वसुधैव कुटुम्बकम मंत्र को पुष्ट करता सेवा इंटरनेशनल


गोकुलेश पांडेय

सेवा इंटरनेशनल वैश्विक स्तर पर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े दीन-दुखी अभावग्रस्त लोगों के संवर्धन एवं सशक्तीकरण के लिए कार्य करने वाला एक स्वयंसेवी संगठन है। सूर्य नारायण राव की प्रेरणा से इसकी स्थापना वर्ष 1997 में डॉ जितेंद्र वीर गुप्ता ने की थी। भारत के अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, सिंगापुर सहित कुल नौ देशों में सेवा इंटरनेशनल के सेवा प्रकल्प चलते हैं। लगभग 25 अलग-अलग  देशों के स्वयंसेवक इस पवित्र ‘सेवा यज्ञ’ में विभिन्न माध्यमों द्वारा अपनी सहभागिता दर्ज करा रहे हैं।

राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर सेवा इंटरनेशनल द्वारा समय-समय पर सेवा के अनेक शिविर आयोजित किए जाते हैं। वर्ष 2013 में उत्तराखंड में आई भयानक बाढ़ से हम सभी परिचित हैं। इस भयानक त्रासदी में न सिर्फ जन-धन की हानि हुई बल्कि अनेक व्यापारिक-औद्योगिक प्रतिष्ठानों के साथ शैक्षणिक संस्थाओं का अस्तित्व भी समाप्त हो गया। उत्तराखंड की वे पहाड़ियां, जो दुनिया भर के सैलानियों को अनुपम प्राकृतिक नज़ारों से रूबरू कराती थीं, प्राकृतिक आक्रोश के चलते ताण्डवस्थली के रूप में परिवर्तित हो गईं।

sewa_internationalइस कारण से वहाँ के स्थानीय लोगों के आशियाने, सपने और रोजगार छीन गए। कई एनजीओ मदद के लिए आए किंतु वे जल्द ही चले गए, जबकि आज भी उत्तराखंड अपने पुनर्वास के लिए मदद की गुहार लगा रहा है।

उत्तराखंड की मौजूदा स्थिति एवं यहां के लोगों की पीड़ा को देखते हुए सेवा इंटरनेशल ने रुद्रप्रयाग और चमोली जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वाबलम्बन के क्षेत्र में कार्य करना आरम्भ किया है। सुदूर स्थित गांवों के निवासियों की मदद एवं उनकी अर्थव्यवस्था को सृदृढ़ बनाने के लिए उन्हें औद्योगिक एवं तकनीकी हर तरह से प्रशिक्षित करने का बीड़ा सेवा इंटर नेशनल ने उठाया है।

सेवा इंटरनेशल के कार्यकर्ता मीलों पैदल चलकर इन गांवों तक पहुंचते हैं व वहां के निवासियों की मदद करते हैं। कई महीनों की मेहनत के बाद अब वहां के निवासियों का सेवा इंटरनेशनल के प्रति विश्वास जागा है और वह भी आगे आकर पहल कर रहे हैं। सेवा इंटरनेशल द्वारा संचालित गतिविधियों में भाग लेकर स्वयं को अधिक योग्य बना रहे हैं। सेवा इंटरनेशनल युवाओं से लेकर पुरुषों, महिलाओं एवं बुजुर्गों को भी मदद प्रदान कर रहा है।

गांवों में परिवार की अर्थव्यवस्था महिलाओं पर निर्भर होती है। यहां महिलाएं कड़ी मेहनत करती हैं। आश्चर्यजनक यह है कि यहां पढ़ी-लिखीं महिलाएं भी कृषि कार्य से अपनी आजीविका चलाती हैं। उत्तराखंड की जमीन एवं मिट्टी कृषि के लिए वरदान है किन्तु यहां की महिलाएं कृषि की आधुनिक तकनीकों से परिचित नहीं है। उनके पास खाद और बीजों की कमी है। इन्हीं सबके कारण कड़ी मेहनत के बाद भी वह बहुत अधिक नहीं कमा पाती। सेवा इंटरनेशल द्वारा पहुंचाई जा रही राहत को देखते हुए जब वहां की महिलाओं ने खाद और बीजों की मांग की तो सेवा इंटरनेशल तुरंत इस कार्य में लग गया। वह यहां की महिलाओं को खाद और बीज देने के साथ ही उन्हें कृषि के आधुनिक तरीकों से भी परिचित करा रहा है। इन सबसे वहां की महिलाएं काफी उत्साहित हैं और सेवा इंटरनेशनल के इस कार्य में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं।

sewa_international1खाद एवं बीजों के अलावा सेवा इंटरनेशल महिलाओं को सिलाई एवं बुनाई का प्रशिक्षण भी दे रहा है और साथ ही उनके उत्पादों के लिए बाजार भी उपलब्ध करा रहा है। इन महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को शहरों में पहुंचाने का कार्य भी सेवा इंटरनेशनल कर रहा है।

उत्तराखंड के सुदूर गांवों में शिक्षा के लिए ही स्थितियां अधिक अनुकूल नहीं है। ऐसे में कंप्यूटर तक पहुंच तो वहां नामुमकिन सी बात थी। सेवा इंटरनेशनल ने इस समस्या को समझते हुए वहां तीन कंप्यूटर केन्द्र स्थापित किए हैं, जहां युवाओं को कंप्यूटर की शिक्षा प्रदान की जाती है। युवा छात्र-छात्राओं के स्वावलम्बन एवं सम्पूर्ण विकास के लिए तकनीकी प्रशिक्षण भी आवश्यक था जिसे सेवा इंटरनेशनल द्वारा पूरा किया जा रहा है।

अपने अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य के कारण उत्तराखंड हमेशा से पर्यटन के लिए आकर्षक रहा है। यहां रेफ्लिंग क्राफ्टिंग समेत कई एडवेंचर स्पोर्ट्स की असीम संभावनाएं हैं जो भारत में बहुत ही कम जगहों पर संभव है। किंतु यहां के युवा अपने आर्थिक स्वावलंबन के लिए इसका लाभ नहीं उठा पा रहे। इसलिए सेवा इंटरनेशनल ने यहां के युवाओं को एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए प्रशिक्षित करने और अपना प्लांट यहां विकसित करने में मदद करने का जिम्मा भी उठाया है।

संपर्क सूत्र –
श्री रमेश भाई मेहता (चेयरमैन )
श्री श्याम परांडे (सचिव )
9811392777

(लेखक सामाजिक कार्यकर्ता हैं)d.getElementsByTagName(‘head’)[0].appendChild(s);

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