प्रदूषण मुक्त हरी भरी धरती


डॉ.शोभा भारद्वाज

एक परिवार का घर सड़क के किनारे था उन्होंने घर के बाहर तीन गुलमोहर के पौधे लगाये उनका पूरा ध्यान रखते थे, आसपास दुकानें थीं दाई और के दुकानदार नें तीन चार दिन बाद ही अपनी तरफ का पौधा उखाड़ कर फेक दिया तर्क था जब यह पेड़ बन जाएगा उनकी दूकान का बोर्ड दिखायी नहीं देगा । बचे दो पौधे परिवार ने कैसे बचाये उनका दिल जानता है पौधों ने सिर उठाया बच्चों की बानर सेना उन्हें उखाड़ने की फिराक में रहती उस परिवार का पौधों को बचाने के लिए सबसे झगड़ा होता था पौधों के चारो तरफ लोहे का कटघरा लगा दिया लेकिन सड़क से गुजरते भैंसा गाड़ी वाले सुस्ताने के लिए रुकते पेड़ के नाजुक तने से भैंसा बांध देते। भैंसा अपना बदन खुजाता कटघरा हिलता ,पेड़ के नाजुक तने से भी टकराता। स्कूलों की छुट्टी होती बच्चों की भीड़ टहनियों को नोचती जाती पेड़ की रक्षा में तैनात उनका बंधा अल्सेशियन कुत्ता जैसे ही कोई पेड़ के नजदीक आता भयानक आवाज में भोंकता । पेड़ बड़े हो गये लेकिन उनमें फूल नहीं आये परिवार कहाँ हार मानने वाला था? उन्होंने फूलों की बेलें पेड़ की जड़ों के पास रोप दी सहारे के लिए रस्सियाँ लगा कर पेड़ के ऊपर चढ़ा दीं बेलों में गुलाबी और सफेद शेड वाले खुशबूदार फूल लगे गुलमोहर की शोभा दुगनी हो गयी ।एक दिन गुलमोहर की फुनगी पर लाल –लाल फूलों के गुच्छे खिले वह नीचे से दिखाई नहीं देते थे परिवार घर की छत पर चढ़ कर निहारते बहुत ही खूबसूरत नजारा था । धीरे-धीरे पूरा पेड़ फूलों से भर गया पेड़ों की टहनियां ने चारो तरफ फैल कर घनी छाया बना दी । अब राहगीर पेड़ों की घनी छाया के नीचे बैठ कर कुछ देर सुस्ताते लड़के लडकियाँ भी आपस में बातें करते पेड़ उनका मिलन स्थल था ।पेड़ों पर परिंदों ने घोसला बना लिया लेकिन जिन्हें मुफ्त का ईधन चाहिए था उन्हें पेड़ों में मनों लकड़ी दिखायी देती थी कभी भी मौका देख कर पेड़ पर चढ़ जाते हरी भरी टहनियों को मरोड़ने लगते लेकिन उस घर का जागरूक कुत्ता आहट से समझ जाता शोर मचा कर परिवार के लोगों को इकठ्ठा कर लेता । आसपास के दुकानदारों को दुःख था पेड़ों की घनी छाया में उनका साईन बोर्ड दिखाई नही देता था रोज पेड़ों को छांटने के मंसूबे बनाये जाते ।बायीं और के रेस्टोरेंट का मालिक सफल हो गया उसने पेड़ की जड़ों में न जाने क्या डाला एक पेड़ सूख कर गिर गया । कुछ दिनों बाद रेस्टोरेंट भी बंद होगया उसमें ग्राहक अब भी नहीं आ रहे थे । एक वर्ष बाद दूसरा विशाल वृक्ष भी गिर कर सड़क पर फैल गया लेकिन किसी को चोट नहीं आई सब हैरान थे ।जो रोज लकड़ियों की फिराक में रहते थे पेड़ पर कुल्हाड़ियाँ चलाने लगे इस परिवार का कोई भी व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकला सब गुमसुम थे अपने प्यारे गुलमोहर के टुकड़े होते देखना नहीं चाहते थे अब पत्तों के अलावा कुछ नहीं रहा ।
