पाकिस्तान की सत्ता पर आर्मी चीफ एवं आतंकियों की नजर


डॉ.शोभा भारद्वाज

25 जुलाई को पाकिस्तान में चुनावों की घोषणा की गयी है ।जबकि भय था पाकिस्तान में कभी भी मिलिट्री राज लौट सकता है ।.पाकिस्तान के निर्माण के बाद से ही वहाँ की विदेश नीति में भारत विरोध प्रमुख रहा है चाहे जनता की चुनी गयी सरकार हो या आर्मी चीफ सब भारत विरोधी वक्तव्य देते रहते हैं ।पकिस्तान में अपनी शक्ति एवं समर्थक बढ़ाने है भारत के खिलाफ उग्र से उग्रतम भाषा का प्रयोग करना वहाँ की जनता भाता है, वह मजबूत पाकिस्तान देखना चाहती है । सैन्य शक्ति बढ़ाने के लिए रक्षा बजट पर शुरू से ही सबसे अधिक खर्च किया जा रहा है । शुरू में रक्षा मंत्रालय प्रधान मंत्री लियाकत अली के पास था लेकिन सत्ता पर सदैव आर्मी जरनलों की नजर रही है उनको प्रजातांत्रिक व्यवस्था रास नहीं आती उनके मुहँ सत्ता का खून लग गया है इसी लिए शुरू में अमेरिकन ब्लाक के साथ जुड़ कर मिलिट्री एड प्राप्त की ।
यहाँ तीन शक्तियाँ काम करती हैं आईएसआई , आर्मी जनता की चुनी सरकार और अब आतंकियों के आका हाफिज सईद भी सत्ता को चुनाव लड़ कर हथियाना चाहते हैं लेकिन पाकिस्तान का बुद्धिजीवी वर्ग प्रजातंत्र का समर्थक रहा है उन्हीं की वजह से चुनाव होते हैं।
पाकिस्तान की सत्ता पर अधिकार करने वाले पाकिस्तानी सेना के पहले कमांडर –इन- चीफ जनरल मु० अयूब खान थे उन्होंने सरकार के विरुद्ध सैन्य विद्रोह कर सत्ता पर कब्जा किया था 1958 से 1969 तक राष्ट्रपति पद पर आसीन रहे उनके अनुसार सेना की सत्ता पाकिस्तान के हित में है एवं उन्होंने इसे शासन के योग्य भी बनाया ।सेना धीरे – धीरे इतनी मजबूत हो गयी इससे लोकतंत्र खतरे में आ गया ।उन्हीं के राष्ट्रपति काल में 1965 का भारत पाकिस्तान युद्ध हुआ। ताशकंद समझौते के बाद अयूब साहब की ताकत कमजोर होती गयी 1969 में सत्ता याहियाखान को सौंप कर राजनीति से अलग हो गये ।याहियाखान के जुल्मों से त्रस्त बंगालियों ने पाकिस्तान की सत्ता के खिलाफ विद्रोह कर दिया लेकिन सेना बंगालियों के जन विद्रोह के सामने नाकाम हो गयी । जुल्फिकार अली भुट्टो की सत्ता की चाह को 1971 में बंगला देश के निर्माण का कारण माना गया। पाकिस्तान की सत्ता मिलिट्री जरनल जिया –उल –हक ने संभाली भुट्टो का अंत न्यायिक प्रक्रिया से किया गया उन्हें फांसी की सजा दी गयी ।
जिया समझ चुके थे भारत को युद्ध में हराना आसान नहीं है अत :आईएसआई को खुला बजट देकर भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ाया जाये । भुट्टो के प्रोग्राम को आगे बढाते हुए देश को एटमी ताकत भी बनाया सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए इस्लाम के नाम का सहारा लिया वह अपने पास सदैव कुरान रखते थे , देश में धीरे-धीरे वह इस्लामिक कानून लागू किया गया दीनी सियासत का तोड़ पाना मुश्किल था बुद्धिजीवी वर्ग लाचार हो गया । दिसम्बर 25 /1979 में रशिया ने अफगानिस्तान में प्रवेश किया ।