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जलजला बन सकता है जल संकट

कुछ वर्ष पूर्व दिल्ली में भूमिगत मैट्रो के निर्माण के दौरान सूख चुके अनेक बावड़ी और तालाब मिले। लेकिन आज भी दिल्ली में झील, तालाब, कुएं व बावड़ी समेत एक हजार से अधिक ऐसे जलस्रोत हैं जो अवैध निर्माण और रखरखाव के अभाव के कारण बहुत खराब हालत में है।

जाने भी दो यारों पार्ट-2

भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार एक बहुचर्चित और बहुविवादित शब्द है। दूसरा शायद ही कोई ऐसा शब्द हो जिसकी इतनी मनमानी परिभाषाएं हों। लेकिन न जाने इस शब्द में ऐसा क्या जादू है कि दूसरों का छोटे से छोटे भ्रष्टाचार तो दिखता है लेकिन अपना बड़े से बड़ा भ्रष्टाचार भी ‘जनसेवा’ प्रतीत होता है।

दृष्टान्त तुलसी माता- अकबर-बीरबल

एक बार अकबर बीरबल हमेशा की तरह टहलने जा रहे थे! रास्ते में एक तुलसी का पौधा दिखा .. मंत्री बीरबल ने झुक कर प्रणाम किया ! अकबर ने पूछा कौन हे ये ? बीरबल — मेरी माता हे ! अकबर ने तुलसी के झाड़ को उखाड़ कर फेक दिया और बोला .. कितनी माता […]

मिजोरम में हिंदी शिक्षकों की दुर्दशा

पिछले दिनो पूर्वोत्तर के सीमान्त राज्य मिजोरम की राजधानी आईजोल के अपने एक सप्ताह के प्रवास के दौरान हमने अनुभव किया कि वह राज्य हिंदी से अछूता है। किसी भी व्यवसायिक स्थल को तो दूर सड़क पर लगे संकेत चिन्ह, नाम आदि भी घोषित त्रिभाषा फार्मुले को धता बता रहे थे। मिजोरम में दो केन्द्रीय […]

देश विदेश में नव वर्षोत्सव

सम्पूर्ण विश्व में नव वर्ष धूम धाम से मनाया जाता है। लोग एक दूसरे को बधाईयाँ देते है तथा भावी जीवन के प्रति मंगलकामनाएं प्रकट करते है।यह पर्व समस्त देशों में प्राय: अंग्रेजी कलैण्डर के अनुसार एक जनवरी को मनाया जाता है। सबसे पहले एक सौ तरेपन ईस्वी पूर्व यह वारव एक जनवरी को मनाया […]

स्वेदशी आंदोलन के प्रेणता बिपिन चंद्र पाल

स्वेदशी आंदोलन के प्रेणता सुविख्यात त्रिमूर्ति लाल-बाल-पाल के बिपिनचन्द्र पाल ;1858-1932द्ध ने अपने जीवन काल में अपने देशवादियों को सम्मोहित कर दिया था और निःसंदेह बंगाल-विभाजन के स्वदेशी आन्दोलन के वे जननायक थे। उनके समकालीन विद्वानों ने देशभक्ति की इस अभूतपूर्व लहर में महान योगदान के असंख्य प्रमाण दिये। स्वदेशी आन्दोलन के एक सक्रिय नेता […]

कर निर्धारण

कर निर्धारण सदा से ही शासन तंत्र के लिए बहुत जटिल विषय रहा है। इसका प्रमुख कारण है की एक ओर कर देश की राजस्व प्राप्ति का प्रमुख संसाधन है, जिसपर देश में चलने वाले सामाजिक कल्याण और आर्थिक कल्याण के लिए चलने वाले योजनाओं का भविष्य निर्भर करता है, तो दूसरी ओर अगर समाज […]

संस्कृत भाषा: विश्व की प्रथम अमरभाषा है

जिस प्रकार देवता अमर हैं उसी प्रकार सँस्कृत भाषा भी अपने विशाल-साहित्य, लोक हित की भावना ,विभिन्न प्रयासों तथा उपसर्गो के द्वारा नवीन-नवीन शब्दों के निर्माण की क्षमता आदि के द्वारा अमर है ।आधुनिक विद्वानों के अनुसार संस्कृत भाषा का अखंड प्रवाह पाँच सहस्र वर्षों से बहता चला आ रहा है। भारत में यह आर्यभाषा […]

बलूचिस्तान का हिंगलाज माता मंदिर

पौराणिक मान्यता:- भगवान शिव यज्ञ स्थल में आये तथा अपनी प्रिय पत्नी सती के शव को कंधे पर उठा, तांडव नृत्य करने लगे। (शिव का नटराज स्वरूप, तांडव नित्य का ही प्रतिक हैं।) शिव के क्रुद्ध हो तांडव नृत्य करने के परिणामस्वरूप, तीनो लोको में हाहाकार मच गया तथा तीनो लोगो का विध्वंस होने लगा। […]

तुलसी का पौराणिक व औषधि जनित महत्व

धार्मिक महत्व:- तुलसी के ऊपर एक पृथक पुराण लिखा जा सकता है, संक्षेप में तुलसी का धार्मिक सांस्कृतिक व औषधि जनित महत्व बताने की कोशिश कर रहा हूँ । विष्णु पुराण, ब्रह्म-पुराण, स्कन्द-पुराण, देवी भागवत पुराण के अनुसार तुलसी की उत्पति की अनेक कथाएँ हैं, पर एक कथा के अनुसार- समुन्द्र-मंथन करते समय जब अमृत […]