवसर देती है। इसी से युवाओं मे अधिकतम आय प्राप्त करने की योग्यता का भी संचार होता है। दुर्भाग्य से हमारे देश में उच्च शिक्षा को […]

टीवी पर छद्म राष्ट्रवाद का जश्न

भारत के एक मालवाहक जहाज को चीन से लगी हमारी सीमा में उतरने या फिर भारतीय क्रिकेट टीम के किसी टूर्नामेंट के जीतने को क्यों टीवी चैनल ऐसे प्रचारित करते हैं मानो हमारी सारी राष्ट्रीय समस्याएं खत्म हो गईं? इन दोनों ही बातों के पीछे एक राष्ट्र के तौर पर हमारी छिपी वैश्विक महत्वाकांक्षा और हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व की नपुंसकता जिम्मेदार हैं….

सोशल ऑडिट: कुशासन से मुक्ति संभव

हाल ही में हमने अंग्रेजों के शासन से आजादी के 66 साल पूरे किए। इस समय जब हम स्वशासन से हुए नफा-नुकसान का लेखा-जोखा कर रहे हैं तो यह विचार करना आवश्यक है कि क्या हमें कुशासन से भी मुक्ति मिली है? अगर हम अपने आस-पास नजर दौड़ाते हैं, तो कुशासन के Cheap Converse Shoes […]

अयोध्या: आस्था बनाम तर्क

भारतीय अकादमिक परिवेश में वामपंथी विचारधारा कुछ इस कद्र छायी हुई है कि उससे जुड़े लोगों को इसके अलावा कुछ सूझता ही नहीं है। उनके 150 साल पुराने बेसिक फ्रेमवर्क में जो चीज सही नहीं बैठती वो वस्तुनिष्ठ हो सकती, वो सच नहीं हो सकती। एक गलत बात को साबित करने के लिए सौ झूठ […]

भूखों को कटोरा न थमाएं

सिद्धांतत: कोई भी इस खाद्यान्न सुरक्षा बिल का विरोध नहीं करेगा। एक श्रेष्ठ शासक की यह चिंता अनुचित नहीं है कि कोई भी उसके राज्य में भूख न सोए। हमारी संस्कृति और परम्परा भी ‘सर्वजन हिताय’ से स्पंदित रही है। स्वामी विवेकानंद ने तो दरिद्र भूखे व्यक्ति को धर्मोपदेश देना भी अनैतिक माना है। उनका […]