कलाम दिवंगत नहीं हो सकते


प्रभाष कुमार झा

प्रेरक, मार्गदर्शक, दार्शनिक, दोस्त, शिक्षक, वैज्ञानिक, प्रशासकGolden Goose Superstar Sneakers Sale पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के व्यक्तित्व के न जाने और कितने पहलू थे। साधारण और गरीब परिवार में जन्म लेने के बाद भी किस तरह से म Burberry Scarf Outlet जब ूत इरादे और मेहनत के सहारे देश के सर्वोच्च स्थान तक पहुंचा जा सकता है, इसकी मिसाल थे डॉ. अब्दुल कलाम। उनका जीवन, उनकी बातें, उनका कर्तत्व, उनकी किताबें और उनकी सोच ने न जाने कितनों को ना जाने कितना कुछ सिखाया। आज उनका शरीर हमारे बीच नहीं है, लेकिन कलाम जैसी विभूतियां कभी दिवंगत नहीं होतीं। जब कभी ऊर्जा और जीवट से लबरेज व्यक्तित्व की चर्चा होगी, मिसाइल मैन की मिसाल दी जाएगी।

कलाम साब यूँ अचानक चले जाएंगे ऐसा किसी ने सोचा न था। देश-दुनिया के असंख्य लोगों को उनके निधन से सदमा-सा लग गया। कलाम का सोमवार को आईआईएम शिलॉन्ग में एक व्याख्यान देते समय दिल का दौरा पड़ने के बाद निधन हो गया। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम क्षण तक स्वयं को काम के लिए समर्पित किया, चाहे मिसाइल कार्यक्रम के लिए हो, चाहे राष्ट्रपति पद पर रहते हुए, या फिर राष्ट्रपति के कार्यकाल के बाद शिक्षक के तौर पर। राष्ट्रपति से हटने के बाद उन्होंने अपना प्रिय काम चुना। वह छोटे-छोटे हजारों लाखों बच्चों के दिलों में आग जला रहे थे कि भारत को 2020 तक विकसित राष्ट्र बनाएंगे। आखिरी क्षण तक बच्चों को पढ़ाते रहे और देश के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया।
यह कहना किसी भी तरह से अतिश्योक्ति नहीं है कि कलाम दारा शिकोह की परम्परा के वाहक थे। ज्ञान विज्ञान, संस्कृति में आदर्श प्रस्तुत किया। सात भाई बहनों में सबसे छोटे अवुल पकिर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम के माता-पिता ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि रामेश्वरम जैसे छोटे कस्बे का लड़का सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को अपनी प्रतिभा से चौंका देगा। कलाम का जन्म एक तमिल मुस्लिम परिवार में 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु में हुआ था। उनके पिता जैनुलआब्दीन एक नाव के मालिक थे और मां आशियम्मा घर संभालती थीं। कलाम की शुरुआती शिक्षा रामेश्वरम के प्राथमिक स्कूल में हुई। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले कलाम ने बेहद कम उम्र से कमाना शुरू कर दिया था। स्कूल खत्म होने के बाद वह पिता की मदद के लिए अखबार बेचते थे।
रामानाथपुरम स्कूल से स्कूली शिक्षा हासिल करने के बाद कलाम ने मद्रास विश्वविद्यालय से 1954 में भौतिकी शास्त्र में स्नातक की शिक्षा हासिल की। इसके बाद साल 1955 में उन्होंने मद्रास से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की। कलाम एक फाइटर पायलट बनना चाहते थे, लेकिन उनका नंबर नहीं आ पाया। 1958 में मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से स्नातक करने के बाद कलाम रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में नौकरी करने लगे। शुरुआत में उन्होंने भारतीय सेना के लिए एक छोटा हेलिकॉप्टर बनाता था, लेकिन वह इससे संतुष्ट नहीं थे। इसके बाद 1962 में उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के साथ काम करना शुरू किया।
साल 1965 में कलाम ने डीआरडीओ में स्वतंत्र रूप से रॉकेट प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया। 1980 में भारत ने अपने पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएलवी-3) से रोहिणी सैटलाइट को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक स्थापित किया। कलाम इसके प्रॉजेक्ट डायरेक्टर थे। वह अक्सर कहा करते थे कि अलग ढंग से सोचने की हिम्मत करो, आविष्कार का साहस करो, अनजान राह पर चलने का और असंभव को खोजने का साहस करो और समस्याओं को जीतो और सफल बनो। यही वे महान गुण हैं, जिनकी दिशा में तुम अवश्य काम करो। इस सूत्र वाक्य को उन्होंने अपने जीवन में भी लागू किया। उन्होंने भारत को रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से रक्षामंत्री के तत्कालीन वैज्ञानिक सलाहकार डॉ वी.एस. अरुणाचलम के मार्गदर्शन में ‘इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम’ की शुरुआत की। इस प्रोग्राम के तहत त्रिशूल, पृथ्वी, आकाश, नाग, अग्नि और रूस के साथ संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें बनाई गईं।
21वीं सदी में जवान होती पीढ़ी के सामने कलाम एक प्रेरक पुंज के रूप में सामने आए। उनके पास एक विजन था, देश को विकसित मुल्कों की बराबरी में ला खड़े करने का सपना था। जिस चीज के सहारे कलाम ने देश को बदलने का ख्वाब देखा, वह है साइंस और टेक्नॉलजी। तकनीक से उनके लगाव ने सिर्फ युवाओं के बीच ही नहीं, सभी धर्म-जाति-संप्रदायों के बीच उन्हें खासा लोकप्रिय बनाया। बेशक, डॉ. कलाम से हमारा साथ अब छूट गया है पर कह सकते हैं कि उनकी प्रेरणा हमेशा हमारा साथ देगी और लगातार आगे बढ़ते रहने की दिशा दिखाती रहेगी। कलाम साब आने वाली शताब्दियों तक भारत के हीरो रहेंगे । भारत माँ का एक बहुत प्यारा बेटा आसमान में जरूर चला गया लेकिन सहस्राब्दियों तक ये तारा दूर गगन में चाँद-सा चमकता रहेगा।  आपको  कैसे भूल पाएगा देश..अलविदा कलाम साहब। बहुत याद आएंगे आप। श्रद्धांजलि !!!
(लेखक पत्रकार हैं)

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