समीक्षा

भारतीय संस्कृति की चिंता छोड़ “शाहबानों-पीर-फ़कीरी” पर भी कैमरा घुमाओं

  बाहरी ग्रहों से आतीं उड़नतश्तरीयों का बड़ा ही खूबसूरत फिल्मांकन होता है हालीवुड फिल्मों में | बेहद भव्य और अर्थपूर्ण होती हैं वे | ” दि इंडिपेंडेंस डे” हो या “मार्स अटैक”- एक सफल कल्पना और वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि के साथ फिल्म के दृश्यों का तानाबाना बुना जाता है | ऐसा कि  बस देखते ही […]

हिमालयी देशों में चीनी घुसपैठ और मोदी की विदेश नीति

कई दशकों बाद भारत की विदेश नीति में बुनयादी परिवर्तन की ताल सुनाई पद रही है और इसकी कम्पन दुनिया के अन्य हिस्सों में महसूस की जा रही है। दरसल, इसकी बानगी वाजपेयी सरकार के समय ही हो गए थी लेकिन 21 राजनितिक दलों के महागठबंधन में यह सोच दब गई।  मोदी सरकार ने चीन […]

दुनिया में बढ़ती असमानता

इस तस्वीर को देखकर गरीबी पर आंसू बहाने की बजाए गहरी चिंता होनी चाहिए। भारतीय प्रजातांत्रिक गणराज्य की कल्पना में सभी तबकों में समाजिक बराबरी बनाने की संकल्पना की गई थी, लेकिन आजादी के छह दशक बाद भी उस संकल्पना पर हम अभी तक खरे नहीं उतर सके हैं। अमीरों और गरीबों के बीच की […]

तबाही के बाद क्यों बढ़ती है जी.डी.पी.

पिछले पांच सौ वर्षों से विकास की अवधारणा मानव केन्द्रित उपभोगवादी और प्रकृति विध्वंसक रही है | अक्षय विकास के अपने लक्ष्य को पाने के सूत्र हमें दर्शन में मिलेंगे | पूंजीवादी व्यवस्था ने जो विकृतियाँ पैदा की हैं, अमेरिकी मंदी से उसे आज भी ढक पाना मुश्किल है | इसलिए ग्लोबल वार्मिंग पर विमर्श […]

षड्यंत्रों से संघर्ष करती राष्ट्रभाषा हिंदी

राष्ट्रभाषा होने के बावजूद हिंदी षढ़यंत्रों का शिकार रही है। स्वाधीनता के बाद से हमारे देश में, हिंदी के खिलाफ षड्यंत्र रचे जाते रहे हैं। उन्ही का परिणाम है कि हिंदी आजतक अपना अनिवार्य स्थान नहीं पा सकी है। हम अपनी मानसिक गुलामी की वजह से यह मान बैठे हैं कि अंग्रेजी के बिना हमारा काम […]

पत्रकारिता का 'नरक' युग

न्यूज चैनल देखूं या अखबार। जैसे ही किसी शब्द में मात्रा, वर्तनी की अशुद्धि दिखती है तो लगता है जैसे पुलाव खाते हुए, अचानक दांतों के बीच मोटा सा कंकड़ पड़ गया हो। पत्रिकाओं, अखबारों में मैंने काम किया, न्यूज चैनल में काम कर रहा हूं और एक प्रवृत्ति भी देख रहा हूं कि वर्तनी […]

गृह युद्ध की गिरफ्त में इराक

इराक में गृह युद्ध के कारण हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं| इस्लामिक आतंकी संगठन के बरपे कहर के आगे सरकार बेबस है | सैकड़ों निर्दोष लोगो की जानें जाने का सिलसिला थम नहीं पा रहा है | हजारों लोग पलायन को विवश हैं | कबीलाई लड़ाई, सुन्नी संघर्ष, विभिन्न आतंकी गुटों में […]

मोदी सरकार के कृषि क्षेत्र में ध्यान देने से उम्मीदें जगी

भाजपा सरकार बड़ी दुविधा में है। विरासत के रूप में उसे खाली राजकोष,बेमानी सबसिडी वाले फिजूल खर्च वाले कार्यक्रम जैसे मनरेगा और खाद्य सुरक्षा मिले है जिससे जनता को दिखावटी फायदा मिला। मनमोहन सरकार के ऐसे कार्य से देश का निर्माण न होना था और न ही हुआ। मोदी सरकार को अब नीचे से उपर […]

डीयू, जेएनयू और शिक्षा की हू-तू-तू

एक नया समय सामने है। कोई ऑटो चलाने वाले की लड़की चार्टर्ड अकाउंटेंसी की परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ हो कर निकलती है तो किसी बस ड्राइवर का बच्चा भारतीय प्रशासनिक सेवा का देदीप्यमान सितारा बन जाता है। ये वे विद्यार्थी होते हैं, जिन्होंने माँ-बाप और अपना पेट काटकर पढ़ाई के संसधान जुटाए हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ऐडमिशन का कट ऑफ […]

पाकिस्तानी पुस्तकों में भारत विरुद्ध ज़हर का पुट

मोदी सरकार के आने के बाद से पाकिस्तान में बेचैनी और हताशा का माहौल है | पाकिस्तान पहली बार भारत में किसी चयनित प्रधानमन्त्री से भयभीत है | उसे लग रहा है कि भारत की मजबूत सरकार पकिस्तान की जेहादी मंसूबे को किसी भी कीमत पर बर्दास्त नहीं करेगी | मोदी ने स्पष्ट तौर पर […]