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सुशासन या शासन के 3 वर्ष

वरिष्ठ अधिवक्ता

फन फैलाते आतंकवाद के प्रति ‘जीरो’ टॉलरेन्स

दुखद आश्चर्य यह है कि ब्रिटेन सहित पूरा पश्चिम आतंकवाद पर अस्पष्ट रवैया अपना रहा है। सस्ती मजदूरी के लालच में यूरोप ने अपने नियम कानूनों को लचीला बनाया तो दूसरी ओर गृहयुद्ध के शिकार अनेक देशों के शरणार्थियों के लिए अपने द्वार खोले।

जलदान

पिता की अनुमति मिली तो पुत्र ने भावी ससुराल में ‘हामी’ पहुँचा दी। वर की घरु स्थिति से परिचित वधूपक्ष ने कोई रीति रस्म से अपेक्षा न करते हुए स्वयं ही सारे रिवाज सम्पूर्ण किये। शिव-पार्वती के समक्ष सम्पन्न हुए विवाह पश्चात् विदाई हुई।

जलजला बन सकता है जल संकट

कुछ वर्ष पूर्व दिल्ली में भूमिगत मैट्रो के निर्माण के दौरान सूख चुके अनेक बावड़ी और तालाब मिले। लेकिन आज भी दिल्ली में झील, तालाब, कुएं व बावड़ी समेत एक हजार से अधिक ऐसे जलस्रोत हैं जो अवैध निर्माण और रखरखाव के अभाव के कारण बहुत खराब हालत में है।

जाने भी दो यारों पार्ट-2

भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार एक बहुचर्चित और बहुविवादित शब्द है। दूसरा शायद ही कोई ऐसा शब्द हो जिसकी इतनी मनमानी परिभाषाएं हों। लेकिन न जाने इस शब्द में ऐसा क्या जादू है कि दूसरों का छोटे से छोटे भ्रष्टाचार तो दिखता है लेकिन अपना बड़े से बड़ा भ्रष्टाचार भी ‘जनसेवा’ प्रतीत होता है।

दृष्टान्त तुलसी माता- अकबर-बीरबल

एक बार अकबर बीरबल हमेशा की तरह टहलने जा रहे थे! रास्ते में एक तुलसी का पौधा दिखा .. मंत्री बीरबल ने झुक कर प्रणाम किया ! अकबर ने पूछा कौन हे ये ? बीरबल — मेरी माता हे ! अकबर ने तुलसी के झाड़ को उखाड़ कर फेक दिया और बोला .. कितनी माता […]

मिजोरम में हिंदी शिक्षकों की दुर्दशा

पिछले दिनो पूर्वोत्तर के सीमान्त राज्य मिजोरम की राजधानी आईजोल के अपने एक सप्ताह के प्रवास के दौरान हमने अनुभव किया कि वह राज्य हिंदी से अछूता है। किसी भी व्यवसायिक स्थल को तो दूर सड़क पर लगे संकेत चिन्ह, नाम आदि भी घोषित त्रिभाषा फार्मुले को धता बता रहे थे। मिजोरम में दो केन्द्रीय […]

देश विदेश में नव वर्षोत्सव

सम्पूर्ण विश्व में नव वर्ष धूम धाम से मनाया जाता है। लोग एक दूसरे को बधाईयाँ देते है तथा भावी जीवन के प्रति मंगलकामनाएं प्रकट करते है।यह पर्व समस्त देशों में प्राय: अंग्रेजी कलैण्डर के अनुसार एक जनवरी को मनाया जाता है। सबसे पहले एक सौ तरेपन ईस्वी पूर्व यह वारव एक जनवरी को मनाया […]

स्वेदशी आंदोलन के प्रेणता बिपिन चंद्र पाल

स्वेदशी आंदोलन के प्रेणता सुविख्यात त्रिमूर्ति लाल-बाल-पाल के बिपिनचन्द्र पाल ;1858-1932द्ध ने अपने जीवन काल में अपने देशवादियों को सम्मोहित कर दिया था और निःसंदेह बंगाल-विभाजन के स्वदेशी आन्दोलन के वे जननायक थे। उनके समकालीन विद्वानों ने देशभक्ति की इस अभूतपूर्व लहर में महान योगदान के असंख्य प्रमाण दिये। स्वदेशी आन्दोलन के एक सक्रिय नेता […]

कर निर्धारण

कर निर्धारण सदा से ही शासन तंत्र के लिए बहुत जटिल विषय रहा है। इसका प्रमुख कारण है की एक ओर कर देश की राजस्व प्राप्ति का प्रमुख संसाधन है, जिसपर देश में चलने वाले सामाजिक कल्याण और आर्थिक कल्याण के लिए चलने वाले योजनाओं का भविष्य निर्भर करता है, तो दूसरी ओर अगर समाज […]