प्रेरणा

जल ही जीवन है!!

जल की अधिकता व कमी दोनों ही हानि कारक हैं ! ऋतुओं के देश भारत में वर्षा ऋतु में यदि जल का संचयन भलिभाँति कर लिया जाये तो देश में जल आपदा जैसी समस्या से काफ़ी हद तक छुटकारा प्राप्त हो सकता है ! जल संचयन एवं संरक्षण के लिए पिछले कई वर्षों से प्रयासरत […]

उपहार

नवोदित कहानीकार

सामाजिक सद्भाव की प्रतिमूर्ति संभाजी भिड़े

जाने-माने लोकप्रिय सामाजिक कार्यकर्ता:- संभाजी भिड़े ‘गुरूजी’ महाराष्ट्र के जाने-माने लोकप्रिय नेता हैं। संत विनोवा भावे, महात्मा गांधी जय प्रकाशनारायण नरेन्द्रदेव लोहिया तथा अन्ना हजारे की तरह वे एक सर्वोदयी जननेता हैं। हिंदुत्व के लिये उनका योगदान अवर्णनीय है। वह मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी के कट्टर अनुयायी हैं और महाराष्ट्र की वर्तमान युवा जनसंख्या उन्हें […]

सन्तान के लिए विरासत

Cheap Purchase Pills online Purchase Cheap online मृत्यु के समय, टॉम स्मिथ ने अपने बच्चों को बुलाया और अपने पदचिह्नों पर चलने की सलाह दी, ताकि उनको अपने हर कार्य में मानसिक शांति मिले। उसकी बेटी सारा ने कहा, डैडी, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप अपने बैंक में एक पैसा भी छोड़े बिना मर रहे […]

जल ही जीवन है

जल ही जीवन है !!जल की अधिकता व कमी दोनों ही हानिकारक हैं ! ऋतुओं के देश भारत में वर्षा ऋतु में यदि जल का संचयन भलि भाँति कर लिया जाये तो देश में जल आपदा जैसी समस्या से काफ़ी हद तक छुटकारा प्राप्त हो सकता है ! जल संचयन एवं संरक्षण के लिए पिछले […]

सातवीं पीढी

एक शहर में एक अमीर व्‍यापारी रहता था। पूरे दिन बहुत मेहनत से काम करता था। एक दिन उसने अपने घर के सामने एक भिखारी को देखा तो थोड़ा चिंतित हो गया। व्‍यापारी मन ही मन में Toronto Fc New Kits सोचने लगा कि अगर इस भिखारी के पास बहुत सारा धन होता, तो यह […]

दत्तोपंत ठेंगड़ी

भारतीय चिन्तनधारा के अतुलनीय मनीषी दत्तोपंत ठेंगडी; भारतीय अर्थचिंतन, समाज व्यवस्था एवं संपूर्ण राष्ट्र के लिये एक ऐसे संत के रूप में अवतरित हुए थे, जिनसे पूरा राष्ट्र-समाज प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता है। वे एक ऐसी सरणि के संत तुल्य विचारक थे, जिन्होंने अपने प्रचार का लोभ कभी नहीं रखा । वे मात्र […]

प्रेरक जीवन-अनिल माधव दवे

6 जुलाई 1956 को उज्जैन के बडनगर में जन्मे स्व. अनिल माधव दवे वाल्यकाल से ही संघ के स्वयंसेवक थे। इंदौर के गुजराती कोलेज से उन्होंने ग्रामीण विकास और प्रबंधन में विशेषज्ञता के साथ, कामर्स में मास्टर उपाधि प्राप्त की। यही वह समय था जब वे जय प्रकाश जी के समग्र क्रान्ति आन्दोलन से भी […]

डेढ़ हाथ की मालकिन

अपने शराबी पति की तीसरी पत्नी, छः बच्चों की माँ, चार घरों में काम करके अपना मकान खरीदने, बच्चों को पदाने-लिखाने और उनकी शादियाँ अपने अकेले के दम पर करने वाली कुछ अलग तरह की माँ

भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण

भारत के सांस्कृतिक धरातल पर पर्यावरण का अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान रहा हैं। पर्यावरण के संरक्षण में प्राचीन भारतीय परम्पराओं का विशेष योगदान हैं। हमारे मनीषियों ने प्रकृति की समग्र शक्तियों को जीवन दायिनी स्वीकार करते हुए उन्हे देवत्व का स्थान प्रदान किया है।