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अग्निकांड की घटनाएं और बचाव

गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर और ग्रामीण इलाकों में अग्निकांड की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं। जरा सी चूक से आग भड़क सकती है। अगर, कुछ सावधानी बरती जाए तो अग्निकांड की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। 14 अप्रैल को अग्नि शमन सेवा स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता […]

बुद्धकालीन रामग्राम का कोलिय गणराज्य

गौतम बुद्ध के अवतरण के पहले का यह प्रसंग है। कोशल के सूर्यवंशी राजा प्रसेनजित या ओक्कका की बड़ी रानी की बड़ी पुत्री एवं शाक्यों की राजमाता पिया बहुत रुपवती थी। उसको बाद में कुष्ट रोग हो गया। उसके भाइयों ने कहा कि यदि राजमाता उन लोगों के साथ रहेगी तो उन लोगों को भी […]

आदर्श समाज ही अम्बेडकर व संघ का स्वप्न

संविधान सभा के सदस्य डा. अम्बेडकर अपने संघर्षपूर्ण जीवन में कोढ़ से लड़ते रहे। अस्पृश्यता के हरिजनोद्वार को भोगा तभी डटकर मुकाबला कर सका। गांधी के हरिजनोद्वार की मुहिम को कानूनी तौर पर संरक्षित करने के लिये उन्होंने ‘आरक्षण’ बिल बनाने में बड़ी भूमिका निभाई। शरीर के किसी अंग के कमजोर होने से सक्रियता में […]

जेएनयू में देशविरोधियों को लाल सलाम

Asst. Professor, The M S University of Baroda

सामाजिक समरसता से देश की एकजुटता संभव

सामाजिक समरसता को साकार कर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आर.एस.एस.) की शाखायें देश भर में फैली हैं। पूरे देश में व्याप्त अस्पृश्यता, जातिवाद और राजनीतिक प्रदूषण को कम करने कि देश को तोड़ने वाली शक्तियों को लगातार मुंह की खानी पड़ रही है। कभी जातिवाद के नाम पर तो कभी क्षेत्रवाद और धर्मांधता के नाम […]

निर्लज्ज राजनीति की देन है ‘राष्ट्रविरोधी जेएनयू’

राष्ट्रविरोधी नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया की जमानत याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई से पहले फरार अन्य आरोपियों की विश्वविद्यालय परिसर में वापसी एक बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा करती है। रात के अंधेरे में फिर कुछ भड़काऊ बातें कही गईं, पुलिस को जेएनयू कैंपस में घुसने […]

कपिलवस्तु की कहानी

बहुत समय पहले न पृथ्वी थी न सूर्य, चांद तारे थे। जीव केवल सूक्ष्म शरीरधारी थे। उनके शरीर स्थूल नहीं थे। वे सर्वत्र विचरण करने में समर्थ थे। कालान्तर में वे निर्मल आत्मायें पृथ्वी से उत्पन्न अन्न के वषीभूत हो गई और शनैः-शनैः पृथ्वी, सूर्य, चन्द्र और तारों से युक्त यह विश्व अस्तित्व में आया। […]

पुरस्कार लौटाने का सच -मानवीय संवेदना या साजिश

गत डेढ़-दो माह से साहित्य अकादमी को श्रृंखलाबद्ध पुरस्कार लौटाने की भेडियां धसान यह देश देख रहा है। अनेकों तर्क-कुतर्क देकर स्वयं को दूध धुला भी बता रहे है ये सब। प्रश्न उठता है कि शतरंज की बिसात पर एक विचारधारा विशेष से पोषित ये साहित्यकार क्या सच में मानवीय संवेदना के वशीभूत त्यागपत्र दे […]

भारत में अनादिकाल से है गणतंत्र की परंपरा

भारत मे अनादिकाल से ही गणतंत्र की परम्परा चली आ रही है। परमब्रह्म द्वारा सृष्टि की उत्पत्ति के तुरंत बाद ही त्रिदेवों का अस्तित्व इस परम्परा का बीज मंत्र रहा है। इन त्रिदेवों केा भगवान का दर्जा प्राप्त हुआ है। इनकी पूर्णता एवं सुगमता के लिए त्रिदेवियों को इनसे संयुक्त किया गया तथा अवसर एवं […]

न हो गौ-वध पर सियासत

गो-वध और गो-मांस की बिक्री पर जम्मू और कश्मीर तथा महाराष्ट्र में रोक के आदेश को भले ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती मिल रही हो, किन्तु यह सभी भारतवासी मानते हैं कि ‘‘आस्था’’ को किसी भी अदालत में भला ललकारा तो नहीं जा सकता। हजारों साल की सनातनी परंपरा को समाज ने पूरी तरह अंगीकार […]