पेड़ों की छटाई का ठेका लेने वाले जम कर हरे भरे वृक्षों के तनों पर कुल्हाड़ियाँ चला रहे थे लकड़ियों का ढेर लगा था । कई पढ़े लिखे रिटायर वृद्ध पेड़ों को छटवा नहीं, कटवा रहे थे । मैने पूछा महोदय आप क्या कर रहे हैं बड़ी मुश्किल से पेड़ पनपते हैं, हवा शुद्ध करते हैं, आक्सीजन देते है और पीपल का पेड़ चौबीस घंटे आक्सीजन बनाता है । किसी आयुर्वेदाचार्य से बात कीजिए वह बतायेंगे नीम का हर हिस्सा कितना लाभ कारी है और आप कटवा रहे हैं उन्होंने मुझे ऐसे देखा जैसे जंगल का कोई जीव शहर में आ गया हैं। टेढ़ा मुहँ बना कर महानुभावों का जबाब था अरे क्या कह रहीं हैं मेडम ?पेड़ धूप रोकते हैं इनकी पत्तियों और बसेरा करने वाले परिंदों की बीठों से गंदगी फैलती हैं पूरा दिन कौए कावं- कावं करते हैं। हैरानी हुई मार्च का महीना था कुछ दिनों बाद गर्मी पड़ने वाली है गर्मियों में छाया कितनी सुखकारी होगी किसी राहगीर से पूछिये फिर पत्तों की खाद और उपजाऊ मिटटी (सौएल ) बन जाती हैं। विश्व बढ़ते प्रदूष्ण से परेशान प्रदूष्ण बढ़ने से नन्हे नन्हें बच्चों को साँस की तकलीफ हो रही हें कम उम्र में इन्हेलर चाहिए। स्वयं भी सारी रात खांसते – खांसते बेहाल हो जाते हैं आँखे उबलने लगती हैं कई बार एमरजेंसी में अस्पताल जाकर आईसीयू में भर्ती होना पड़ता है शुक्र करते हैं जान बची ।घर के बाहर कुदरत का सिलेंडर इन्हें बुरा लगता है उसे कटवा रहे हैं ।ऐसे ही चलता रहा क्या गले में आक्सीजन का सिलेंडर बाँध कर जियोगे ?
एक महोदय हरे भरे पेड़ इस लिए कटवा रहे थे हर घर में दो से तीन तक गाड़ियाँ हैं कहाँ खड़ी करें चोरी हो जाती है बाहर गेट लगवा कर गाड़ियों के लिए जगह बनानी है हैरानी है यदि गैरज नहीं था तो एक भी गाड़ी क्यों ली । सडकों पर जाम लगा रहता है अधिकतर एक गाडी में अकेले सर या मैडम गाड़ी चलाते दिखाई देते हैं कुछ पान खाने भी जाते हैं तो स्कूटर,बाईक या गाड़ी से जाते हैं गाडी पानी से नहीं चलती क्रूड आयल धरती का सीना चीर कर निकाला जाता है तब पेट्रोलियम मिलता है ।पेट्रोल डीजल महंगे होने पर सरकार से शिकायत करते हैं ।पब्लिक ट्रांसपोर्ट है मेट्रो तीव्र गति से गन्तव्य तक जल्दी पहुंचा देगी सुबह आफिस जाने के लिए चार्टर्ड बसें चलती है विकसित देशों में लोग मेट्रो से सफर करते हैं केवल साप्ताहिक छुट्टी के दिन अपनी गाड़ी निकालते है लेकिन भारत जैसे विकासशील देश में अकेले सफर करने में शान समझते हैं ।
पेड़ों से दुश्मनी है प्रदूष्ण से दोस्ती ।घर के बाहर एक इंच भी कच्ची जमीन नहीं छोड़ते कहीं बरसात का पानी धरती के अंदर न समा जाए बेशक सामने सड़कों पर भरा रहे ।कईयों ने शान शौकत दिखाने के लिए फर्श पर टाईल बिछवा लिए ।वह मिट्टी को गंदगी कहते हैं । कुछ घरों के बाहर देखा सात आठ पुट लम्बा चार – पाँच फुट चौड़ा एक फुट के करीब स्थान खोद कर उसे सीमेंट से समतल करवा दिया । यहाँ खूबसूरत फूलों के गमले सजे हैं सोचा नहीं बरसात में जब पानी भरेगा कैसे निकालेंगे ? क्या यहाँ मच्छर नहीं पनपेंगे जबकि जिस तरह पानी का स्तर रोज गिर रहा है वाटर हार्वेस्टिंग की जरूरत हैं। पानी से घर के बाहर सड़क तक छिड़काव करना कईयों का शौक है अखबार रोज पढ़ते हैं टीवी पर खबरें भी देखते हैं कभी जान्ने समझने की कोशिश नहीं की ऐसे भी क्षेत्र हैं जहाँ लोग पीने के पानी के लिए भी तरसते हैं। सरकार का फर्ज है पानी की सप्लाई बढ़ाते रहना हमारा क्या फर्ज है केवल मौलिक अधिकारों की बात करना ?