अमेरिका स्वयं सीधी लड़ाई न लड़ कर चाहता था पाकिस्तान अफगान मुजाहिदीनों की सहायता करे जिया ने मौके का लाभ उठाया अमेरिका ने जम कर पाकिस्तान को अत्याधुनिक हथियार दिए अफगानिस्तान से रूस चला गया लेकिन पाकिस्तान की अपनी हालत खराब हो गयी आतंकी उनके देश में फलने फूलने लगे लेकिन आतंकियों के पोषकों नें आतंकियों को जेहाद का पाठ पढ़ा कर उनका रुख काश्मीर एवं भारत की तरफ मोड़ दिया लेकिन पाकिस्तान भी आतंकियों के हाथों बच नहीं पा रहा था आये दिन सार्वजनिक स्थानों पर बम फटते थे । जब स्वर्गीय बेनजीर पाकिस्तान की प्रधान मंत्री चुनी गयीं उस समय भारत के प्रधान मंत्री राजीव गाँधी थे लग रहा था दोनों युवा हैं विरोध की नीति में छोड़ कर दोनों देशों के सम्बन्धों को आगे बढ़ायेंगे ऐसा हो नहीं सका ।बेनजीर भुट्टो भी आतंक की शिकार हो गयीं ।
पूर्व प्रधान मंत्री नवाज शरीफ भी भारत विरोध के रंग में रंगे हुए थे। 19 फरवरी 1999 को भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री अटलबिहारी बाजपेयी जी ने दिल्ली से लाहौर बस सेवा शुरू की वह और कई भारत की नामी हस्तियों ने लाहौर यात्रा कर सम्बन्ध सुधारने की कोशिश की , दोनों का यह राजनीतिक कदम था अटल जी की मिली जुली सरकार थी नवाज की शक्ति भी कमजोर थी इस यात्रा का जम कर प्रचार हुआ लेकिन बाद में कारगिल युद्ध हुआ यह मई से जुलाई तक चला जबकि नवाज कहते है उन्हें करगिल में सेना के जमावड़े का पता नहीं था । यह नवाज का दूसरा कार्यकाल था । नवाज ने मुशर्रफ को आर्मी चीफ नियुक्त किया था अक्टूबर 1999 में नवाज ने जरनल मुशर्रफ की ताकत को कम करने की कोशिश की लेकिन सेनाध्यक्ष मुशर्रफ ने सत्ता पर कब्जा कर उनको जेल भेज दिया ।सऊदी अरब ने मध्यस्तता कर उन्हें जेल से निकलवा कर जेद्दा में शरण दी ।
नवाज पाकिस्तान मुस्लिम लीग के कद्दावर नेता हैं वह तीसरी बार पाकिस्तान के प्रधान मंत्री पद पर आसीन हुये थे। प्रधान मंत्री मोदी जी ने नवाज शरीफ से सम्बन्ध बढ़ाने की हर सम्भव कोशिश की। वार्ता शुरू करवाई, स्वयं उनके गृह क्षेत्र उनकी नातिन की शादी के दिन नवाज के पुश्तैनी घर गये जिसके लिए उन्हें अपने देश में आजतक विपक्ष की आलोचना झेलनी पड़ती है लेकिन पाकिस्तान में सेना का स्थान सदैव ऊंचा रहा है निर्णायक भूमिका उसी की रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय द्वारा नवाज की सत्ता जा चुकी है उन पर आरोप था नवाज शरीफ के अलावा उनके बेटे हसन ,हुसेन और बेटी मरियम ने ब्रिटेन में चार फर्जी कम्पनियाँ बना कर चार महंगी सम्पत्तियां खरीदीं थी इन सम्पत्तियों को गिरवी रख कर बैंक की मदद से70 करोड़ का कर्ज ले कर दो अपार्टमेनट खरीदे सारी खरीद फरोख्त काले धन से हुई लेकिन अपने चुनाव घोषणा पत्र में सम्पत्तियों का जिक्र नहीं किया गया सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों की खंडपीठ के सभी जजों ने एकमत होकर उन्हें प्रधान मंत्री पद के लिए अयोग्य घोषित किया यही नहीं उन्हें अपने दल का अध्यक्ष पद भी छोड़ने के लिए कहा गया। पाकिस्तान की राजनीति में नया मोड़ है क्या नवाज के हटने पर पाकिस्तान में अनिश्चितता की स्थिति का लाभ उठा कर आतंकी सत्ता में अपना अधिकार बढ़ाने की कोशिश करेंगे ?कोशिश ही नहीं हाफिज सईद ने मिनी मुस्लिम लीग बना कर चुनाव लड़ने का फैसला लिया ।हाफिज सईद आतंकी सरगना, के अनुसार नवाज द्वारा जेहाद का समर्थन न करने से सत्ता उसकी गयी है , पाकिस्तान में नारे लगे ‘जो मोदी का यार है वह देश का गद्दार है’ । सत्ता से बाहर होने के बाद नवाज साहब ने एक महत्वपूर्ण खुलासा कर पाकिस्तान में हलचल मचा दी ।
