गृह युद्ध की गिरफ्त में इराक


डॉ० अंजनी कुमार झा

1इराक में गृह युद्ध के कारण हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं| इस्लामिक आतंकी संगठन के बरपे कहर के आगे सरकार बेबस है | सैकड़ों निर्दोष लोगो की जानें जाने का सिलसिला थम नहीं पा रहा है | हजारों लोग पलायन को विवश हैं | कबीलाई लड़ाई, सुन्नी संघर्ष, विभिन्न आतंकी गुटों में संघर्ष, सरकार की दोषपूर्ण निति के कारण पूरा देश अराजकता की चपेट में है | छापामार सुन्नी संगठन इस्लामिक स्टेट आँफ इराक एंड लेवंत (आई.एस.आई.एल.) ने इराकी सरकार और शिया समुदाय के खिलाफ़ हिंसक अभियान छेडा है | इसका असर पूरी दुनिया में दिख रहा है | सांप्रदायिक आग की लपटें भारत भी आ रही हैं | लखनऊ सहित कई शहरों में एहतियात के तौर पर सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए गए हैं | पहली बार शिया-सुन्नी में टकराव हिंसक रूप लेता जा रहा है | आतंकियों ने इराक के मोसुल और तिकरित जैसे बड़े शहरों पर कब्ज़ा कर सरकार की नींद हराम कर दी | विवश होकर सरकार ने अमेरिकी सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है | नागरिक, प्रेक्षक सद्दाम हुसैन की बर्बरता और अमेरिकी दखल से उपजी अराजकता की तुलना कर सिहर जाते हैं | हजारों कत्ले-आम और करोड़ो का नुकसान क्या रुक पाएगा ? उत्तर अब अमेरिका भी नहीं देना चाहता है | स्थिति इतनी नाज़ुक है की ईरान भी इराकी शियाओं और खासकर कर्बला व नज़फ़ जैसे शिया तीर्थ स्थलों की हिफ़ाजत के लिए अमेरिका से हाथ मिलाने की तैयार है |

इराकी शिया समुदाय के सर्वोच्च धर्मगुरु अयातुल्ला अल सीस्तानी ने सुन्नी आतंकियों के खिलाफ़ जिहाद का एलान कर दिया है | इस अनर्थ की सबसे बड़ी जवाबदेही अमेरिकी दोहरी नीतियों पर जाती है | ‘तेल’ पर कब्ज़ा करने की कोशिश की, सफल ना हुआ तो आतंकवाद को पनाह दी ताकि हथियारों की फैक्ट्री फलती फूलती रहे | इस दोहरी चाल का शिकार आज पूरा अरब देश है | पाकिस्तान, अफगानिस्तान, मिस्त्र, अल्जीरिया, सीरिया, ईरान, इराक समेत दो दर्ज़न इस्लामिक देशों में त्राहि-त्राहि मच रही है | अमेरिका के सामने घुटना टेके मुस्लिम देश सऊदी अरब, कवैत, बहरीन आदि में शान्ति है | कहने को तो इराक से आतंकी संगठन अलकायदा को अमेरिका ने खत्म कर दिया था, लेकिन अमेरिकी सेना के जाने के बाद ख़ुफ़िया एजेंसी एफ.बी.आई. ने नए नाम से आतंकी संगठन रजिस्टर्ड करा दिया था जिसका नाम है आई.एस.आई.एस. इसका लक्ष्य इराक और सीरिया के सुन्नी इलाकों को एक इस्लामिक देश बनाना है, जहाँ शरिया कानून लागु किया जा सके | इस तरह के अनेक संगठन है जिनके इरादे कुछ हैं और काम कुछ| अमेरिकी प्रायोजित आतंकी संगठन ने पूरी दुनिया को हिंसा के दावानल में ढकेल दिया है| अमेरिका ‘तेल’ पर नियंत्रण कर पुरे विश्व की अर्थव्यवस्था को अपने काबू में रखना चाहता है | इस कारण तेल प्रभुत्व वाले देश पर वह हर हाल में काबू करना चाहता है | उसी तरह जो देश उसकी हाँ में हाँ नहीं मिलाते, वहाँ आतंकवाद की पोध लगाना नहीं छोड़ता | पूरी दुनिया एक ध्रुवीय व्यवस्था से चले, यही अमेरिका की इच्छा है |

जो हालात बन रहे हैं, ऐसा लगता है कि इराक तीन भागों में बंट सकता है, उत्तर के पहाड़ कुर्द क्षेत्र, बसरा और उग्म कसर बंदरगाह तक का बड़ा भाग शिया क्षेत्र और इनके बीच एक सुन्नी क्षेत्र | तब इराक जर्जर रूप में भी एकजुट था | इराकी प्रधानमंत्री नूर अली मलिकी की शिया प्रभुत्व वाली सरकार की मनमानी, एक विशेष समुदाय शिया मतावलंबियों को हर संभव मदद देना, सुन्नी समुदाय की उपेक्षा, जेल में बेकसूरों को ठूंसना, सामूहिक फांसी दिलवाना, अल्प्संख्याकों को नज़रंदाज़ करना जैसे कारक से आतंकवाद को खाद और पानी मिलता रहा| आई.एस.आई.एल. के हज़ारों जेहादी लड़कों ने जबरन उत्तर और पश्चिमी सुन्नी बहुल प्रान्तों में कब्ज़ा कर फौज, प्रशासन के पुरे तंत्र को समाप्त कर दिया | आतंकिओं ने किरकुक के तेल उत्पादन केन्द्रों पर कब्ज़ा कर लिया | तेल की सप्लाई को ठप करने से देश की अर्थव्यवस्था ढेह जाएगी | यह देश भी अन्य देशों को भांति अमेरिका का मोहताज़ हो जायेगा और फिर अमेरिका यह भी अघोषित, अप्रत्यक्ष रूप से उपनिवेश बन जायेगा | आजादी और निरंकुशता के बीच टकराहट के साथ कशमकश लगातार चलती रहती है |

