खाड़ी देशों में मोदी की चमत्कारी यात्रा


डॉ. सतीश कुमार

4भारतीय विदेश नीति में कई बुनियादी परिवर्तन हो रहे है । कई खेमों में वर्षों की जंग को साफ किया जा रहा है, प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिव के साथ देश के भीतर और बाहर कई भ्रम फैलाए गए थे। उन अफवाहों को भी तोड़ा जा रहा है । मोदी की दो दिवसीय खाड़ी देशों की सफल और ऐतिहासिक यात्रा का चित्रण भी इसी परिपेक्ष्य में किया जा सकता हैं । मोदी की आगवानी साऊदी अरबिया में शेख के द्वारा जिस तरीके से कि गई वह भारतीय विदेश नीति के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बन गया । सारे सरकारी कायदों को नजरअंदाज करते हुए शेख मोहम्मद बी अल नहयान अपने पाँचों भाईयों के साथ हवाई अड्डे पर भारतीय प्रधानमंत्री की आगवानी में खड़े थे । यह कूटनीतिक सद्भावना इस बात की विवेचना करता है कि संयुक्त अरब अमिरात और खाड़ी के अन्य देश भारत को कितना महत्व और तवज्जो दे रहे हैा मोदी ने भारतीय लोगों केा संबोधित करते हुए उन्हें मिनी भारत कहकर पुकारा । यह वक्तव्य भावनात्मक संबोधन की महत्वपूर्ण कड़ी है जो दो देशों को मजबूत धागे से जोड़ता है । सबसे बड़ी तादाद भारतीय मूल के लोगों की है, उन भारतीय के द्वारा भेजे गए वैसे भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती है । भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक केन्द्र भी हैा इन तमाम विशेषताओं और सामरिक नजदीकियों के बावजूद पिछले 34 वर्षों से कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री खाड़ी के देशों के भ्रमण से कन्नी काटता रहा है । मोदी ने बिल्ली के उस पिजरें को खोला जो 34 वर्षों से बंद था ।

मोदी के प्रधानमंत्री बनने के उपरांत भारत के भीतर और बाहर यह भ्रांतियां फैला दी गई है कि “हिन्दू राष्ट्र वाद “ बनाने वाला भारत का प्रधानमंत्री इस्लामिक देशों की यात्रा कैसे कर सकता है । मोदी के कार्यकाल में पश्चिमी देशों के साथ भारत की दुरियाँ बढ़ेगी । लेकिन यह भ्रांति कुत्सित मानसिकता की उपज थी जो विदेश नीति को वोट बैंक की घरेलू सांप्रदायिक आईनों से देखते है । उनकी नजर में इस्त्राईल और अरब देश दो ऐसे विपरीत ध्रुव है जिस पर एक साथ चलना कभी संभव नहीं हो सकता । इस सरकार की विदेश नीति ने इस भ्रम को तोड़ दिया । इस्त्राइल और अरब देश दोनों भारत के लिए महत्वपूर्ण है । एक के साथ चलने का अर्थ यह नहीं कि दूसरे के साथ मुँह मोड़ लिया गया । भारत के प्रधानमंत्री खाड़ी के देशों में थे तो उसके कुछ दिन पहले गृह मंत्री इस्त्राइल भ्रमण पर गए हुए थे । विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी ईस्त्राइल की यात्रा कर चुकी है ।3
विगत में भारत और खाड़ी देशों के बीच संपर्क साधन का सूत्र केवल गुटनिरपेक्षता का मंच हुआ करता था । वहीं पर भारत और खाड़ी देशों के शेक्षों की मुलाकात होती थी । और कोई विशेष न तो प्रयास किए गए और न ही इन देशों को भारतीय सुरक्षा और आर्थिक समीकरण से जोड़ा गया । इसका खामियाजा नुकसान दे रहा । पहलेा पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर विशेष कर इस्लामिक संगठन के मंच से कश्मीर मुद्दे को लेकर इन देशों में भारत विरोधी हवा बनाने की कोशिश करता रहा । भारत की दुरिया निरंतर खाड़ी देशों से बढ़ती चली गई । नई विश्व व्यवस्था में अमेरिकी विस्तार सिकुड़ने लगे तो इसकी भरपाई चीन ने शुरू कर दी । इस तरह से चीन का फैलाव खाड़ी देशों में तेजी से हुआ । पाकिस्तान भी चीन के तराजू पर बट्टा डालकर और भारी भरकम बनाने की कोशिश करता रहा ।

मोदी की यात्रा सउदी अरब में ऐसे समय में हुई है जबकि भारत का पश्चिमी ठिकाना पूरी तरह से आतंकवाद और राजनीतिक तबाही के दौर से गुजर रहा था । अफगानिस्तान फिर मध्य एशिया में इस्लामिक राज्य का जहर आग उगलने लगा । इसका फैलाव मध्य एशिया के देशों में हुआ । खाड़ी के देशों में जहाँ पर शहर राज्य की व्यवस्था है, वहाँ की राजनीतिक घुरी को गंदा करने की कोशिश हो रही है । मोदी ने पाकिस्तान को दर किनार करने की सफल कोशिश की । आतंकवाद को मुख्य मुद्दा बनना भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं । मोदी ने सउदी के साथ व्यापक सैनिक ओर सामरिक समझौते पर भी हस्ताक्षर किया । इसके तहत भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार उस देश के साथ छह महीने में एक बैठक करेगें जिसके अंतर्गत समान धर्मो विचारधारा को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी । प्रधानमंत्री ने आर्थिक व्यापार को भी आगे बढ़ाने की कही ओर संसाधन को एक दूसरे हित में करने के मसौदे पर हस्ताक्षर किए गए ।
1मोदी की विदेश नीति को एक महत्वपूर्ण विशेषता है कि उन्होंने इस विषय को घरेलू राजनीति और वैचारिक चोले से अलग कर दिया है । ईरान के मुद्दे को लेकर खाड़ी के देशों में कई भ्रांतियाँ है । ईरान की आण्विक क्षमता कई देशों के लिए मुसिबत बनी हुई है । कई अमेरिकी प्रभाव के असर में है मोदी ने इन तमाम चित्रों से हटकर भारत की रूचि और जरूरत के अनुरूप चित्रांकन करने की कोशिश की है । लाखों की संख्या में भारतीय मूल के लोगों का वहाँ होना भारत के लिए मजबूत स्तंभ की तरह है । भारत के पास मानवीय संसाधन है खाड़ी के देशों में प्रचुर प्राकृतिक संसाधन है । दोनों देशों की जरूरते एक दूसरे के लिए पूरक है । भारत की कोशिश है कि पर्याप्त मात्रा में खनिज पदार्थों का आयात भारत में हो सके और भारत की सॉफ्ट स्किल का फायदा खाड़ी के देशों को मिल सके । निश्चित रूप से यह यात्रा मोदी की ऐतिहासिक सफल यात्रा के रूप में याद की जाएगी ।

(लेखक झारखंड केंद्यरी विश्वविद्यालय में विभागाध्यक्ष हैं)

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