तेल से अपना खेल साध रही है सरकार


डॉ. अंजनी झा

भले ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में लगातार कमी हो रही हो, किन्तु देश में पेट्रोल-डीजल के मूल्य में वृद्धि ‘कमाई’ का बड़ा जरिया बन गया है। बड़े-बड़े वायदों के बाद भी केंद्र और राज्य सरकारों ने राजस्व घाटे की भरपाई और आय वृद्धि का कोई उपाय नहीं ढूंढा। यह सबसे आसन तरीका है, इसलिए सारी कवायद इसी पर की जाती है। शराब, गुटखा, सिगरेट आदि पर सरकार खूब टैक्स लगाती है, किन्तु बिक्री पर कोई असर नही पड़ता। हर वर्ष केंद्र और राज्यों के बजट में बिना सट्टा लगाये दावे के साथ कीमत की बढ़ोतरी का दावा किया जा सकता है। लेकिन, ‘तेल’ को लेकर चल रहा नायब खेल हमारी अर्थव्यवस्था को पंगु बना रहा है।

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