डेढ़ हाथ की मालकिन


अनीता रवि

उदय नगर, योगीहिल, स्वप्न नगरी के पीछे रहती है शोभा बोल्धने, अपने शराबी पति की तीसरी पत्नी, छः बच्चों की माँ, चार घरों में काम करके अपना मकान खरीदने, बच्चों को पदाने-लिखाने और उनकी शादियाँ अपने अकेले के दम पर करने वाली कुछ अलग तरह की माँ।
ठगुबाई के रूप में इसका जन्म औरंगाबाद के बैजापुर तालुक्के के हनत गाँव में हुआ। जब ठगुबाई पैदा हुई तो इसके डेढ़ हाथ को देखकर इसके चाचा ने ठहाका लगाते हुए इसके माँ-बाप से कहा कि देखो तुम्हारे सारे पापों का परिणाम तुम्हारे सामने है। उसी समय उसकी माँ ने मन ही मन संकल्प लिया था कि वो उस अधूरी लड़की को सम्पूर्ण बनाने में कसर नहीं छोड़ेगी। बचपन से ही घर में किसी ने भी उस पर कोई दया नहीं दिखाई और उसके आधे दाएँके साथ उसे इस तरह प्रशिक्षित किया कि उसे कभी भी अपना हाथ आधा नहीं लगा। वो पूर्ण आत्मविश्वास से घर का पूरा काम करती रही परन्तु फिर भी किसी ने विवाह के लिए उसका हाथ थामने का साहस नहीं किया। अंत में मजबूरी में उसके माँ-बाप को एक बूढ़े शराबी आदमी की तीसरी पत्नी के रूप में उसका विवाह करना पड़ा। उसने न केवल शराबी पति और अपने छः बच्चों को संभाला बल्कि चार घरों में अपनी शारीरिक विकलांगता के बावजूद इतना अच्छा काम किया कि उन्होंने उसका नाम ही ठगुबाई से बदल कर शोभा कर दिया।
वहीँ विधि की मार देखिये। उसके जन्म के ठीक एक महीने बाद उसके चाचा के घर भी ठीक वैसी ही कन्या हुई–डेढ़ हाथ वाली। किन्तु उसके चाचा-चाची ने उसे लाड़-प्यार से खूब बिगाड़ दिया और पैसे के जोर से घरजमाई भी खरीद लिया। परन्तु बेटी के बुरे व्यवहार से दामाद घर छोड़ कर चला गया। वो लड़की अब अपने माँ-बाप पर बोझ है।
इधर यहाँ हमारी ठगुबाई से शोभा बनी इस औरत ने अपने डेढ़ हाथ से भी नौ हाथों वाली दुर्गा का रूप धारण कर लिया।

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