समीक्षा

लाल बहादुर शास्त्री जी के बाद पहला ग्रामोदय बजट

इस बार बजट में ग्रामीण विकास के लिए 87,000 करोड़ रुपए का आवंटन, मनरेगा के लिए 38,500 करोड़, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत आवंटन बढ़ाकर 19,000 करोड़ रुपए और किसानों पर ऋण का बोझ कम करने के लिए 15,000 करोड़ रुपए का भारी भरकम प्रावधान निश्चित रूप से किसानों को लेकर केंद्र सरकार की […]

तेल से अपना खेल साध रही है सरकार

भले ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में लगातार कमी हो रही हो, किन्तु देश में पेट्रोल-डीजल के मूल्य में वृद्धि ‘कमाई’ का बड़ा जरिया बन गया है। बड़े-बड़े वायदों के बाद भी केंद्र और राज्य सरकारों ने राजस्व घाटे की भरपाई और आय वृद्धि का कोई उपाय नहीं ढूंढा। यह सबसे आसन […]

अफगानिस्तान में चीन, इसके क्या होंगे परिणाम

अफगानिस्ता के मुद्दे पर चीन नई भूमिका कई बुनियादी प्रश्नों को जन्म देता है। पिछले दो तीन वर्षों से चीन अफगानिस्तान में शांति बहाली की प्रक्रिया में लगा हुआ है । 30 जुलाई को चीन के सिक्यिांग राज्य में अफगानिस्तान सरकार, अनगिनत खण्डों में बंटे हुए तालिबानी समूह और पाकिस्तानी गुप्तचर संस्था आई.एस.आई के प्रमुख […]

‘बाहुबली’ की सफलता के मायने

जल रही है चिता, सांसों में है धुआं फिर भी आस है मन में जगी भोर होगी क्या कभी यहां पूछती यही हैं ये बेड़ियां, देख तो कौन हे ये…। बाहुबली फिल्म जिसने नहीं देखी तो वह कल्पना भी नहीं कर सकता कि इस फिल्म की बनावट, बुनावट, कथानक की कसावट और कलाकारों की भाषा-भूषा, […]

वैकल्पिक चिकित्सा का बढ़ता बाज़ार

भले ही हम एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति के सहारे किसी सामान्य बीमारी से तुरंत राहत पा लेते हैं, लेकिन इसके प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए भारत समेत दुनियाभर में इससे इतर वैकल्पिक पद्धति से उपचार कराने का चलन बढ़ रहा है। प्राचीन संस्कृति आधारित चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियां सदियों से स्वास्थ्य व जीवन रक्षा में सहायक […]

भारत में स्वास्थ्य सेवाएं: स्थिति, चुनौती एवं समाधान

  हमें बचपन से ही सिखाया जाता है कि स्वस्थ जीवन ही सफलता की कुंजी है। किसी भी व्यक्ति को अगर जीवन में सफल होना है तो इसके लिए सबसे पहले उसके शरीर का स्वस्थ होना आवश्यक है। व्यक्ति से इतर एक राष्ट्र पर भी यही सिद्धांत लागू होता है। नागरिक जितने स्वस्थ होंगे देश […]

अच्छे दिन कैसे आयेंगे

‘रंगभूमि’ (1925) का सूरदास उजबक- सा दिखता है, पर पहला आम आदमी है जो अपनी जमीं बचाने के लिए औद्यौगिक विकास के नाम पर ‘लूट’ और राजनैतिक छल-छद्म से दिलेरी के साथ संघर्ष करता है | सोची-समझी रणनीति के तहत सरकार की कार्यप्रणाली किसान वर्ग को कंगाल बना रही है | बड़ें किसानों को कभी […]

सख्त बजट ने किसी को नहीं छोड़ा, दाम बढ़ने के संकेत

यह बहुत ही सख्त बजट है. इसमें प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के साक्षर तो युवानीति, बुजुर्गों के लिए कर छूट, मेक इन इंडिया के तहत विकास की कोशिश में तो दीखते है. पर साथ ही जनता द्वारा बाहर किये गए मनमोहन सिंह के मुहर भी दिखती है. बजट से मुद्रास्फीति बढ़ेगी और लोगों को अपनी […]

मेरा भी नहीं, तेरा भी नहीं, तो फिर किसका है यह बजट

  अरुण जेटली के बजट पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं और मज़ेदार बात यह है कि ये दोनों ही प्रतिक्रियाएं अपने-अपने पक्ष के एक्स्ट्रीम पर हैं। पहली प्रतिक्रिया उस वर्ग की ओर से आ रही है जिसके लिए केंद्र सरकार का बजट सस्ता-महंगा और टैक्स छूट की सुर्खियों से ज़्यादा […]

भारतीय संस्कृति की चिंता छोड़ “शाहबानों-पीर-फ़कीरी” पर भी कैमरा घुमाओं

  बाहरी ग्रहों से आतीं उड़नतश्तरीयों का बड़ा ही खूबसूरत फिल्मांकन होता है हालीवुड फिल्मों में | बेहद भव्य और अर्थपूर्ण होती हैं वे | ” दि इंडिपेंडेंस डे” हो या “मार्स अटैक”- एक सफल कल्पना और वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि के साथ फिल्म के दृश्यों का तानाबाना बुना जाता है | ऐसा कि  बस देखते ही […]