देश विदेश में नव वर्षोत्सव


सुरेन्द्र माहेश्वरी

सम्पूर्ण विश्व में नव वर्ष धूम धाम से मनाया जाता है। लोग एक दूसरे को बधाईयाँ देते है तथा भावी जीवन के प्रति मंगलकामनाएं प्रकट करते है।यह पर्व समस्त देशों में प्राय: अंग्रेजी कलैण्डर के अनुसार एक जनवरी को मनाया जाता है। सबसे पहले एक सौ तरेपन ईस्वी पूर्व यह वारव एक जनवरी को मनाया गया। 45 ईस्वी पूर्व रोम के तानाशाह जुलियस सीजर ने जूलियन कलैण्डर का शुभारम्भ किया।एक जनवरी को नव वर्ष के रुप में मानाने का प्रचलन 1582 ईस्वी ग्रेगरियपन कलैण्डर के प्रारम्भ के बाद बहुतायत से हुआ।पॉप ग्रेनरी अष्टम ने 1582 में इसे तैयार किया।ग्र्नरी ने ही इसमें लीप ईयर का प्रावधान रखा।अब यह पंचाग सर्वमान्य हो गया और राजकीय तथा व्यावसायिक कार्य भी इसी के अनुसार संचालित होता है। विभिन्न देशों में नववर्ष का स्वागत इस प्रकार करते हैं।
भारत देश- भारतीय संस्कृति में नववर्ष का शुभारम्भ “नव संवत्सर” से ही माना जाता है यही विक्रम संवत्सर है। इस दिन भगवान् ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना हुई तथा प्रथम युग सतयुग का प्रारम्भ हुआ।हिन्दू लोग “चैत्र प्रतिप्रदा है। यह तिथि विक्रम संवत के अनुसार मानी है।मान्यता है कि यही दिन सुख समृद्धि प्रदाता कहा जाता है। इस दिन सूर्योपासना के साथ आरोग्य, समृद्धि और आचरण की पवित्रता के लिए कामना की जाती है।
जैन समुदाय के लोग दीपावली के दिन से ही नव वर्ष का शुभारम्भ मानते हैं। इसे निर्वाण संवत् कहा जाता है। मुसलमान लोग हिजरी सन् के नाम से नया वर्ष मोहरम की पहली तारीख से मानते हैं। मुस्लिम पंचाग की गणना चाँद के अनुसार की जाती है। फारसी लोग नववर्ष को “नवरोज” के नाम से मनाते हैं जिसका प्रारम्भ तीन हजार वर्ष पहले हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि इसी दिन फारस के राजा “जमजेद” सिंहासनारुढ़ हुए थे। फारसी लोग नव वर्ष 19 अगस्त को मनाते हैं।
प्रान्तीय स्तर पर भी नव वर्षोत्सव के आयोजन में भिन्नता होती है। महाराष्ट्रीयन नव वर्ष का शुभारम्भ चैत्र माह के प्रतिपदा से मानते है। इस दिन बाँस को नई साड़ी पहनाई जाती है भीतर पीतल के लोटे को रखकर गुड़िया बनाई जाती हैं और उसकी पूजा की जाती है। गुडिया को घरों के बाहर लगते हैं|
हिन्दू नववर्ष के रूप में “गुड़ी पड़वा” की पूजा करते हैं इस दिन सूर्य, नीम की पत्तियाँ, पूरणपोली, श्रीखण्ड ध्वजा पूजन का विशेष महत्व रहता है। नये आभूषण व वस्त्रों के साथ शक्कर से बनी आकृतियों की माला पहना कर गुड़ियाँ को सजाते है। पूरण पोली और श्रीखण्ड का नैवेद्य चढ़ाकर नव दुर्गा, भवन राम तथा हनुमान की आराधना होती है। इस दिन सुन्दरकाण्ड, रामरक्षा स्त्रोत और देवी भगवती के लिए मन्त्र जाप का विशेष महत्व माना जाता है।
