समीक्षा

टीवी पर छद्म राष्ट्रवाद का जश्न

भारत के एक मालवाहक जहाज को चीन से लगी हमारी सीमा में उतरने या फिर भारतीय क्रिकेट टीम के किसी टूर्नामेंट के जीतने को क्यों टीवी चैनल ऐसे प्रचारित करते हैं मानो हमारी सारी राष्ट्रीय समस्याएं खत्म हो गईं? इन दोनों ही बातों के पीछे एक राष्ट्र के तौर पर हमारी छिपी वैश्विक महत्वाकांक्षा और हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व की नपुंसकता जिम्मेदार हैं….

सोशल ऑडिट: कुशासन से मुक्ति संभव

हाल ही में हमने अंग्रेजों के शासन से आजादी के 66 साल पूरे किए। इस समय जब हम स्वशासन से हुए नफा-नुकसान का लेखा-जोखा कर रहे हैं तो यह विचार करना आवश्यक है कि क्या हमें कुशासन से भी मुक्ति मिली है? अगर हम अपने आस-पास नजर दौड़ाते हैं, तो कुशासन के प्रमाण प्रचुर मात्रा […]

अयोध्या: आस्था बनाम तर्क

भारतीय अकादमिक परिवेश में वामपंथी विचारधारा कुछ इस कद्र छायी हुई है कि उससे जुड़े लोगों को इसके अलावा कुछ सूझता ही नहीं है। उनके 150 साल पुराने बेसिक फ्रेमवर्क में जो चीज सही नहीं बैठती वो वस्तुनिष्ठ हो सकती, वो सच नहीं हो सकती। एक गलत बात को साबित करने के लिए सौ झूठ […]

भूखों को कटोरा न थमाएं

सिद्धांतत: कोई भी इस खाद्यान्न सुरक्षा बिल का विरोध नहीं करेगा। एक श्रेष्ठ शासक की यह चिंता अनुचित नहीं है कि कोई भी उसके राज्य में भूख न सोए। हमारी संस्कृति और परम्परा भी ‘सर्वजन हिताय’ से स्पंदित रही है। स्वामी विवेकानंद ने तो दरिद्र भूखे व्यक्ति को धर्मोपदेश देना भी अनैतिक माना है। उनका […]