व्यंग्य : जन सुनवाई में जीव-जन्तु


श्री शंकर लाल महेश्वरी

walgreens price for prilosec Order Buy online online Purchase Order आज पहली बार गाँव में जीव-जन्तुओं की सुनवाई के लिये रात्रि चौपाल का विशेष आयोजन रखा गया है। समस्त क्षेत्रीय जीव-जन्तु पूरी तैयारी के साथ चौपाल पर आते हुये राजमार्गो पर दिखाई दे रहे है। सभी जीव-जन्तु अपने अपने समूह में चले आ रहे है। जीव-जन्तुओं में शाकाहारी, मांसाहारी, उड़ने वाले, रेंगने वाले तथा फुदकने वाले प्रजातियों के जीव प्रस्तुत हो रहे है। गाँव में अजीब चहल-पहल है। जन्तुओं के स्वागत सत्कार के लिये गली मोहल्लों को सजाया गया है। घरों में साफ-सफाई, घरों के बाहर रंगोली, तोरण द्वार तथा रंग-बिरंगी वन्दनवारों से सजावट दिखाई दे रही है। दीवारों को विकास सम्बन्धी पोस्टरों से सजाया गया है जिन पर स्वच्छ भारत मिषन, बेटी बचाओ-बेटी बढ़ाओ आदि नारे अंकित है। समूचा गाँव रोशनी से जगमगा रहा है। चैपाल को जीव जन्तुओं की विषेष कलाकृतियों से सजाया गया है। जो दूधिया रोशनी में नहाती हुई दिखाई दे रही है। सभा स्थल रंग बिरंगी रोशनी से दर्शकों को आकर्षित कर रहा है।
इस आयोजन की विशेषता यह भी है कि स्थानीय पशु समाज ने विशेष तैयारी के साथ आगन्तुक जीव-जन्तुओं का स्वागत करने की व्यवस्था की है। जन्तुओं के गाँव में प्रवेश करते ही पशु प्राणियों ने रोली, तिलक तथा मालायें पहनाकर सम्मान किया। मुख्य द्वार पर शहनाई वादन के साथ भारतीय परम्पराओं के अनुसार उनकी अगवानी करते हुये नाच-गान के साथ उन्हें सभा स्थल तक पहुँचाया गया। ग्रामवासियों में विषेश हर्ष व उल्लास था। भारी संख्या में पशु वर्ग के साथ ही जन समुदाय भी रात्रि चौपाल पर सुनवाई कार्यक्रम को देखने हेतु उमड़ पड़े। सभा स्थल का दृश्य किसी कुम्भ से कम नहीं था।
पंचायत भवन के विशाल प्रांगण में आज का यह अनूठा कार्यक्रम था। सभी जीव-जन्तु अपने अपने बिरादरी के समूह में चौपाल पर उपस्थित हुये। चौपाल पर मंच के दाँयी और स्थानीय अधिकारी तथा मुख्य मंच पर क्षेत्रीय विधायक महोदय के साथ जिलाधीश महोदय आसीन थे। मंच के बाँयी ओर हरे रंग की गद्दीदार कुर्सियों पर जिले के जिलाधिकारी गण बिराजमान है। प्रत्येक वर्ग के जन्तुओं के प्रमुख प्रतिनिधियों के लिये मंच के निकट बैठक व्यवस्था है जिसमें हाथी, शेर, लोमड़ी, मगरमच्छ, मोर, खरगोश, बगुला, मछली, अजगर और तोता तथा कुछआ प्रमुख थे। जन्तु वर्ग की सार सम्हाल तथा उन्हे किसी भी प्रकार की असुविधा न हो इसलिये स्थानीय पशु प्राणियों ने अपनी ओर से ऊँट को अपने वर्ग का नेतृत्व करने हेतु विशेष अनुमति से चौपाल पर प्रस्तुत किया।
