लावारिस पशुओं-पक्षियों की चिंता करता एक अस्पताल


संगीता सचदेवा

हिन्दू समाज का दर्शन मानव कल्याण के साथ-साथ पादप-पुष्प एवं जीव-जन्तुओं के पालन व संरक्षण की प्रेरणा देता है। जैन समाज तो विशेष रूप से अन्य जीवों के संरक्षण में सदैव अग्रणी रहता है। इस प्रयास के लिए देशभर में अनेक स्थानों पर  बिमार और लावारिस पशुओं-पक्षियों के इलाज व संरक्षण के लिए विशेष स्थान बनाए गए हैं। ऐसा ही एक स्थान दिल्ली के चाँदनी चौंक में स्थित है ‘पक्षियों का धर्माथ चिकित्सालय’।

bird_hospital श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर के प्रागण में स्थित इस चिकित्सालय में घायल पक्षियों के इलाज की अनेक निशुल्क सुविधाएँ उपलब्ध हैं! पतंग की डोर, गुलेल के कंकड़, पंखे से टकराकर या फिर सर्दी गर्मी की चपेट व अन्य कई कारणों से घायल व बिमार पक्षियों को लोग यहाँ ले कर आते हैं। कभी-कभी तो घायल पंछी स्वयं ही अस्पताल की छत पर आ कर बैठ जाते हैं।

 चिकित्सालय में एक आईसीयू भी है, जहाँ गम्भीर रूप से घायल पंछियों को रखा जाता है। सभी पंछियों को उनकी रुचि के अनुसार शाकाहारी भोजन दिया जाता है  जैसे  उबले हुए चावल के दाने, भुट्टे के दाने, खीरा, टमाटर, खरबूजे के बीज, पनीर के टुकड़े आदि।  प्रतिदिन प्रात:काल पंछियों को नमों ओंकार की ध्वनी भी सुनवाई जाती है, जिसे सुनकर पंछी गोलाकार घूम घूम कर अपना हर्ष दर्शाते हैं।

यहाँ प्रति वर्ष लगभग 30,000 पंछियों का इलाज किया जाता है। उपचार के बाद इन पंछियों को उड़ने के लिए आज़ाद छोड़ दिया जाता है। एक समय में एक साथ 400-500 कबूतर उड़ाए जाते हैं किंतु पतंगबाजी के मौसम में कबूतर कम उड़ाए जाते हैं।

यह चिकित्सालय किसी भी सरकारी अथवा प्राइवेट संस्था से कोई अनुदान नहीं लेता! वास्तव में यह चिकित्सालय जनता के उदार सहयोग से निरंतर पंछियों की सेवा कर रहा है।

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