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समकालीन दोहे

1. सत्ता की सबको गरज, सबको है दरकार। शायर से अखबार तक, खड़े मिले दरबार।। 2. बात-बात में हो गई, उनकी भी पहचान। खादी के नीचे दिखा, रेशम का बनियान।। 3. दस्तक दंेगे द्वार पर, खुशियों के प्रस्ताव। बाबू जी सीख का, घर में अगर प्रभाव।। 4. सपनों के प्रस्ताव पर, छोड़ा बेशक गाँव। मात-पिता […]

एक दिया शुभ संकल्प का भी

संपादक: राष्ट्र किंकर

शरणार्थी की पात्रता

उस पांच सितारा ऑडिटोरियम के बाहर प्रोफेसर साहब की आलीशान कार आकर रुकी , प्रोफेसर बैठने को हुए ही थे कि एक सभ्य सा युगल याचक दृष्टि से उन्हें देखता हुआ पास आया और बोला ,” साहब , यहां से मुख्य सड़क तक कोई साधन उपलब्ध नही है , मेहरबानी करके वहां तक लिफ्ट दे […]

धारा 370 एवं 35A ने अलगाव वाद को बढ़ावा दिया है।-पार्ट -1

कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है भारतवासी अपने इस भूभाग के लिए बहुत सम्वेदनशील शील है। कश्मीर का बहुत बड़ा बजट है। कश्मीर की रक्षा और पाक समर्थित आतंकवादियों से बचाने के लिए के लिये लगातार बलिदान दिये हैं। अक्सर सुरक्षा बल के शहीद जवानों के शव तिरंगे से लिपट कर आते हैं। 14 मई […]

जंगल की जड़ें शहरों में पनपती हें पार्ट -1 ( नक्सल वाद )

सत्तर के दशक में कालेज की दीवारों पर अनेक नारे छात्रों के लिए गढ़ कर लिखे गये थे। जैसे ‘सत्ता का जन्म बंदूक गोली से होता है’ किशोरावस्था से जवानी में पदार्पण करते आयु के जवान बहुत संवेदन शील तथा उनमें कुछ कर गुजरने की भावना होती है। छात्रों के बीच बहस होने लगी चीन […]

जीतने को आतंकवाद से जंग, अब तो बदलो रंग-ढ़ंग

‘अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला। अनेक जाने गई, अनेक घायल।’ इसने-उसने-सबने इस घटना की कड़ी निंदा की। सरकार ने कड़ी कार्यवाही की चेतावनी दी। अनेक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन। विरोधियों ने सरकार को कोसा। उपरोक्त में कुछ भी नया नहीं है। नई है तो तारीख। दरअसल पिछले अनेक दशकों से यही दृश्य, यही समाचार बार-बार […]

उपभोगवाद से बढ़ रही शोषण की प्रवृति

उपभोग में निहित शोषण की प्रवृति से भारत सहित सभी विकासशील देश जूझ रहे हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियों का शिंकजा उपभोक्ताओं के जरिए देशों की सीमाऐं तोड़ता हुआ उनकी सरकारों को जकड़ता जा रहा है। अगर उपभोग पड़ोसी से होड़ के कारण हो तो वह वास्तव में देशानुकूल नहीं है। जरूरतों की सीमा कौन तय करे। […]

अरब इजरायल संघर्ष , भारत, इजरायल सम्बन्ध पार्ट-2

यहूदी कौम बहुत मेहनती और तरक्की पसंद है| दो ह्जार वर्ष पूर्व इन्हें अपनी मातृभूमि फिलिस्तीन से निष्कासित होना पड़ा था| एक किवदन्ती है यहूदी कम्यूनिटी एशो आराम में इतने मस्त थे इन्हें अभिशाप के कारण अपनी जगह से पलायन करना पड़ा था |भारत में भी यहूदी आकर बसे और यहीं के हो कर रह […]

वामपंथी सोच !

धर्म और जाति के नाम पर देश को बांटे रखने वाले वामपंथी भाषा के आधार पर उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीयों को बांटना चाहते है। हाल ही में बंगलोर मेट्रो के साइन बोर्ड में कन्नड़ और अंग्रेजी के साथ ही हिंदी में भी लिखा गया है ,जिसका वामपंथी बिरादरी जमकर विरोध कर रही है। ये […]

गाय प्रोटीन ?

हिन्दुस्तान में बहुत से लोग गाय मांस को प्रोटीन कह रहे हैं , उनके लिये ये जवाब है ।एक बहुत ही ताकतवर सम्राट थे, उनकी बेटी इतनी सुंदर थी, कि देवता भी सोचते थे कि यदि इससे विवाह हो जाये तो उनका जीवन धन्य हो जाये । इस कन्या की सुंदरता की चर्चा सारी त्रिलोकी […]