26/11 में मुम्बई पर हमले के सूत्रधार पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आका थे ,हमला आतंकियों द्वारा किया गया था।
26 नवंबर 2008 की रात अचानक मुंबई शहर गोलियों की आवाज से दहल उठा। हमलावरों ने मुंबई के दो पांच सितारा होटलों, जिनमें होटल ताज एवं होटल ओबेराय, शिवाजी टर्मिनल, शहर के लियोपोल्ड कैफे ,और नरीमन हॉउस को निशाना बना कर सात बंधकों की मार दिया ,कामा अस्पताल यहाँ हेमंत करकरे ,विजय सालसकर और काम्टे शहीद हुए शुरू में तो किसी को अंदाज़ा भी नहीं था कि मुम्बई में इतना बड़ा आतंकी हमला हो सकता है। यह खौफनाक मंजर पूरा देश टीवी के माध्यम से देख रहा था विदेशी आतंकी देश में घुस कर कैसे निर्दोषों की हत्या कर रहे थे । 166 लोग मारे गये इनमें विदेशी भी शामिल थे 300 से अधिक घायल हुए ।
नौं आतंकी मारे गये केवल जान पर खेल कर अजमल कसाब को पकड़ा जा सका हमले में पाकिस्तान के हाथ होने का ज़िंदा सबूत ।घटना के तुरंत बाद भारत सरकार ने हमले का आरोप पाकिस्तान पर लगाया लेकिन उलटा आरोप लगाते हुए पाकिस्तान ने कहा हमला बंगलादेशी और भारतीय अपराधियों द्वारा किया गया है जबकि हमले के सभी सबूत पाकिस्तान को सौंपे गये जिसमें कसाब का कबूल नामा एवं आतंकियों को लगातार निर्देश देते पाकिस्तान से आतंकियों के मास्टर माईंड के सबूत । अमेरिकन एवं संयुक्त राष्ट्र के दबाब में जमात उद दावा के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया गया एवं संगठन के संस्थापक लखवी को उसके अपने घर में कुछ समय के लिए नजर बंद किया गया । डेविड हेडली की गिरफ्तारी के बाद पता चला हमले से पहले उसने रेकी की थी भारत में आतंक की घटना को अंजाम देने के लिए आतंकियों को ट्रेनिग भी पकिस्तान में दी गयी थी। लेकिन जाँच की गति धीमी ही रही हमले के साजिशकर्ता हाफिज सईद के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गयी उलटा वाज भारत के खिलाफ जहर उगलता रहता है ।
सत्ता जाने के बाद नवाज शरीफ के इस ब्यान ने पाकिस्तान में हलचल मचा दी उनके अनुसार 26 /11 के अटैक में पाकिस्तानी आतंकी शामिल थे उनके अनुसार पाकिस्तान में कई आतंकी संगठन सक्रिय हैं । पाकिस्तान की अंग्रेजी अखबार वहाँ के बुद्धिजीवियों में प्रसिद्ध है उसमें दिए गये एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा देश कैसे चल सकता है जब देश में दो या तीन सरकारे समानांतर चल रहीं हों। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में सरकार सम्वैधानिक प्रक्रिया से चुनी गयी सरकार ही होनी चाहिए ।देश में सक्रिय आतंकी संगठनों को क्या सीमा पार कर मुम्बई में लोगों की हत्या की इजाजत देनी चाहिए थी ? उन्होंने प्रश्न किया रावलपिंडी की आतंकरोधी अदालत में बम्बई हमले की प्रक्रिया अभी तक पूरी क्यों नहीं हुई ?
