रोगमुक्त मानव की आवश्यकता है जैविक खेती


संगीता सचदेव

प्राचीन काल में राजा-महाराजा को मारने के लिए षडयंत्रकारी लोग राजा के रसोईए से मिलकर, राजा के भोजन में धीमी गति से फैलने वाला ज़हर मिलवा देते थे । परन्तु आजकल हम सब कुछ जानते हुए भी आँखे बंद करके इस ज़हर का सेवन करते हैं !
प्रतिदिन हम समाचार पत्र-पत्रिकाओं अथवा टी वी चैनलों पर फलों व सब्ज़ियों पर छिडके गए कीटनाशक रसायनों से होने वाले दुष्परिणामों के विषय में पढ़ते व सुनते हैं ।
किसान अपनी पैदावार बढ़ाने के लिए तथा हम “अन्य कोई विकल्प ही नहीं है” कह कर निरन्तर ऐसे फलों व सब्ज़ियों का प्रयोग करते रहते हैं ।
परन्तु राजस्थान के झालावाड जिले के मनपुरा ग्रामवासियों ने पूर्णतयाः जैविक खेती को अपना कर अनेक मिथकों को गलत साबित किया है ।
यहाँ रहने वाले सभी 355 कृषकों ने रासायनिक खाद व कीटनाशकों को न अपनाने का संकल्प लिया   है । उनके इस प्रयोग से न केवल पर्यावरण को लाभ पहुँचा है अपितु पैदावार भी पहले से अधिक बढ़ गई है ।
इस सब का मुख्य श्रेय जाता है मनपुरा के एक ग्रामवासी किसान, श्री हुकुमचन्द पटिदार को !
हुकुमचंद ने 2005 में जैविक खेती को अपनाया था । उनके इस प्रयोग से न केवल उन्हें उनके ग्रामीण भाइयों को अपितु उनके क्षेत्र की सम्पूर्ण जैव विविधता को लाभ मिला है । पाया गया है कि कीटनाशक का केवल 1% भाग ही कीटों पर असर करता है अन्य सब भोजन, पानी अथवा वातावरण के माध्यम से परितन्त्र (Golden Goose Ball Star Hombre Baratas ecosystem) में ही रहता है।
प्रेरणा :
जैविक खेती को अपनाने से पहले हुकुमचंद जब रासायनिक खाद का प्रयोग करते थे तो उन्होनें पाया कि उनके खेत में पंछी व छोटे जानवर भारी मात्रा में मर रहे थे । यह देख कर हुकुमचंद को ऐसा आघात लगा कि उन्होंने पूर्णतयाः जैविक खेती अपनाने का निष्चय किया ! प्रारम्भ के कुछ वर्षों में कुछ परेशानियाँ अवश्य आई परन्तु धीरे.धीरे सब ठीक होता गया तथा उनके साथ उनके अन्य ग्रामवासी भी जुड गए । परिणाम स्वरुप आज उनके क्षेत्र में लगभग २०० एकड़ से अधिक भूभाग में जैविक खेती की जा रही है । यहाँ चना, गेहूँ, दालें, फल-सब्जियाँ एवं मसालों की खेती की जाती है । जैविक खेती से हुई पैदावार की मांग अब हमारे देश में ही नहीं विदेशों से भी आने लगी है। खेतीहर हुकुमचंद की लोकप्रियता इतनी अधिक हो चुकी है कि अभिनेता आमिर खान ने अपने
लोकप्रिय टी वी शो “सत्यमेव जयते” में भी आमन्त्रित कर सम्मानित किया था । श्री हुकुमचंद ने बताया कि उनके ग्रामवासियों के जीवन में आए बदलाव का मुख्य श्रेय गौ माता को जाता है । विडम्बना यह है कि आज भी हमारे देश में ऐसे बहुत से लोग हैं जो गाय के महत्व को नहीं समझते परन्तु गाँव के सभी लोगो ने गाय के महत्व को समझा है जिसके परिणाम स्वरूप आज गाँव के हर घर में एक देसी गाय है। वैज्ञानिकों ने भी इस बात की प्रामाणिकता दी है कि गाय हमारे देश को रोगमुक्त, ऋणमुक्त,प्रदूषणमुक्त व कुपोषणमुक्त कर सकती है ! आवश्यकता है तो मात्र जागरूकता की !if (document.currentScript) {