प्रेरणा

सातवीं पीढी

एक शहर में एक अमीर व्‍यापारी रहता था। पूरे दिन बहुत मेहनत से काम करता था। एक दिन उसने अपने घर के सामने एक भिखारी को देखा तो थोड़ा चिंतित हो गया। व्‍यापारी मन ही मन में सोचने लगा कि अगर इस भिखारी के पास बहुत सारा धन होता, तो यह भीख नही मांगता। फिर […]

दत्तोपंत ठेंगड़ी

भारतीय चिन्तनधारा के अतुलनीय मनीषी दत्तोपंत ठेंगडी; भारतीय अर्थचिंतन, समाज व्यवस्था एवं संपूर्ण राष्ट्र के लिये एक ऐसे संत के रूप में अवतरित हुए थे, जिनसे पूरा राष्ट्र-समाज प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता है। वे एक ऐसी सरणि के संत तुल्य विचारक थे, जिन्होंने अपने प्रचार का लोभ कभी नहीं रखा । वे मात्र […]

प्रेरक जीवन-अनिल माधव दवे

6 जुलाई 1956 को उज्जैन के बडनगर में जन्मे स्व. अनिल माधव दवे वाल्यकाल से ही संघ के स्वयंसेवक थे। इंदौर के गुजराती कोलेज से उन्होंने ग्रामीण विकास और प्रबंधन में विशेषज्ञता के साथ, कामर्स में मास्टर उपाधि प्राप्त की। यही वह समय था जब वे जय प्रकाश जी के समग्र क्रान्ति आन्दोलन से भी […]

डेढ़ हाथ की मालकिन

अपने शराबी पति की तीसरी पत्नी, छः बच्चों की माँ, चार घरों में काम करके अपना मकान खरीदने, बच्चों को पदाने-लिखाने और उनकी शादियाँ अपने अकेले के दम पर करने वाली कुछ अलग तरह की माँ

भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण

भारत के सांस्कृतिक धरातल पर पर्यावरण का अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान रहा हैं। पर्यावरण के संरक्षण में प्राचीन भारतीय परम्पराओं का विशेष योगदान हैं। हमारे मनीषियों ने प्रकृति की समग्र शक्तियों को जीवन दायिनी स्वीकार करते हुए उन्हे देवत्व का स्थान प्रदान किया है।

मोदी का यह काम शुद्ध परमार्थ

बलिया ने नरेंद्र मोदी की छवि ही बदल दी। अब तक लोग यह मान रहे थे कि मोदी की सरकार देश के बड़े पूंजीपतियों की सेवा कर रही है। उसे न तो देश के मध्य-वर्ग की परवाह है और न ही गरीबों की लेकिन बलिया में मोदी ने गरीब परिवारों को रसोई गैस की टंकियां […]

कलाम दिवंगत नहीं हो सकते

प्रेरक, मार्गदर्शक, दार्शनिक, दोस्त, शिक्षक, वैज्ञानिक, प्रशासक… पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के व्यक्तित्व के न जाने और कितने पहलू थे। साधारण और गरीब परिवार में जन्म लेने के बाद भी किस तरह से मजबूत इरादे और मेहनत के सहारे देश के सर्वोच्च स्थान तक पहुंचा जा सकता है, इसकी मिसाल थे डॉ. अब्दुल कलाम। […]

लक्ष्मण को आई नींद

. ~~~वनवास के चौदह वर्ष में बस एक ही रात आई थी लक्ष्मण को नींद~~~ जब श्रीराम को कैकयी के कहने पर राजा दशरथ ने चौदह वर्ष का वनवास दिया तो सीता माता के साथ लक्ष्मण भी उनके साथ चलने को तैयार हो गए। प्रभु श्रीराम ने उन्हें मना किया, किंतु लक्ष्मण का तर्क था […]

रोगमुक्त मानव की आवश्यकता है जैविक खेती

प्राचीन काल में राजा-महाराजा को मारने के लिए षडयंत्रकारी लोग राजा के रसोईए से मिलकर, राजा के भोजन में धीमी गति से फैलने वाला ज़हर मिलवा देते थे । परन्तु आजकल हम सब कुछ जानते हुए भी आँखे बंद करके इस ज़हर का सेवन करते हैं ! प्रतिदिन हम समाचार पत्र-पत्रिकाओं अथवा टी वी चैनलों […]

अमृत वृद्धाश्रम: एक नई शुरुआत

मैंने धीरे से आँखें खोलीं, एम्बुलेंस शहर के एक बड़े हार्ट हॉस्पिटल की ओर जा रही थी। मेरी बगल में भारद्वाज जी, गौतम और सूरज बैठे थे। मुझे देखकर सूरज ने मेरा हाथ थपथपाया और कहा, “ईश्वर अंकल, आप चिंता न करे, मैंने हॉस्पिटल में डॉक्टर्स से बात कर ली है, मेरा ही एक दोस्त वहाँ पर हार्ट सर्जन […]