Iraq-with-Ur-site-and-cities-OLह्यूमन राइट्स वांच की लेट्टा टेलर के मत में, आई.एस.ए.एल. और अलकायदा काफ़ी पहले से न्याय तंत्र को प्रभावित कर रहे थे | कारोबारियों से जिहादी टैक्स वसूलते थे | तब भी इराक में भारी-भरकम सैन्य और सुरक्षा महकमे ने कुछ नहीं किया | खोफजदा मुल्क से हजारों लोगो का पलायन हो रहा है | सूत्रों के मुताबिक, अगला टारगेट अमेरिका का ईरान है | सुन्नी समर्थित आतंकी संगठनों के हमले से बौखलाई सरकार ने सात लाख सुन्नियों को जो सेना, पुलिस और नागरिक क्षेत्रों में मेहत्व्पूर्ण पदों पर थे, बर्खास्त कर दिया | सुरक्षा की भांति बढ़ रहा भ्रष्टाचार का मुंह और लालफीताशाही ने इराक की कमर तोड़ डी | दो नितर देश सुअदी अरब और क़तर आई.एस.आई.एल . को सीरियाई राष्ट्रपति बसर अल असद को सत्ता से च्युत करने के लिए मदद कर रहे हैं जबकि रियाद और दोहा शिया प्रभुत्व वाली मलिकी सरकार को हटाने के लिए मदद मुहैया करा रहे हैं | युद्धग्रस्त पश्चिम एशियाई देशों मेंनाजुक स्थिति बनी रही तो तेल की कीमत आसमान को छूने लगेगी जिससे पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित हो जाएगी| विदित है की सऊदी अरब के बाद इराक़ भारत को सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है | केवल इराक भारत को बीस बिलियन तेल की वार्षिक आपूर्ति करता है | लगभग 90 फीसदी इराक का तेल शिया बहुल दक्षिणी क्षेत्र में है | यहाँ अब आतंकियों का कब्ज़ा है | पिछले दशक से खासतौर पर 9/11 लडाइयों (इराक और अफगानिस्तान), भारत ने मध्यपूर्व के देशों से बेहतर संबंध बनाने का भरसक प्रयास किया | इराक, सीरिया और लीबिया के मामले में भारत सरकार ने रूस के कंधे का उपयोग किया लीबिया को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ में रूस और चीन का समर्थन किया | हालांकि, भारत ने अमेरिका निति का भी विरोध नहीं किया | विदित है की मध्यपूर्व के देशों में बड़ी तादाद में भारतीय डॉक्टर, इंजिनियर, टीचर, श्रमिक, नर्स, कामगार कार्य करते हैं| सिरिया के संबंध में भी भारत दो राह  पर है | सुरक्षा परिषद् में भारत ने अमेरिका और यूरोपीय संघ का समर्थन किया | हालांकि, वह असद का कभी समर्थन करता है तो कभी   विरोध |

केवल उदारवादी गुट को हर संभव सहायता का अमेरिकी दावा खोखला है | सिरिया विपक्ष पूरी तरह जिहादी और अलकायदा से जुड़े संगठनों के नियंत्रण में है | इन्हें अमेरिका धन और हथियार मुहैया कराता है | भारत की मध्य-पूर्ण देशों के लिए कोई अलग नीति नहीं है | यहाँ भी अमेरिका और रूस का वर्चस्व है | हालांकि, भारतीय यात्री जब इन देशों की यात्रा करता है तो वहाँ के बाशिंदे गर्व महसूस करते हैं | मिस्त्र, सीरिया और मेसोपोटामिया (इराक) का सांस्कृतिक संबंध भारत के साथ काफ़ी गहरा है | कैरो से बगदाद तक अल-हिंदी की साफ़ झलक मिलती है |

* क्या है आई.एस.आई.एस. ?

  • स्लामिक राज्य इराक का आतंकी गुट जो आई.एस.आई. के नाम से भी जाना जाता है और अलकायदा का पूर्ववर्ती है |
  • र्ष 2013 में इसने सीरिया तक विस्तार किया और आई.एस.आई.एस. बन गया |
  • इस संगठन के पास 11 हज़ार लड़ाके हैं, जिसमें 6 हज़ार इराक में जबकि पांच हज़ार सीरिया में |
  • ख्ती से नैतिकता का कोड लागु करते है | चोरी, शराब, ध्रूमपान, संगीत और फुटबॉल खेलने पर पाबन्दी है |
  • प्रमुख है अबू बकर अल बग्दै | अमेरिका हमला के बाद वर्ष 2003 में विद्रोही गुटों में सक्रीय, वर्ष 2010 से इस संगठन का कर्ताधर्ता |

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