जन सुनवाई का कार्यक्रम प्रारम्भ होने की उद्घोषणा हुई। स्वागत गीत के बाद जिलाधीश महोदय ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। ‘‘मेरे क्षेत्र के समस्त जीव-जन्तु महानुभाव ! आज बड़ी प्रसन्नता है कि सभी वर्ग के जीव-जन्तु यहाँ उपस्थित है। मैं प्रशासन की ओर से आप सभी का हार्दिक स्वागत करता हूँ और यह विश्वास दिलाता हूँ कि आपकी जो भी समस्यायें है उनका यथासम्भव समाधान किया जायेगा। श्रीमान् विधायक महोदय के साथ ही सभी अधिकारी बन्धुओं से भी आग्रह है कि हमारे ही इन अन्तरंग मूक प्राणियों की गम्भीरता पूर्वक सुनवाई करते हुये इनकी मांगों को तत्परता के साथ पूरी करने में सहयोग करावे। विधायक महोदय ने भी खड़े होकर सभी का हाथ जोड़कर सम्मान किया। जन्तु वर्ग के प्रमुख प्रतिनिधि हाथी ने विधायक महोदय और जिलाधीश महोदय का आभार स्वीकारते हुये खड़े होकर कहा-
‘‘मान्यवर ! हम समस्त प्राणियों के लिये पेड़ ही जीवन के आधार है। हमारा भोजन, आवास, उपचार, छाया तथा समस्त प्रकार की सुविधायें इन्ही पेड़ों से उपलब्ध होती है। आप पेड़ों की अन्धाधुन्ध कटाई हो रही है। जंगल सूने हो गये। सारे जंगल नष्ट कर दिये गये। ऐसी स्थिति में हमारा जीना मुश्किल हो गया है। हमारे तो आशियाने ही नष्ट कर दिये गये है। ऐसी हालत में हमारा जीना दुष्कर हो गया है। कृपया इस पर गम्भीरता पूर्वक विचार करते हुये उचित समाधान प्रस्तुत करावे। इस समस्या के लिये विशेष रूप से वन विभाग उत्तरदायी है।
इस समस्या के समाधान हेतु वन विभाग के अधिकारी ने मंच पर प्रस्तुत होकर कहा-‘‘यह सही है कि सड़कों के चौड़ाईकरण तथा नई सड़कों के निर्माण और कल-कारखानों की बढ़ती संख्या के कारण पेड़ों की अन्धाधुन्ध कटाई होती है। नई काॅलोनियों की बसावट के कारण भी भारी मात्रा में पेड़ काटे जाते है। इससे न केवल जीव-जन्तु वर्ग को ही नुकसान उठाना पड़ता है अपितु मानव समुदाय भी प्रदूषण से पीड़ित होकर रोगग्रस्त होता जा रहा है। इसके लिये वन विभाग व पर्यावरण विभाग ने व्यवस्था की है कि-
ऽ हरे पेड़ों की कटाई पर पूरा प्रतिबन्ध है। विशेष दशा में अनुमति प्राप्त करके ही पेड़ काटे जाने का प्रावधान है।
ऽ उद्योगपतियों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिये पाबन्द किया गया है।
ऽ बड़े और छायादार पेड़ों को जड़ सहित उखाड़कर अन्यत्र उपयुक्त स्थान पर रोपित करने का भी प्रयास प्रारम्भ हुआ है।
ऽ सार्वजनिक सेवा संस्थाओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संगठनो तथा सरकारी इकाईयों द्वारा भी वृक्षारोपण अभियान चलाया जाता है।
ऽ विषेष उत्सवों,पर्वों जन्मदिवसों के अवसर पर नागरिकों को वृक्षारोपण हेतु प्रेरित किया जाता है।
ऽ विभाग द्वारा भी अधिकाधिक पेड़ लगाने के लिये तथा उन्हें सुरक्षित पनपाने के लिये योजनाबद्ध प्रयास किये जा रहे है।
हमें विश्वास है कि शीघ्र ही इस समस्या का समाधान अवश्य होगा।
