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दीपावली: दीप जला कर संकल्प लेने का दिवस

दीपावली का नाम स्मरण करने मात्र से अनेक प्रकार के विचार मन में दौड लगाने लगते हैं। बच्चों को जहां नए-नए कपडे, मिठाई, खिलौने व पटाखे याद आते हैं, तो बडों को समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी की आराधना कर कुछ पाने की आकांक्षा रहती है। महिलाएं इसकी तैयारियों के विषय में चिंतन में लीन […]

जागो सोये हुए लोगों

अब बहुत हुआ…सोते हुए लोगो अब तो जग जाओ… नहीं तो फिर लाठियां बज़ा के जगाया जायेगा… तुम बैठोगे अपने हक मांगने को और… तुम्हे ठग कह के बुलाया जायेगा… आज अगर नहीं जागे और इन राक्षसों को नहीं भगाया.. तो कल फिर कोई और “विदेशी” माता या बहन या बहु बन के आयेगी… और […]

धर्म की सही परिभाषा

 सन 1964 ईस्वी में जमशेदपुर में सांप्रदायिक दंगा हुआ। लोग हिंसा, आक्रोश, भय और संदेह के साये में पल रहे थे। सैकड़ों लोगों की जानें गईं। रात में पूरी तरह कर्फ्यू लागू थे। बिष्टुपुर के एक मंदिर में पंडित रामानंद जी पुजारी थे। वे सत्यवादी और पक्के सनातनी थे। मंदिर में करीब 20 कच्चे घर […]

रोटी और राजनीति!!

सुबह जब निकला मैं गंतव्य को जाने के लिए! एक श्वान परिवार लगा रहा था, कचरे के ढेर के आसपास चक्कर, ताकि मिल जाए कुछ खाने के लिए! देखा कुछ देर बाद तो, माता के मुंह में था, रोटी का एक टुकड़ा! पिल्लों के मुंह पर आ गयी, थी रौनक और प्रफुल्लित था, उन सबका […]

बस्तर में बांस की कलात्मक दुनिया

तेरहवीं शताब्दी का पूर्वार्द्ध जब अन्नमदेव ने चक्रकोट के नाग शासकों को अंतिम रूप से परास्त कर अपना शासन स्थापित किया तब कोंटा से कांकेर तक उनके द्वारा शासित क्षेत्र का नाम बस्तर रखा गया। इस नामकरण के पीछे अनेक कहानियाँ हैं जिसमे से प्रमुख मान्यता है कि वारंगल से निष्काषित होने के पश्चात बस्तर […]

आदमी के भेष में ये कौन आदमखोर है?

पिछले कुछ समय में हमने इस समाज के दो चेहरे देखे। एक अत्यंत घिनौना, डरावना, अपराध, आतंक और दहशतगर्दी का। इसी समाज में छुपे वो चेहरे इतने घिनौने थे कि उन्हें इंसान मानना इस समाज के लिए सहज ना था। फिर चाहे वो गुवाहाटी की घटना हो या दामिनी की। चाहे वो आंतकवाद हो या […]

रक्त-बीज़ मर्दन करूँ

नाचूँ , गाऊँ , भजन करूँ शीश झुकाऊँ , नमन करूँ । आशीष मिले तुम्हारा तुम पर सब कुछ अर्पण करूँ । रूप , गुण मिले मुझे तुम्हारा तुम्हारी प्रतिमा का दर्पण बनूँ । दुखियों की सेवा करूँ गीत तुम्हारा मनन करूँ । दीनों पर सर्वस्व लुटाऊँ कुविचारों का दमन करूँ ।   असत्य अब […]

“कष्ट तो महावीर ने बहुत भोगे पर वे दुखी नहीं थे”

जैन श्वे. खरतरगच्छ संघ के उपाध्याय प्रवर पूज्य गुरुदेव मरूधर मणि श्री मणिप्रभसागरजी म.सा. ने श्री जिन हरि विहार धर्मशाला में आज प्रवचन फरमाते हुए कहा, “कष्ट और दु:ख की परिभाषा समझने जैसी है। ऊपर से दोनों का अर्थ एक-सा लगता है, पर गहराई से सोचने-समझने पर इसका रहस्य कुछ और ही पता लगता है। कष्टों […]

उत्तर प्रदेश से बहेगी बदलाव की बयार

क्या उत्तर प्रदेश का राजनीतिक वर्चस्व की कम हो रहा है? आज यह प्रश्न सभी लोगों के मन में है। कई लोग कहेंगे कि नहीं यह तो पिछले दशक में ही हो चुका है। उत्तर प्रदेश देश के सबसे अधिक राजनीतिक चेतना संपन्न प्रांतों में रहा है। सदा यह एक प्रगतिवादी सोच का प्रतीक रहा […]

सुलगते सवालों के घेरे में सोशल मीडिया

वीडियो शेयरिंग वेबसाइट यू-ट्यूब का स्लोगन है ‘ब्रॉडकास्ट योरसेल्फ’ यानी खुद को प्रसारित करो। कहने का आशय है कि इस मंच पर आपको अपने विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए असीम आजादी उपलब्ध है। सोशल मीडिया ने अपने स्वरूप में निहित इस विशिष्टता को निखारकर जनमत निर्माण का साधन और दबाव समूह का […]