मलियाली समाज नववर्ष का शुभारम्भ ” ओणम” से मानते है जो अगस्त व सितम्बर में मनाया जाता है। मान्यता हैं कि इसी दिन राजा बली अपनी प्रजा से मिलने धरती पर अवतरित होते है। उनके स्वागत हेतु फूलों की रंगोली बनाते है और मिष्ठानों का आनन्द लिया जाता है। तमिल लोग “पोंगल” पर्व से ही नववर्ष का शुभारम्भ मानते है। इसी दिन से तमिल माह की पहली तारीख मानी जाती है। यह त्यौहार प्रतिवर्ष 14-15 जनवरी को मनाया जाता है ।सूर्यदेव को जो प्रसाद चढ़ाया जाता है उसे ही पोंगल कहते हैं नई फसल के आगमन की खुशी में यह पर्व चार दीनों तक मनाया जाता है।
बंग समुदाय बैसाख की पहली तारीख को नव वर्ष का उत्सव मानते है। नई फसल की कटाई और व्यापारियों द्वारा नए बही खातों के शुभारम्भ करने की प्रथा के कारण इस पर्व को मानते है।पंजाबी समुदाय अपना नववर्ष बैसाखी को ही मानते है।यह तिथि प्रतिवर्ष 13-14 अप्रेल को ही होती है।इस अवसर पर नये वस्त्र, नये गहने पहनते हैं तथा भंगड़ा, गिद्धा आदि नृत्यों की प्रस्तुति की जाती है। गुजराती पंचाग भी विक्रम संवत पर आधारित हैं।नववर्ष पर प्रत्येक घर में नये पकवान व मिष्ठान बनते हैं और एक दूसरे को नववर्ष की बधाइयाँ दी जाती है।
जर्मनी- यहाँ के लोग नव वर्ष के स्वागत हेतु ठण्डे पानी में पिघला हुआ शीशा डालते है। उससे बनी हुई आकृति को भविष्य की जानकारी देने वाली मानी जाती है जैसे दिल का आकर बना तो शादी होगी। गोलाकार बना तो सम्पूर्ण वर्ष भाग्यशाली होगा। नववर्ष की पूर्व संध्या पर जो भोजन किया जाता है उसका आंशिक भाग आधी रात तक बचा कर रखा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने आगामी वर्ष में घर पर्याप्त मात्र में भोजन सामग्री बनी रहगी।
चिली-इस देश में नव वर्ष की मध्य रात्रि में शैपेंन भरे गिलास में सोने की अंगूठी इसलिए रखी जाती है कि वह सौभाग्य का प्रतीक होती है।
जापान- इस देश में नववर्ष को “ओसोगात्सु” कहते है।इस दिन सभी कारोबार बंद रहता है।घर के मुख्य द्वार पर रस्सी बाँधी जाती है ताकि शक्तियाँ बाहर ही रहे।लोग हर्षोल्लास के साथ जोर जोर से हंसते घडी में 12 बजने के पीला 108 घण्टियां यह दिखाने के लिए जाती है कि इतनी सारी समस्याओं का समाधान कर दिया गया है।
आस्ट्रेलिया- नववर्ष के दिन सार्वजनिक अवकाश रहता हैं। लोग अर्ध रात्रि से ही अपनी कारों के हार्न, चर्च की घण्टियाँ तथा सीटियाँ बजा कर नववर्ष का स्वागत करते हैं।
पूर्तगाल व स्पेन- यहाँ के लोग नववर्ष पर “केश्मोकेश्पर” नाम के बारह अंगूर खाते हैं। मान्यता है कि इससे आगामी बारह महीने सुख पूर्वक व्यतीत हो पायेंगे।
प्युटोटिको- नववर्ष पर अपने घर की बालकनी से ठण्डा पानी बहार फैंकने की प्रथा है।
डेनमार्क-यहाँ के लोग नववर्ष के दिन घर की पुरानी प्लेटों को अपने दोस्तों, पड़ोसियों, रिश्तेदारों के घरों के सामने तोड़ते है। ऐसा किया जाना उनकी आत्मीयता का परिचायक है। जिस घर के बाहर सर्वाधिक प्लेटें तोड़ी जाती हैं वह उस परिवार का सर्वाधिक प्रिय माना जाता है।
समूचे विश्व में नववर्ष के आयोजन से मानव मन में एक नई ऊर्जा, नई चेतना, नव उल्लास और नवीन प्रेरणा का संचार होता है और भावी जीवन के लिए नवीन कार्य योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु व्यक्ति संकल्पित होता है।

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