तभी सभा स्थल पर उपस्थित बन्दरों में से एक ने कहा कि ध्यान रहे हमें पेड़ों का आश्रय नहीं मिला तो बस्ती में हमारी आवाजाही बढ़ जायेगी इसलिये जंगलों को समुचित योजनानुसार बढ़ाना आवश्यक है। तभी शेर ने अपनी बात रखते हुये स्पष्ट किया-
महोदय, प्राणी मात्र के लिये पानी अनिवार्य आवश्यकता है। हम विषेषतः नदी, नाले, नहरे तथा सूने जलाशयों का पानी पीने के काम में लेते है। वह पानी इतना गन्दा और दूषित हो गया है कि उसे पीकर आये दिन भयंकर बीमारियाँ हमारा पीछा नहीं छोड़ती है। यदि समय रहते पानी को प्रदूषित होने से नहीं बचाया गया तो हम जीवधारियों की समस्त प्रजातियाँ पृथ्वी से लुप्त हो जायेगी। कृपा कर हमें आश्वस्त करे कि इस सम्बन्ध में आपका क्या प्रयास रहेगा। इस कार्य में पर्यावरण विभाग ही विशेष रूप से सहयोगी हो सकता है। जिलाधीश महोदय ने पर्यावरण विभाग के अधिकारी को संकेत करते हुये प्रत्युत्तर के लिये कहा तो वे कहने लगे-
वस्तुतः शेर महोदय का कथन सही है। वर्तमान में कल-कारखानों की संख्या निरन्तर बढ़ती जा रही है। इनसे निकलने वाला प्रदुषित पानी नदी-नालों में बहा दिया जाता है। इससे पानी दूषित, विषैला और बदबूदार हो जाता है जो पीने योग्य नहीं रहता। पीने पर कई तरह की पेट की बीमारियाँ हो जाती है। तीर्थ स्थानों, मन्दिरों तथा धार्मिक आस्था के केन्द्रों से भी बासी प्रसाद, फूल-पत्तियाँ, मालायें, दूषित भोज्य पदार्थ तथा प्लास्टिक के थैलियां आदि नदियों में बहा दी जाती है। इससे पानी दूषित, मटमेला और दुर्गन्ध युक्त हो जाता है। अभी माँ गंगा की साफ-सफाई का कार्यक्रम इसी समस्या के समाधान हेतु किया जा रहा है।
इस कथन पर जल की रानी मछली ने सुझाव दिया कि यह समस्या तब तक नहीं सुलझेगी जब तक हमारे देशवासी जागरूक नहीं होंगे। वे लोग ऐसा प्रयास क्यों नहीं कर सकते कि उनके किसी भी उपयोग से पानी दूषित नहीं हो। शहर की गन्दी नालियों का पानी, गटर का पानी, कूड़ा-कचरा, मृत पशु तथा मल-मूत्र आदि प्रवाहित होता रहा तो वही होगा-‘‘ज्यों ज्यों दवा की गई, मर्ज बढ़ता ही गया।’’ वाली स्थिति होगी। आवश्यकता तो जनचेतना की है। इस दिशा में प्रयास किया जाना अनिवार्य है। तभी लोमड़ी बहिन खड़ी हो गई और कहने लगी-
‘‘पेड़ लगाने तथा पानी को प्रदुषण से सुरक्षित बनाने के लिये सरकार का इस वर्ष कितना बजट निर्धारित है।’’ तभी जिलाधीश महोदय खड़े हुये और कहा कि-‘‘इस कार्य के लिये पाँच लाख रूपया आवंटित हुआ है। तभी मगरमच्छ ने हुँकार भरते हुये कहा- सर ! ‘‘यह तो ऊँट के मुँह में जीरा मात्र है। यह सुनते ही समस्त जीवों के कान खड़े हो गये और ऊँट महाशय की ओर मुखातिब हो गये। तभी कोयल ने अपना हाथ खड़ा कर अपना वक्तव्य प्रस्तुत करने की अनुमति प्राप्त की और कहने लगी-
