माँ का भरोसा(लघु कथा)


बबली बेनीवाल

दिनभर काम करने के बाद थकी हारी वो औरत जैसे ही झुग्गी मे घुसी सामने बैठे उसके शराबी पति ने आवाज दी -आ गई चल जल्दी से 100 रूपए दे 3दिन से गला सूखा पडा है
बिना जबाब दिए पानी पीने आगे बढी तो फिर बोला-हरामखोरनी सुनती नही है जल्दी कर ,
औरत बोली-पैसे नही है मेरे पास,
शराबी बोला-झूठ बोलती है सारा दिन बाहर थी अच्छा 50 ही दे दे किसी से 2 घूट लेकर पी लूंगा,
कहा ना काम नही मिला, औरत बोली,
बस फिर कया बेजान शरीर मे जान आ गई अंदर का पुरूष जाग गया ओर लगा मर्दानगी दिखाने
औरत को लातो घूसो से पीटकर, मारता रहा गालियां देता रहा,और वो बेचारी पिटती रही
ये सब चारपाई के नींचे छुपा उसका 5 साल का बेटा सिसकते हुए देखता रहा,
औरत सोच रही थी माँ कहती थी पति परमेश्वर होता है
उसका घर ही तेरा घर है मायके से लड़की डोली मे जाती है ओर ससुराल से अर्थी पर ,
कबकि मर जाती पर बेटे के लिए जीना है 4-5 घंटे तक गाली देकर और पीटकर जब शराबी थक गया तो बडबडाता सो गया ओर वो रातभर रोती रही दर्द मे ,
सुबह उसका बेटा बोला माँ मै स्कूल नही जाऊंगा सबने फीस जमा करवा दी मुझे छोडकर, कल मास्टर जी ने मुर्गा बनाया था आज छड़ी से पीटेगे
,माँ बोली-मेरे लाल तू स्कूल मे ना पीटे इसीलिए तेरी मां रातभर पीटती रही
ले 100 रूपए फीस के पेटीकोट के घेरे से निकाल कर देकर बोली,बेटे कि आँखें खुशी से चमक उठी वो रोती माँ के
आँसू पोछकर बोला-माँ जब मै पढ लिखकर बडा हो जाऊंगा ना तब कभी तेरी आँखों मे आँसू नही आने दूंगा,
माँ ने रोते हुए बेटे को गले से लगा लिया।
दोस्तों दुनिया की हर माँ अपने बच्चो के लिए हर तरह का दुख दर्द उठाती है उसके भविष्य के लिए ताकि बडा होकर वो एक कामयाब इंसान बने, मेरी, आपकी हम सभी की
मगर कुछ नालायक बच्चे बडे होकर उसके किए बलिदानो को भूल उसे बोझ समझते है ओर ये समझते है वो माँ को पाल रहे है
वो भूल जाते है 9 महीने कोख मे और 3 साल तक सीने से चिपका कर और हमेशा अपने दिल मे रखने वाली माँ ना होती तो वो शायद कभी जन्म भी नही ले पाते।

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