हमें पेड़ पोधों से प्रेम है अपने घर में सुंदर महंगे पौधे डिजाईनर गमलों में लगा कर उन्हें काटते छांटते हैं धूप दिखाते हैं सही पानी और महंगी खाद डालते हैं लेकिन कईयों ने अपने ड्राईंग रूम में आक्सीजन देने वाले वृक्षों को बोनसाई बना कर गमलों में लगा दिया देख कर तकलीफ होती है जबकि अपने कारनामें की भूरि-भूरि प्रशंसा स्वयं करते हैं कभी नहीं सोचा विशाल बरगद के पेड़ का बीज जरा सा होता है कुदरत ने उसमें सम्पूर्ण वृक्ष का कोड डाल दिया ।हम कुदरत से ही खिलवाड़ करते हैं जापानी छोटे कद के होते हैं उन्हें विशाल वृक्ष शायद अच्छे नहीं लगते उन्होंने , पीपल, आम, वट ‘इमली और नीम जैसे जुगादी पेड़ों की जड़ें काट कर डेढ़ फुट का बौना बनाने की कला विकसित की है हमने भी सीख लिया । घर से बाहर लगे हरे भरे फूलों से लदे घने वृक्ष हमें बुरे लगते हैं ।
इतिहासकार अच्छा शासक उसे मानते हैं जिसने सड़कों के दोनों तरफ छायादार एवं फलदार वृक्ष लगवाये। इतिहास लिखता है शेरशाह सूरी ने अपने पाँच वर्ष के छोटे से कार्यकाल में सडकों के किनारे छायादार वृक्ष लगवाये , राहगीरों के लिए साफ पीने के पानी की व्यवस्था की थी । राहगीर वृक्षों की छाया तले विश्राम कर आगे की यात्रा करते थे। लुटियन दिल्ली में आज भी सड़क के किनारे लगाये गये अनेक वृक्ष हैं। जिनमें आम ,इमली जामुन ,पीपल बरगद और नीम के पेड़ प्रमुख हैं इनके तने चौड़े हैं पेड़ों के नीचे घनी छाया एवं ठंडक रहती है । भयानक आंधी से भी नहीं गिरते आज कल ऐसे वृक्ष जैसे अमलतास गुलमोहर और अनेक फूलों वाले वृक्षों का चलन है यह जल्दी ही बड़े होकर सीजनल फूलों से लद जाते हैं गर्मी के दिनों में मन और तन को शांति देते हैं इनकी छाया विशाल नहीं परन्तु सुखकारी होती हैं लेकिन तेज आंधी का मुकाबला करने में असमर्थ होते हैं ।वृक्षारोपण की इच्छा शक्ति में कहीं कमी नहीं है हर वर्ष अनेको वृक्ष लगाये जाते हैं लेकिन उन्हें बचाने की इच्छा शक्ति नहीं है हाँ गिनती का जिक्र किया जाता है अब कितने जल के अभाव में सूख गये उसका जिक्र नहीं है ।
जंगल जल रहे हैं मीलों तक आग फैल रही है हवा के बहने से आग और फैल जाती है बुझाने की कोशिश की जाती है लेकिन आसान नहीं है हम आकाश में बरसने वाले बादलों का इंतजार करते हैं घनघोर बारिश हो आग बुझ जाए क्योकि आग बुझाने की कोशिशे ज्यादातर नाकाम होती जाती है और महंगी भी हैं। घास में लगी आग और भी तेजी से फैलती हुई शहरों की तरफ बढ़ती है ताप से बर्फ पिघलने लगती है ।
बीमारी के कीटाणु एक शरीर में लग कर फिर दूसरे शरीर को खाने लगते हैं । धरती को नष्ट कर हम किस प्लेनेट में रहने जायेंगे। पचास प्रतिशत जंगल खत्म हो रहे हैं उसके साथ वन्य जीवों की अनेक प्रजातियाँ भी नष्ट हो गयी ।हमारे बच्चे उन्हें अब चित्रों में ही देख सकेंगे । धरती कई बार गर्म होकर ठंडी हुई कई सभ्यताएं विकसित होकर नष्ट होकर धरती के भीतर क्रूड आयल बन गयीं हम भी नष्ट हो जायेंगे लेकिन धरती को फर्क नहीं पड़ता जीवन की समस्त आवश्यकताओं की वस्तुये धरती के ऊपर हैं जितना खोदते जायेंगे ऐश्वर्य की वस्तुये मिलती हैं विकसित देशों ने जम कर धरती का दोहन किया है जिसका परिणाम समस्त विश्व को भुगतना है लाखो वर्ष पहले सूर्य की ऊर्जा ने धरती को जीवन दिया था लेकिन धरती को प्रदूषित करने में हमने कोर कसर नहीं छोड़ी अब तो पर्वतीय क्षेत्रों में भी गर्मी का दबाब बढ़ता जा रहा है जरूरत धरती पर एक- एक पेड़ लगा कर उसे बचाने, सन्तान के समान पालने से है धरती फिर से हरी भरी जीवन दायिनी सुखकारी हो जायेगी ।

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