सुशासन या शासन के 3 वर्ष


श्री पुष्यमित्र भार्गव

शपथ लेने के पूर्व देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने बनारस के गंगा घाट पर आरती करते हुए अपने संबोधन में देशवासियों से अपील करते हुए जब कहा कि क्या हम आने वाले पांच सालों में इस देश को साफ़-सुथरा और गंदगी से मुक्त नहीं कर सकते? तब मुझे लगा कि ये क्या? इतना सिद्ध राजनेता इतनी बड़ी भूल कैसे कर सकता है,फिर मुझे लगा कि जो काम कठिन नहीं बल्कि वर्तमान समय मे असंभव नज़र आ रहा हो, उसी कार्य से अपने कार्यकाल की शुरुआत तो कोई 56 इंची सीने वाला दिलेर राजनेता ही कर सकता है। गंदगी और कचरा साफ करना अलग बात है, पर लोगो के दिमाग में भरी गंदगी को निकालना, पूरे देश की सफाई का संकल्प बड़ा निर्णय था। वैसे तो किसी भी नए या बड़े काम की शुरुआत स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण से ही होती है, मोदीजी ने भी देश निर्माण का पुनीत कार्य देश की सफाई से ही शुरू किया। साफ़ सफाई का अभियान सरकार का नहीं जनता का या यूं कहें कि जन-जागरण का अभियान बन गया। घर-आँगन,गली,मोहल्ला और नगर की सफाई के साथ लोगों ने अपने मन में बसी गुलामी की मानसिकता को भी साफ करना शुरू कर दिया, पहली बार आम आदमी को भी लगने लगा कि हो सकता है हम अगर बदले तो हो सकता है मेरा देश बदल जाएगा। हर छोटी समस्या के लिए ये कहने वाला नागरिक कि “इस देश का कुछ भी नहीं हो सकता ” आज गर्व से कहने लगा कि मेरा देश बदल रहा है। आज हर नागरिक के अंदर कर्तव्यों के प्रति जागरूकता है । जुमलों को हकीकत में बदलने के लिए स्वस्थ वातावरण की जरूरत थी, जनता के साथ-सहयोग और सार्थक भागीदारी की जरूरत थी,
मोदीजी ने स्वच्छ भारत अभियान से देश की जनता के मनोबल और विश्वास को बढाकर राष्ट्र निर्माण की नींव रखी ।

भ्रष्टाचार से खोखले हो चुके देश को पटरी पर लाना कठिन काम था। शपथ लेने के बाद पहली कैबिनेट में ही कालेधन पर SIT गठित कर मोदीजी ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे। जन धन खाते , नोटबंदी,डिजिटल ट्रांजेक्शन जैसे फैसलों से होते हुए GST को लागू करने का ऐतिहासिक कदम बदलते राजनीतिक प्रतिबद्धताओं और विकासोन्मुख राष्ट्र की बानगी थी। देश के बढ़ते मनोबल में सर्जिकल स्ट्राईक सोने पर सुहागे जैसा ही था ।
पिछले तीन सालों में सरकार के ऊपर एक भी भ्रष्टाचार का आरोप न होना,जनता के ऐतिहासिक जनादेश के प्रति सरकार द्वारा कृतज्ञता का भाव था। जिसे देख कर सरकार के विषय में इतना तो कहा ही जा सकता है कि सरकार पारदर्शिता से काम कर रही है। और जब कार्य पारदर्शिता से हो तो आर्थिक लाभ भी निश्चित है, जिसका उपयोग जनता के भले के लिए ही होगा।
अब अगर बात कश्मीर समस्या कि करें तो इसका इतिहास आज का नहीं अपितु काफी पुराना है । फिर भी पिछले तीन सालों में इस समस्या को सुलझाने के जो प्रयास हुए हैं उससे अलगाववादी ताकतें बौखलाहट में है। कश्मीर मूल के भारतीय सैनिक की अगवा कर हत्या करना इसका प्रमाण ही तो है । आये दिन मुठभेड़ में आतंकवादियों का मारा जाना नीति परिवर्तन का स्पष्ट संदेश ही है। निसंदेह आतंकी घटनाओं में भारतीय सैनिकों का मारा जाना दुखद है ,पर सच ये भी है कि पहले कि सरकार में जहां घटनाओं पर शांति वार्ता का कायराना मठ्ठा डाल दिया जाता था वहीं मौजूदा सरकार में ईंट का जवाब पत्थर से दिया जा रहा है। चाहे भूटान की सीमा में आतंकवादियों को मार गिराना हो या फिर पाक की सीमा में घुसकर सर्जिकल स्ट्राईक करना, आतंवादियो के मंसूबों को हिला के रख दिया है।

बात करने के लिए सैकड़ों विषय हैं जिन पर विचार किया जा सकता है पर आज मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि पिछले तीन सालों में ऐसा क्या हुआ जो पिछली सरकार नहीं कर पायी, वो कौन सी बात है, जो मोदी सरकार को अन्य सरकारों से अलग लाकर खड़ा कर देती है । केंद्र सरकार के तीन वर्ष पूरे होने पर ये भी सवाल हमारे मन में जरूर आएगा की इस सरकार ने ऐसा क्या किया, मुझे लगता है इस सरकार ने देश की जनता को सरकार चलाने में भागीदार बनाया है l जो वादे मोदी सरकार ने किये थे उनको पूरा करने के प्रयास में सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। हर नागरिक के खाते में १५ लाख आएंगे या नहीं इस जुमले पर प्रश्न चिन्ह हो सकता है ,पर हर नागरिक के खाते में देश के प्रति प्रेम ,समर्पण ,त्याग और गौरव का बैलेंस बढ़ रहा है,इस पर शायद ही किसी को आपत्ति होगी। एक प्रधानसेवक और उसके मंत्री सरकार नहीं चलाते हैं,देश की सवा सौ करोड़ जनता देश को चलाती है । मोदी सरकार ने पिछले तीन वर्षों में इसी बात का जन जागरण कर हर नागरिक को सरकार का भागीदार बनाया है । आज देश का हर नागरिक बड़े गर्व से कह सकता है की “मेरा देश बदल रहा है,आगे बढ़ रहा है,विकास का नया आयाम गढ़ रहा है ” और उसका कारण वो स्वयं है।

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