‘‘महाशय ! जैसे-जैसे जनसंख्या में वृद्धि होती जा रही है। औद्योगिकीकरण का विस्तार हो रहा है। आवागमन के साधनों में अवांछनीय वृद्धि हो रही हैं। इनसे निकलने वाली विषैली गेस और धुँये के कारण पर्यावरण प्रदुषित होता जा रहा है। श्वांस लेना भी दूभर हो गया हैं। आये दिन श्वांस की बीमारी से जन्तु मर रहे है। हमें उड़ने, चलने और रेंगने तथा फुदकने में कमजोरी महसूस होती है। इस बात का समर्थन करते हुये तोता बोल उठा-
मान्यवर ! वायु प्रदूषण से हमारी स्थिति बड़ी विकृत हो गई है। ‘‘साँप छछूंदर की सी’’ स्थिति बन गई है। हम न मर सकते है और न जी सकते है। श्रीमन् निवेदन यह है कि यातायात के साधनों को कम करना, खुले में शोच पर नियन्त्रण, कचरा खुले में न रहे इसके साथ ही ध्वनि प्रदुषण को भी रोकने का प्रयास किया जाये। कारखानों की चिमनियाँ, वाहनों के हाॅर्न तथा ध्वनि विस्तारक यन्त्रों को प्रतिबन्धित किया जाये। कौआ अपने आप को नहीं रोक सका और सभी जीव-जन्तुओं की ओर मुखातिब होकर कहने लगा- मित्रों ! कहीं ऐसा ना हो जाये कि हम मूक प्राणियों को ‘‘घर की मुर्गी दाल बराबर’’ समझते हुये प्रशासन केवल कागजी घोड़े ही दौड़ाता रहे। मेंढक ने बीच ही में मजाकिया मूड में बोल दिया भाइयो! तब तो ऐसा ही होगा। ‘‘हमने भेंस के आगे बीन बजाई।’’ सभी सभासद ठहाका लगाकर हँस पड़े। इतने में अजगर भी क्यों चुप रहने लगा। वह कहने लगा- अब तक तो लोग हमें सुना-अनसुना कर देंगे तो समस्या ज्यों की त्यों बनी रहेगी। तभी गीदड़ ने अपना मुँह खोला, कहने लगा-
भाइयों ! पहले तो आप सभी ‘‘भीगी बिल्ली बन कर रहते थे।’’ आज समय बदल गया है। सभी को अपनी समस्या रखने का अधिकार है। यह भी सही है कि जन प्रतिनिधि आश्वासन देते रहे और अधिकारी काम को आगे सरकाते रहे, काम कुछ भी नहीं हुआ, जो थोड़ा हुआ भी वह ‘‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’’ की कहावत को चरितार्थ करने जैसा था। हुआ यह कि एक ‘‘सांपनाथ तो दूसरा नागनाथ’’ जैसी स्थितियाँ थी। इससे समस्या विकराल होने लगी। चतुर बगुला भी पीछे क्यों रहने लगा। लगते हाथ चुटकी लेते हुये बोल ही दिया- जनप्रतिनिधि भी ‘‘गिरगिट की तरह रंग बदलते है।’’ अब लगता है ऐसा नहीं होगा।
मुर्गी भी चुप रहने वाली नहीं थी। बोली- मै अनपढ़ अवश्य हूँ। मेरे लिये तो यह सब लिखा पढ़ी ‘‘काला अक्षर भेंस बराबर है।’’ किन्तु अनुभव से कहती हूँ कि ‘‘जो बीत गई सो बात गई।’’ अब ‘‘सांप निकल जाने पर लकड़ी पीटने से कोई लाभ नहीं।’’ हमें अपने विधायक महोदय और जिलाधीश महोदय पर भरोसा करना चाहिये। कहावत है न कि ‘‘डूबते को तो तिनके का सहारा ही पर्याप्त है।’’ विधायक महोदय ने अपने कोटे से प्रदुषण दूर करने के लिये पाँच लाख रूपये की ओर घोषणा की है। यह प्रसन्नता की बात है। ध्यान रहे हमें ‘‘समुद्र में रहकर मगर से बैर’’ कभी नहीं रखना चाहिये। हमारी ज्वलन्त समस्याओं के समाधान हेतु विधायक महोदय संवेदनशील है। अतः इस समय हमें इसका लाभ अवश्य मिलेगा। तभी विधायक महोदय ने इच्छा प्रकट की यदि समस्या समाधान के लिये ओर भी धनराशि की आवश्यकता होगी तो अतिरिक्त बजट आवंटन किया जा सकता है। मै वही करूंगा जो कहता हूँ ऐसा नहीं है कि ‘‘हाथी के दाँत खाने के ओर और दिखाने के ओर’’ हो। मेरा विष्वास कीजिये।
