वामपंथी सोच !


डॉ. सुजाता मिश्रा

धर्म और जाति के नाम पर देश को बांटे रखने वाले वामपंथी भाषा के आधार पर उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीयों को बांटना चाहते है। हाल ही में बंगलोर मेट्रो के साइन बोर्ड में कन्नड़ और अंग्रेजी के साथ ही हिंदी में भी लिखा गया है ,जिसका वामपंथी बिरादरी जमकर विरोध कर रही है। ये लोग आर्य आक्रमण की परिकल्पना और आर्य – द्रविण युद्ध के नाम पर सदा से उत्तर भारत और दक्षिण भारत को बांटे हुए हैं । पर अब समय बदल गया है, आज दक्षिण भारत की तमाम् फिल्में हिंदी में डब होती हैं और हिंदी भाषी राज्यो में सुपरहिट होती है। उत्तर भारत से बड़ी संख्या में लोग नौकरी करने बंगलोर , हैदराबाद जैसे राज्यो में जाते हैं, जहाँ बाद में उनका परिवार भी आता – जाता है। ऐसे में यदि मेट्रो के साईंन बोर्ड में ‘हिंदी’ भाषा का प्रयोग कर दिया गया तो इसमें कौन सी आफत आ गयी??? बात – बात पर गांधी जी की दुहाई देने वाली वामी बिग्रेड महात्मा गांधी द्वारा स्थापित “राष्ट्र भाषा प्रचार समिति” और उनसे प्रेरित ” दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा” को कैसे भूल गए?? जिसका उद्देश्य ही अहिन्दी राज्यो (विशेषकर दक्षिण भारत) में हिंदी का प्रचार और प्रसार करना था? मने गांधी जी भी सुविधा से ही याद आते हैं?…….क्रमश:

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