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राजा जी से कुछ तो सीखिये माल्याजी!

साभार:कार्टूनिस्ट आदरणीय माल्याजी, मुझे आपसे इतनी सहानुभूति Parajumper Svart है ,आपके प्रतिमन में इस कदर सम्मान है जितना उन बैंक अधिकारियों और नेताओं के मन में भी नहीं होगा जिनकी मिली भगत से आप बैंकों के नौ हजार करोड़ रुपये बिना डकारे ही हजम कर गए। लोग आपके बारे में चाहे जो कहें पर मैं […]

कब कैसा नववर्ष हमारा?

लेखक विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं

माँ के हाथ का स्वेटर

बहुत पीछे छूट गई वो सलाईयां स्वेटर बुनती मां की कलाईयां प्रेम की बुनावट के अनूठे डिजाइंन वात्सल्य में गुथे वे फंदे, उन फंदो में रंग थे, गरमाहट थी उन डिजाईनों में सजी थी अपने बेटे के लिए अनन्त दुआएं अपार खुशियां, संवेदनाएं अब बाजार है, स्वेटर है, पैसे भी हैं लेकिन नहीं है तो […]

व्यंग्य : जन सुनवाई में जीव-जन्तु

आज पहली बार गाँव में जीव-जन्तुओं की सुनवाई के लिये रात्रि चौपाल का विशेष आयोजन रखा गया है। समस्त क्षेत्रीय जीव-जन्तु पूरी तैयारी के साथ चौपाल पर आते हुये राजमार्गो पर दिखाई दे रहे है। सभी जीव-जन्तु अपने अपने समूह में चले आ रहे है। जीव-जन्तुओं में शाकाहारी, मांसाहारी, उड़ने वाले, रेंगने वाले तथा फुदकने […]

सहिष्णुता

सहिष्णुता यानी सहनशीलता या सहन करने की शक्ति जो प्रत्येक व्यक्ति, समाज या राष्ट्र अलग होती है और अलग अलग सन्दर्भों में अलग। सहिष्णुता का सम्बन्ध मानसिक, शारीरिक, आध्यात्मिक, राजनैतिक अथवा जातिवादी सन्दर्भों में भी लिया जा सकता है। यूँ तो सनातन संस्कृति तथा भारत सदैव ही सहिष्णु रहे हैं परन्तु वर्तमान संदर्भों में सहिष्णुता […]

समकालीन दोहे

1. सत्ता की सबको गरज, सबको है दरकार। शायर से अखबार तक, खड़े मिले दरबार।। 2. बात-बात में हो गई, उनकी भी पहचान। खादी के नीचे दिखा, रेशम का बनियान।। 3. दस्तक दंेगे द्वार पर, खुशियों के प्रस्ताव। बाबू जी सीख का, घर में अगर प्रभाव।। 4. सपनों के प्रस्ताव पर, छोड़ा बेशक गाँव। मात-पिता […]

एक दिया शुभ संकल्प का भी

संपादक: राष्ट्र किंकर

शरणार्थी की पात्रता

उस पांच सितारा ऑडिटोरियम के बाहर प्रोफेसर साहब की आलीशान कार आकर रुकी , प्रोफेसर बैठने को हुए ही थे कि एक सभ्य सा युगल याचक दृष्टि से उन्हें देखता हुआ पास आया और बोला ,” साहब , यहां से मुख्य सड़क तक कोई साधन उपलब्ध नही है , मेहरबानी करके वहां तक लिफ्ट दे […]

धारा 370 एवं 35A ने अलगाव वाद को बढ़ावा दिया है।-पार्ट -1

कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है भारतवासी अपने इस भूभाग के लिए बहुत सम्वेदनशील शील है। कश्मीर का बहुत बड़ा बजट है। कश्मीर की रक्षा और पाक समर्थित आतंकवादियों से बचाने के लिए के लिये लगातार बलिदान दिये हैं। अक्सर सुरक्षा बल के शहीद जवानों के शव तिरंगे से लिपट कर आते हैं। 14 मई […]

जंगल की जड़ें शहरों में पनपती हें पार्ट -1 ( नक्सल वाद )

सत्तर के दशक में कालेज की दीवारों पर अनेक नारे छात्रों के लिए गढ़ कर लिखे गये थे। जैसे ‘सत्ता का जन्म बंदूक गोली से होता है’ किशोरावस्था से जवानी में पदार्पण करते आयु के जवान बहुत संवेदन शील तथा उनमें कुछ कर गुजरने की भावना होती है। छात्रों के बीच बहस होने लगी चीन […]