उपहार


राशि सिंह

“भैया आज यहाँ बहुत भीड़ है ।”छोटी सी नन्ही ने अपना नन्हा सा हाथ मॉल के बाहर जमा भीड़ की ओर करते हुए अपने भाई भोलू से भोलेपन से कहा ।
“हाँ ,यहाँ तो रोज ही रहती है |समय बर्बाद न कर जल्दी जल्दी देख ।”कचरे के डिब्बे में सिर घुसाये भोलू ने प्लास्टिक की बोतलें और ग्लासों को जल्दी जल्दी अपने बोरे में भरते हुए कहा । वह एक भी मिनट बर्बाद नहीं करना चाहता था ।
“मेरा बोरा तो भर गया । इसीलिए तो कह रही हूँ कि आज ज्यादा कचरा है ।”नन्ही ने खुशी से चहकते हुए कहा ।
फटी सी फ्राक पहिने बाल तो लग रहा था कई दिनो से बँधे ही नहीं थे । होठों के ऊपर नाक बहकर सूख गयी थी ।
मॉल के बाहर बने ग्राउण्ड पर विभिन्न प्रकार के झूले ,मोटरगाड़ी और टेडीज वगैरह थे जिनके साथ बच्चे खूब एन्जॉय कर रहे थे ।
नन्ही का मन भी हिलोरें भरता कि काश वह भी इन झूलों पर झूल पाती ।
“हैप्पी मदर्स डे डीयर ।”एक आधुनिक महिला ने बाहर आकर जोर से खिलखिलाते हुए किसी को विश किया ।
“देखा भैया ….आज कुछ तो है …मैंने कहा था न ।”नन्ही ने उछलते हुए कहा ।
“आज मातृ दिवस है ।”भोलू ने थोड़ा चिढ़ते हुए कहा ।
“इस पर क्या होता है भैया ?”
“माँ को उपहार देते हैं ।”
“हम भी देंगे …।”नन्ही ने खुश होते हुए कहा तो भोलू भी मुस्करा दिया ।
“मगर देंगे क्या ?”नन्ही ने फिर प्रश्न किया ।
“आज माँ को कोठियों का झूँठा खाना नहीं हम कुछ बाजार से खरीदकर ले जायेंगे ।”भोलू ने खुश होते हुए कहा ।
“हाँ भैया औए मैं माँ को एक जोड़ी चप्पल दूँगी । देखा है माँ के पैरों की विवाईयों से कैसे खून रिश्ता है फिर भी झाडू पौछे के लिए जाती है ।”नन्ही ने आँखों में आँसू भरकर रोते हुए कहा ।
“ठीक है चलो चलते हैं।”और दोनों अपने अपने कचरे के बोरे को काँधे पर रखकर चल दिए बेचने ,आखिर आज माँ को गिफ्ट जो देना था ।

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