आतंक का एक ही मजहब दरिंदगी और केवल दरिंदगी


डॉ. अंजनी झा

islam and terrorism

पेशावर में गत दिनों आर्मी स्कूल में मासूमों पर कहर बरपाने वाली आतंकी वारदात के बाद पाकिस्तान सरकार ने कड़ी कार्यवाही करने के बजाय 26/11 मुंबई हमलों की साजिश रचने के अहम् आरोपी जकीउर्रहमान लेखनी को जमानत दे दी | प्रधानमन्त्री नवाज शरीफ के आतंक के विरुद्ध जंग लड़ने के एलान को केवल बयान ही समझा जा सकता है |

तहरीक-ए-तालिबान(टी.टी.पी.) के सात खूंखार आतंकियों ने फ्रंटियर कोर की वर्दी पहनकर आर्मी स्कूल को नौ घंटे के लिए बंधक बनाये रखा | लगभग ढेढ़ सौ बच्चों को मार डाला | सभी मृतक सेना के बड़े अधिकारीयों के बेटे थे | जिन्दा बचे बच्चों में से एक ने अजीब वाकया सुनाया | उसके मुताबिक, ‘उग्रवादियों ने हमसे कलमा (इस्लाम का मूल मंत्र) पढने को कहा और फिर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी |’ ऐसा करके ये दुर्दांत दैत्य महाअपराध का असली चेहरा दिखा गए, ” जो भारत के सेक्युलर मित्र कहते है कि आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता” यह बहुत बड़ा झूठ साबित करता है यह घटनाक्रम ! “आतंकवाद केवल मजहबी ही होता है, ” मजहब और धर्म में जमीं आसमां का फर्क है |” इन आतंकियों का इस्लाम की व्यवस्थाओं और उसके सिद्धांतों से लेना देना था या नहीं, इस बारे में विश्व के उलेमा धर्मगुरु ज्यादा कुछ कह सकते है | किन्तु यह घटना इस्लाम के अनुयायियों और धर्मगुरुओं और मुस्लिम राष्ट्रों को सोचने पर जरुर मजबूर करती है | यहीं कारण है दुविधा में फंसे पाकिस्तान को आतंकवादी लखवी की रिहाई टालनी पड़ी |

इस प्रकार की एक घटना 2004 में बेस्लान शहर (रूस के एक स्वायत्तशासी राज्य) में हुई थी | विचारणीय प्रश्न है कि ऐसी घटनायें मुस्लिम दुनिया में क्यों हो रही हैं ? विश्लेषकों का मानना है कि सेना-पुलिस के साथ आम जनता भी इसमें जुड़ें | उधर, तालिबानियों का कहना है कि  सेना उनके खिलाफ ऑपरेशन चला रही है, वह उनके परिवारों और उनके बच्चों को भी मारती हैं | सेना के ऑपरेशन ‘जर्ब-ए-अज्ब’ और ऑपरेशन खैबर-1 के कारण इस हमले को अंजाम दिया गया |wpid-picsart_13954764594791

अब बच्चें भी निशाने पर :

*नवम्बर,2014 : अपर खुर्रम जिले के स्कूल पर हमला, दो की मौत |

*जून,2013 : पश्चिमोत्तर पाक के बानू कस्बे में मदरसे पर हमला, 14 की मौत

*सितम्बर,2011: पेशावर के पास स्कूल बस पर हमला,3 की मौत

*दिसम्बर,2010: पश्चिमोत्तर पाक के पास स्कूल बस पर हमला, ड्राइवर की मौत

*अप्रेल,2009: स्वात घाटी के ग्लर्स स्कूल पर हमला, 12 की मौत

*अगस्त,2002: मुरी इलाके के स्कूल पर हमला, 6 मरे

तालिबान पर एक्सपर्ट अहमद रशीद के मुताबिक, ऐसे हमले करके लड़ाके सेना का मनोबल तोड़ना चाहते हैं | यह हमला मलाला को 2014 का नोबेल पुरुस्कार दिए जाने का बदला भी हो सकता है | अब दुनिया के सभी आतंकवादी संगठन अपने को नये सिरे से संगठित करने और अपनी ताकत बढ़ाने में जुटे हैं |

 

3 Comments

  1. Gauurav Joshi says:

    Pakistan is paying the price of its own mistake. Pak made these terrorist groups Feed them. Today these groups are more strong then Pak military and Pak government even cant stop the. The process of making terrorist groups started in early Pakistan in the year 1947 itself. Pakistan made a terrorist group to attack Jammu and Kashmir when Raja Hari Singh refused to be a part of dominioin of pakistan and dominion of India.These were militiant groups of Pakistan which has transformed into al quida and indian mujahidin and are challenging Pakistan Today and dominates the country.

  2. anurag says:

    excellent and motivating

  3. mridul singh says:

    worrysome