कांग्रेस के घोषणापत्र पर छाया राजग का साया


शिवाजी सरकार

कांग्रेस के मानस में केवल भारतीय जनता पार्टी और राजग पैठ जमाए हुए नज़र आया | घोषणापत्र आमतौर पर अपने कार्यक्रमों को बताता है | किन्तु कांग्रेस का 2014 का चुनावी घोषणापत्र का कार्यक्रम व इसके पन्ने भाजपा पर ही केन्द्रित रहा | कांग्रेस भाजपा ग्रसित ही दिखती है;  महंगाई मुद्दा नहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, रक्षामंत्री व चुनाव घोषणा समिति के अध्यक्ष ए. के. अंटोनी, पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी, उपाध्यक्ष राहुल गाँधी, या महासचिव जनार्दन द्विवेदी किसी ने भी महंगाई का जिक्र करना भी जरूरी नहीं समझा | घोषणा पत्र के एक कोने में बस यह कहा गया कि महंगाई तो होनी ही है |

 प्रधानमंत्री ने तो भ्रष्टाचार को भी कोई मुद्दा नहीं माना | उन्होंने कहा यह तो विकासशील अर्थनीति में होना ही है | यदि कांग्रेस कहीं वापस आती है तो देश में महंगाई की मार बढ़ेगी | भ्रष्टाचार तो चरम पर होने की गारंटी इस घोषणापत्र ने कर दी है |इसके अतिरिक्त सभी भाजपाग्रस्त ही दिखे घोषणा पत्र के पहले दो पन्ने और आखिरी पन्ना भी केवल भाजपा और राजग का ही जिक्र करते नजर आता है |

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने भाषण की शुरुआत आक्रामक मुद्रा में  राजग को कोसते हुए की | उन्होंने कहा,हमने अपने विरोधियों से अच्छा काम किया | हमने विकास का कार्यक्रम दिया | राजग (1998-2004) ने केवल 6 प्रतिशत विकास दर हासिल की थी | यूपीए के प्रथम कार्यकाल में विकास दर 8.4 प्रतिशत रही और यूपीए के दूसरे कार्यकाल में 7.3 प्रतिशत रही | औद्योगिक विकास 5.5 प्रतिशत के मुकाबले यूपीए के प्रथम कार्यकाल ने 9.2 प्रतिशत और यूपीए दूसरे कार्यकाल ने 5.5 से 6 प्रतिशत हासिल की | ( किन्तु मनमोहन सिंह लगता है भूल गए कि उन्हीं की सरकार के आंकड़े बताते है की पिछले 2 साल में यह विकास लगभग शून्य पर आ चूका है | उद्योग जगत त्राहिमाम त्राहिमाम कर रहा है और भ्रष्टाचार पर रो रहा है ) |

गरीबी के मामले में उन्होंने 1993-1995, नरसिम्हा राव सरकार, को चुना जब उन्होंने कहा 0.7 प्रतिशत गरीबी घटी थी | यूपीए के प्रथम एवं द्वितीय कार्यकाल में 2.18 प्रतिशत गरीबी घटी है और 14 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आ गए | उन्हें मूडी और गोल्डमेन के उदगार याद नहीं आये | इन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने सरकार के आंकड़ों  को सही नहीं बताया | इनका कहना है कि सरकार ने रूपया 750 के जिस आंकडें पर गरीबी निर्धारित की है उसमे महंगाई की मार शामिल नहीं है | यदि इसे शामिल किया जाये तो रूपया 1400 का आधार बनेगा | इसका सीधा-सीधा अर्थ होगा की कम से कम 14 करोड़ और लोग गरीबी रेखा के नीचे जा चुके है | अगर उनके खाद्य कानून के आंकडें को गौर करे तो भी 81 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे है |