पूर्व प्रधान मंत्री के कबूल नामें ने पाकिस्तान के राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी ।इमरान खान क्रिकेटर से राजनेता बनें पाकिस्तानी सत्ता को पाने के लिए प्रयत्न शील रहे हैं उन्होंने नवाज पर निशाना साधते हुए कहा नवाज ने गलत ढंग से पैसा कमाया है पैसे को छिपाने तथा अपने बेटों की कम्पनियों को बचाने के लिए नवाज नरेंद्र मोदी की भाषा बोल रहे हैं । नवाज को अपने देश में लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ा । सेना ने उनके ब्यान की निंदा करते हुए कहा उनका ब्यान गलतफहमी पैदा करने वाला है यही नहीं ब्यान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है नवाज के ब्यान से भारत के दावे को मजबूती मिलती है पाकिस्तान की जमीन पर आतंकियों के ट्रेनिग कैंप हैं उन्हें सीमा पार कर आतंकी हमलों के लिए तैयार किया जाता है अन्तराष्ट्रीय समुदाय पहले से ही पाकिस्तान को शक की नजर से देखता है ।
पाकिस्तान में पहले अल्लाह, आर्मी और अमेरिका का दौर था लेकिन ट्रम्प प्रशासन ने पाकिस्तान की सहायता से हाथ खींच लिये पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगा दी है उनके अनुसार परमाणु हथियारों से सम्पन्न पाकिस्तान विश्व के लिए खतरा बन रहा है वह आतंकवाद का भी पोषक है। अब पाकिस्तान की विदेश नीति में बदलाव साफ़ देखा जा सकता है उनका झुकाव चीन एवं रूस की तरफ बढ़ रहा है ।चीन के नीतिकार नवाज शरीफ के बाद की स्थिति पर नजर रख रहे हैं उनका ग्वादर बन्दरगाह पर बहुत धन लगा है उन्होंने पैसा दीर्घकालीन लाभ के लिए लगाया है । पाकिस्तान भारत विरोधी है चीन भारत की बढ़ती शक्ति पर रोक लगाना चाहता है इसीलिए पाकिस्तान को समर्थन दे कर भारत के विरुद्ध कूटनीतिक चालें चलता रहता हैं । जब से नवाज शरीफ प्रधान मंत्री बने थे वह पाकिस्तान में आतंकी घटनाओं को रोकना चाहते थे लेकिन लगातार बार्डर से सेना के कवर में जेहादी भेजे जा रहे हैं हाफिज सईद का हौसला बढ़ रहा था पाकिस्तान में कई आतंकी संगठन सक्रिय हैं अब इस्लामिक स्टेट की विचारधारा भी सिर उठा रही है ।
नवाज शरीफ के समान कई बुद्धिजीवी पाकिस्तान में बढ़ते आतंकवाद का विरोध कर रहे हैं वहाँ प्रश्न उठ रहे हैं भारत और पाकिस्तान दोनों एक साथ आजाद हुए थे लेकिन भारत ने तरक्की की पाकिस्तान आजतक अमरीकी एड की तरफ देखता है सेना सदैव सत्ता पर कब्जा करने के लिए तैयार रहती है जनता की चुनी सरकार केवल प्रजातंत्र व्यवस्था का मुखौटा है ।अबकी बार आतंकी सईद भी अपने उम्मीदवार चुनाव में उतारना चाहता है लाजमी है उनका घोषणा पत्र इस्लामी कानून लागू करना ,जेहाद , आतंकवाद को मान्यता देना भारत विरोध एवं कश्मीर पर कब्जा ही होगा ।

No Comments