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जंगल की जड़ें शहरों में पनपती हें पार्ट -1 ( नक्सल वाद )

सत्तर के दशक में कालेज की दीवारों पर अनेक नारे छात्रों के लिए गढ़ कर लिखे गये थे। जैसे ‘सत्ता का जन्म बंदूक गोली से होता है’ किशोरावस्था से जवानी में पदार्पण करते आयु के जवान बहुत संवेदन शील तथा उनमें कुछ कर गुजरने की भावना होती है। छात्रों के बीच बहस होने लगी चीन […]

जीतने को आतंकवाद से जंग, अब तो बदलो रंग-ढ़ंग

‘अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला। अनेक जाने गई, अनेक घायल।’ इसने-उसने-सबने इस घटना की कड़ी निंदा की। सरकार ने कड़ी कार्यवाही की चेतावनी दी। अनेक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन। विरोधियों ने सरकार को कोसा। उपरोक्त में कुछ भी नया नहीं है। नई है तो तारीख। दरअसल पिछले अनेक दशकों से यही दृश्य, यही समाचार बार-बार […]

उपभोगवाद से बढ़ रही शोषण की प्रवृति

उपभोग में निहित शोषण की प्रवृति से भारत सहित सभी विकासशील देश जूझ रहे हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियों का शिंकजा उपभोक्ताओं के जरिए देशों की सीमाऐं तोड़ता हुआ उनकी सरकारों को जकड़ता जा रहा है। अगर उपभोग पड़ोसी से होड़ के कारण हो तो वह वास्तव में देशानुकूल नहीं है। जरूरतों की सीमा कौन तय करे। […]

अरब इजरायल संघर्ष , भारत, इजरायल सम्बन्ध पार्ट-2

यहूदी कौम बहुत मेहनती और तरक्की पसंद है| दो ह्जार वर्ष पूर्व इन्हें अपनी मातृभूमि फिलिस्तीन से निष्कासित होना पड़ा था| एक किवदन्ती है यहूदी कम्यूनिटी एशो आराम में इतने मस्त थे इन्हें अभिशाप के कारण अपनी जगह से पलायन करना पड़ा था |भारत में भी यहूदी आकर बसे और यहीं के हो कर रह […]

वामपंथी सोच !

धर्म और जाति के नाम पर देश को बांटे रखने वाले वामपंथी भाषा के आधार पर उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीयों को बांटना चाहते है। हाल ही में बंगलोर मेट्रो के साइन बोर्ड में कन्नड़ और अंग्रेजी के साथ ही हिंदी में भी लिखा गया है ,जिसका वामपंथी बिरादरी जमकर विरोध कर रही है। ये […]

गाय प्रोटीन ?

हिन्दुस्तान में बहुत से लोग गाय मांस को प्रोटीन कह रहे हैं , उनके लिये ये जवाब है ।एक बहुत ही ताकतवर सम्राट थे, उनकी बेटी इतनी सुंदर थी, कि देवता भी सोचते थे कि यदि इससे विवाह हो जाये तो उनका जीवन धन्य हो जाये । इस कन्या की सुंदरता की चर्चा सारी त्रिलोकी […]

सुशासन या शासन के 3 वर्ष

वरिष्ठ अधिवक्ता

फन फैलाते आतंकवाद के प्रति ‘जीरो’ टॉलरेन्स

दुखद आश्चर्य यह है कि ब्रिटेन सहित पूरा पश्चिम आतंकवाद पर अस्पष्ट रवैया अपना रहा है। सस्ती मजदूरी के लालच में यूरोप ने अपने नियम कानूनों को लचीला बनाया तो दूसरी ओर गृहयुद्ध के शिकार अनेक देशों के शरणार्थियों के लिए अपने द्वार खोले।

जलदान

पिता की अनुमति मिली तो पुत्र ने भावी ससुराल में ‘हामी’ पहुँचा दी। वर की घरु स्थिति से परिचित वधूपक्ष ने कोई रीति रस्म से अपेक्षा न करते हुए स्वयं ही सारे रिवाज सम्पूर्ण किये। शिव-पार्वती के समक्ष सम्पन्न हुए विवाह पश्चात् विदाई हुई।

जलजला बन सकता है जल संकट

कुछ वर्ष पूर्व दिल्ली में भूमिगत मैट्रो के निर्माण के दौरान सूख चुके अनेक बावड़ी और तालाब मिले। लेकिन आज भी दिल्ली में झील, तालाब, कुएं व बावड़ी समेत एक हजार से अधिक ऐसे जलस्रोत हैं जो अवैध निर्माण और रखरखाव के अभाव के कारण बहुत खराब हालत में है।