निवेश पर भी उन्होंने राजग को कोसा | उन्होंने कहा कि राजग में 25 प्रतिशत निवेश बढ़ा था जबकि यूपीए के प्रथम कार्यकाल में यह 35 प्रतिशत बढ़ा और यूपीए के दूसरे कार्यकाल में 3.5 प्रतिशत बढ़ा | किन्तु हाल ही में व्यवसायियो के संगठन फिक्की ने अफ़सोस जताया कि महंगाई और भ्रष्टाचार के चलते देश में निवेश कम हो रहा है | कई सरकारी आंकड़े भी कहते है कि देश में निवेश कम होता जा रहा है | फिर भी मनमोहन  सिंह कहते है, हर मामले में यूपीए का प्रदर्शन राजग से बेहतर रहा |

उन्होंने अपने भाषण की समापन भी भाजपा को कोसते हुए ही किया | उन्होंने कहाभाजपा कहती रही कि मै कमजोर प्रधान मंत्री हूँ और अपना काम छोडकर भाग जाऊँगा | मैं ने उन्हें गलत साबित किया है | भाजपा जो कुछ भी कहती है उस पर विश्वास करने की कोइ जरूरत नहीं है |

पार्टी अध्यक्षा सोनिया गाँधी शांत और गरिमामयी रूप में पेश आई | पर वे भी भाजपा से अपने को आगे नहीं ले जा पाई | उन्होंने कहा वाराणसी में नरेन्द्र मोदी को निश्चित रूप में चैलेंज करेंगे | और क्यों न करे ? प्रत्याशी पर विचार हो रहा और देश को जल्द ही वह नाम बता दिया जाएगा |उन्होंने कहा कि, हमें सर्वेक्षण और जनमत पोल पर भरोसा नहीं है | ये 2004 और 2009 में गलत साबित हुए | इस बार भी हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे | घोषणा पत्र में हमने सबका ख्याल रखा है | यह एक एक पवित्र दस्तावेज है | हम धर्मनिरपेक्ष भारत के लिए लड़ते रहेंगे |

उपाध्यक्ष राहुल गाँधी बहुत ही उत्साही और आक्रामक दिखे | उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस बार पिछले चुनावों से भी ज्यादा सीटें लेकर आएँगी | भाजपा अलग थलग पड़ी हुई है | उसका तमिलनाडु, बिहार, बंगाल और उड़ीसा में कोई साथी नहीं है | राजग के पुराने साथी उसे छोड़ चुके है और नया कोई दल उसे समर्थन नहीं दे रहा है | इनमे नितीश कुमार भी शामिल है |कांग्रेस के तो अनेक साथी है जैसे अजित सिंह के राष्ट्रीय लोक दललालू यादव के राष्ट्रीय जनता डाल, शिबू सोरेन के झारखण्ड मुक्ति मोर्चा और शरद पवार के NCP | हमारा कोई गठबंधन बंगाल और तमिलनाडु में नहीं है |

नरेन्द्र मोदी का नाम लेते हुए उन्होंने कहा, यह एक व्यक्ति नहीं विचारधारा है | यह विचारधारा लोगो को विभाजित करती है | कांग्रेस के लिए वह कोई चुनौती नहीं है | भाजपा का गुब्बारा 2004 तथा 2009 में फुटा था और इस बार भी फूटेगा | आखिर भाजपा चुनौती कैसे हो सकती है ? भारत की जनता तो गाँव में बसती है |उनका कहने का तात्पर्य था कि भाजपा गाँव में तो है नहीं उसे कौन वोट देगा |

गाँव की जनता को लुभाने के लिए उन्होंने कहा कि बढे उद्योग घरानों को गाँव में पहुंचा देंगे (क्या गाँव भी अब उद्योग घराने के जागीर होगी ?)  वे खरबों डॉलर का निवेश करेंगे और लाखों लोगों को नौकरियां देंगे | व्यवसायी घरानों को व्यवसाय करने की पूरी छूट होगी |कांग्रेस ने देश का सबसे तेजी से विकास किया है | गरीबी हमने घटाई है | देश में अर्थनीति के धीमी चाल तो अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में आई समस्या से है | “अर्थात इसमें कांग्रेस का कोई दोष नहीं है” |

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