ऐसिड अटेक


कमल धमीजा

सड़क के किनारे से जब वो गुजरी उसकी झलक मात्र से मुझे अपनी बेटी नजर आई, और आये भी क्यों ना ! मेरी बेटी मेलबोर्न में उच्च शिक्षा के लिए 2 वर्ष के लिए गई हुई है। गुलाब सा खिला चेहरा आँखों में आसमान में बहुत ऊँचा उड़ने का ख्वाब लिए चली जा रही थी। अचानक मर्मान्तक उसकी चीख से जैसे वातावरण भयानक हो उठा। जिन्दगी दौड़ रही थी सब अपने में अस्त-व्यस्त से थे किसी ने भी उसकी चीख पर ध्यान नहीं दिया आते रहे जाते रहे मैं तुरंत दौड़ते हुए उसके पास पहुँची, मेरी आँखे डर के मारे फटी रह गई। कुछ समझ नहीं आया कैसे हुआ किन्तु मुझे एक बाइक तेजी से भागती नज़र आई। मामला समझ आया किसी मनचले ने उस मासूम सी लड़की पर ऐसिड अटेक किया था। मानो किसी राक्षस ने उड़ती हुई तितली को मुट्ठी में मसल दिया हो जो अभी उड़ना चाहती थी फूलों पौधों पर जीवन का आनन्द लेना चाहती थी।
उसकी दाई बांह बुरी तरह झुलस गई थी, चेहरा बुरी तरह झुलस कर बुरी तरह विकृत हो चुका था। मानवता थर्रा उठी थी। मैंने तुरंत जो समझ आया पुलिस को 100 नम्बर फोन किया। कुछ देर बाद पुलिस आई और तुरंत उस लड़की को लेकर हॉस्पिटल ले गई जहाँ उसका उपचार शुरू हो गया। मैंने वहाँ जो देखा पुलिस को बयाँ कर दिया। पुलिस ने मुझे साभार विनम्रता के साथ घर जाने की अनुमति दे दी। कुछ दिन बाद में उस लड़की से मिलने हॉस्पिटल गई लड़की मुझे देखकर बुरी तरह रोने लगी मैं उसके पास गई उसको अपने अंक में भर लिया, उसकी पीठ थपथपाने लगी। जब कुछ वो संयत हुई तो उसने अपने नाम पायल बताया वह बी कॉम की छात्रा थी। कॉलेज से लौट रही थी तब यह दर्दनाक वीभत्स घटना घटी।
लड़का मुस्लिम आवारा किस्म का लड़का था जो हमेशा कॉलेज के बाहर उसको छेड़ता था और उससे प्यार की कसमें खाता था। एक दिन उसने ज्यादा ही बदतमीजी कर दी उसका हाथ पकड़कर अपने सीने से लगाने लगा। उसी क्षण पायल का सीधा हाथ बड़ी तेजी से थप्पड़ की शक्ल में उसके गाल पर पड़ा। उसने पायल को देख लेने की धमकी भागते भागते दी। फिर जो हुआ वो उससे भी अधिक असहनीय था वर्तमान में। ऐसिड अटेक के बाद पायल तिल तिल जलती रही तड़पती रही। जब गलती से रोटी बनाते वक्त गर्म तवे पर हाथ लग जाता है तो कितनी जलन होती है ? यहाँ तो इस मासूम सी बच्ची ने कितनी जलन-झुलसन बर्दाश्त की है। पूरा जीवन अंधकारमय हो गया था पायल का। वह भविष्य-जीवन के प्रति आशंकित हो गई थी। कैसे समाज का सामना करेगी ? कौन उसको अपना जीवनसाथी बनाएगा ? क्या वो साधारण जिन्दगी जी पाएगी ? उसके जीवन से आनन्द उल्हास समाप्त हो गया था !
ऐसिड अटेक करने वाला लव जेहादी अकरम को पुलिस ने बड़ी मेहनत के साथ पकड़ा। किन्तु वो नाबालिग निकला मजबूरन पुलिस को शातिर लवजेहादी को बाल सुधार गृह में भेजना पड़ा। इस जमात का यह षड्यंत्र ही तो है हिन्दू बेटियों को प्रेम-जाल में फंसाना ! चिड़ियाँ ना फंसे तो उसके साथ इस प्रकार की दरिंदगी करो हिन्दू बेटियों के साथ बेरहमी के साथ सामूहिक बलात्कार निर्मम हत्या कर सड़क के किनारे फेंक दो। यही इस जमात का कायदा है। यही इनका मजहब है !
कब कानून बदलेगा कब हिन्दू समाज इन दरिंदो के खिलाफ एकजुट उठ खड़ा होगा यह यक्ष प्रश्न पूछ रही है पायल आप से हम सभी से ! कुछ तो दीजिये जबाब !

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