जन्तुओं के पूर्व अध्यक्ष भेड़िये ने कुछ मांगे रखते हुये जन्तुओं की ओर से एक मांग पत्र प्रस्तुत कर दिया। जिसमें लिखा था-
मान्यवर ! मैं समस्त जीव-जन्तु समाज की ओर से प्रार्थना करता हूँ कि-
ऽ हमारे लिये अलग से चिकित्सालयों की व्यवस्था की जाये ताकि समय पर सही रोगोपचार हो सके।
ऽ मांसाहारी एवं हिंसक लोगों द्वारा की जाने वाली जीव हत्या पर रोक लगाई जाये।
ऽ रेंगने और फुदकने वाले जन्तुओं के लिये अलग से सुविधाजनक जन्तुआलय स्थापित किये जाये।
ऽ गर्मियों में जल समस्या के निवारण हेतु प्रशासन एवं जनसहयोग से छोटे जलाशय, पानी की पौ, परिण्डे आदि की तात्कालिक व्यवस्था की जाये।
ऽ बाहरी हिंसक जीवों से हमारी सुरक्षा हो।
ऽ बाग-बगीचों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाये।
ऽ हमारी सुरक्षा व सुविधाओं की प्राप्ति के लिये मानवाधिकार आयोग की तरह विशेष आयोग का गठन किया जाये।
ऽ मानवीय अत्याचारों की सुनवाई एवं कार्यवाही हेतु विशेष न्यायालयों की स्थापना हो।
ऽ जनसेवा की दृष्टि से हमें अपनी क्षमता के अनुसार सेवा प्रकल्पों से जोड़ने हेतु विशेष प्रशिक्षण दिया जाये।
इस प्रकार चौपाल की कार्यवाही समाप्त होने से पूर्व विधायक महोदय ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत करते हुये कहा- ‘‘मेरे जीव-जन्तु भाई बहिनो ! ‘‘आज मुझे अत्यधिक प्रसन्नता है कि लम्बे समय बाद आप सब चौपाल पर एकत्रित हुये और अपनी समस्याओं को समय रहते आपने प्रस्तुत किया। यह अच्छा किया अन्यथा ‘‘अब पछताये क्या होत है, जब चिड़िया चुग गई खेत’’ वाली कहावत चरितार्थ हो जाती। आपको विश्वास दिलाता हूँ कि आज प्रस्तुत समस्त समस्याओं के समाधान हेतु त्वरित गति से कार्यवाही होगी। मैं इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहता हूँ ‘‘मिया मिट्ठू’’ बनने की आदत मेरी नही है।’’ कई लोग बढ़ चढ़कर बातें तो करते है किन्तु समय आने पर ‘‘नाक पर मक्खी तक नहीं बैठने देते’’। आप भरोसा किजिये जो चौपाल पर आज कहा गया है इससे ऊँट सही करवट बैठेगा। धन्यवाद।
चौपाल की कार्यवाही के समापन पर स्थानीय पशु प्राणियों द्वारा आयोजित प्रीतिभोज में उपस्थित समस्त अतिथियों, जीव-जन्तुओं ने भोजन किया। तत्पश्चात् सभी जीव जन्तुओं ने अपने गन्तव्य के लिये प्रस्थान किया।
आज के इस रात्रि चौपाल की कार्यवाही से सभी सन्तुष्ट थे तथा सभी ने भूरी भूरी प्रशंसा की।

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